एक बेटी, एक बीवी और एक जासूस की कहानी है आलिया भट्ट की फिल्म ‘राज़ी’. जिसमें इन तीनों ही किरदारों को आलिया ने बेहद संजीदगी से निभाया है. मेघना गुलजार के डायरेक्शन में बनी राजी बॉक्स अॉफिस पर रिलीज हो चुकी है. फिल्म के दमदार ट्रेलर को लोगों ने काफी पसंद किया था. इस फिल्म को देखने की दो ख़ास वजह है पहला आलिया की दमदार एक्टिंग जो कि हमें ट्रेलर में देखने को मिली थी और दूसरी सबसे खास वजह है कि ये फिल्म सच्ची घटना पर बेस्ड है जो कि हरिंदर सिक्का के नॉवेल ‘कॉलिंग सेहमत’ पर आधारित है. ये कहानी है एक महिला जासूस की जिसने देश के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया. उसके त्याग और समर्पण की जिसे फिल्म का शक्ल दिया गया है. आईए जानते हैं कि कौन हैं सेहमत खान..

भारतीय नेवी के एक रिटायर्ड अफसर हरिंदर सिक्का की जो कारगिल वार के दौरान आर्मी पर रिसर्च कर रहे थे. इसी रिसर्च के दौरान उनकी मुलाकात सेना के एक अफसर से हुई. जिसने उन्हें एक ऐसी कश्मीरी लड़की के बारे में बताया जो कि पाकिस्तान में जाती है और वहां के एक आर्मी ऑफिसर से शादी करती है और वहां रहकर भारत को ख़ुफ़िया जानकारी भेजती है.

न जानें कितनी बार खतरे में डालकर वह कितने भारतीय लोगों की जान बचाती है वह गुमनाम हीरो सेहमत खान. इस महिला जासूस के बारे में इतना कुछ जानकर हरिंदर सिक्का के मन में इस महिला जासूस से मिलने का ख्याल आता है. जैसे-तैसे हरिंदर सिक्का ने उसके बारे में पता किया और उससे मिलने पंजाब चले गए.

हरिंदर के काफी मिन्नतों के बाद उस औरत ने अपनी कहानी उन्हें सुनाई लेकिन ये शर्त रखी कि ये कहानी वो किसी और को नहीं बताएंगे. जिसके बाद उन्होंने ये फैसला लिया कि वह इस बहादुर लड़की की कहानी लोगों के सामने लायेंगे. दुनिया के सामने उसकी कहानी सामने आना जरुरी है लेकिन इसके साथ ही उसका असली नाम लोगों के सामने न आने पाए सिक्का ने इस बात का पूरा ख्याल रखा. जिसके बाद उन्होंने उस महिला का काल्पनिक नाम ‘सेहमत खान’ रखा. इसके साथ ही उस महिला ने सिक्का से ये वादा लिया कि उनके जीते जी वह ये नॉवेल पब्लिश नहीं करेंगे.

सिक्का ने अपना वादा निभाया और ऐसा ही किया. वादे के अनुसार सिक्का ने नॉवेल की कहानी को थोड़ा काल्पनिक ही रखा. वो सेहमत ही थी जिसकी वजह से आईएएनस विराट को समय रहते हुए पाकिस्तानी हमले से बचाया जा सका. सेहमत ने समय- समय पर अपनी जान को जोखिम में डालकर देश के लिए गोपनिय सूचनाएं इकट्ठा की. बाद में वह बेटे के साथ भारत आ गईं. उनका बेटा बड़ा हुआ और भारतीय आर्मी में एक अफसर बना. खास बात ये है कि हरिंदर सिक्का को इसे नॉवेल की शक्ल देने में 8 साल का लम्बा समय लगा.