जर्मन निर्देशक वर्नर हरजोग्स की ‘मीटिंग गोर्बाचेव’ टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (टीआईएफएफ) में प्रदर्शित होने वाली सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री में से एक रहीं क्योंकि इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. डॉक्यूमेंट्री में मिखाइल गोर्बाचेव के जीवन की तमाम महत्वपूर्ण घटनाओं के चित्र और फुटेज भरे पड़े हैं और फिल्म को लंबे-लंबे इंटरव्यू के रूप में पेश किया गया है. यह डॉक्यूमेंट्री सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी में मिखाइल गोर्बाचेव के उदय के दर्शन कराती है. Also Read - अभिषेक बच्चन ने सुनाई अपनी Love Story, इस जगह किया था ऐश्वर्या को प्रपोज

वर्ष 1985 में सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी की बागडोर संभालने वाले गोर्बाचेव के बारे में यह फिल्म दिखाती है कि उन्होंने कैसे “पेरेस्त्रोइका (केंद्रीय नियोजन) और ग्लासनोस्त (लोकतंत्र) आंदोलनों को शुरू किया, जिसके कारण छह वर्षो बाद सोवियत संघ का विघटन हो गया. गोर्बाचेव कहते हैं, “पेरेस्त्रोइका मेरे एजेंडे में शीर्ष पर था.”

डॉक्यूमेंट्री में, गोर्बाचेव कहते हैं कि वह केवल क्षेत्रों को अधिक शक्तियां प्रदान कर सुधार करना चाहते थे और वह सोवियत संघ के पतन के लिए बोरिस येल्तसिन जैसे ‘लापरवाह’ नेताओं को जिम्मेदार ठहराते हैं. गोर्बाचेव हरजोग्स से कहते हैं, “मुझे अपने ही लोगों को लेकर दुख है.”

सोवियत संघ का विघटन उनकी त्रासदी है. “मुझे इस दिन का खेद है.” वह कहते हैं कि उनका दर्द अभी भी गहरा है. उन्होंने कहा, “हां, यह कठिन है. हां, यह मेरी आंतरिक समस्या है.” लेकिन वह यह कहकर अपनी त्रासदी का बचाव करते हैं, “हमने कोशिश की.”