
Shilpi Singh
शिव की नगर बनारस से निकलकर सपनो की दुनिया में आई हूं....शिल्पी सिंह बनारस वो शहर जो अपनी भड़ी,गंगा और कमाल के खाने के लिए जाना जाता है. 2009 में ... और पढ़ें
Vinod Khanna Gardener In Osho Ashram: अक्षय खन्ना के पिता और दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना अपने करियर के शिखर पर थे जब उन्होंने बॉलीवुड से विराम लेकर ओरेगन में ओशो के आश्रम में प्रवेश किया, लेकिन इस कदम को उठाने से बहुत पहले ही उनका झुकाव आध्यात्मिकता की ओर था और उनकी दूसरी पत्नी कविता ने बताया कि कुछ दुखद घटनाओं के बाद ही उन्हें आध्यात्मिकता में सुकून मिला था. विनोद खन्ना अपने करियर के शिखर पर थे जब उन्होंने बॉलीवुड से विराम लेकर ओरेगन में ओशो के आश्रम में प्रवेश किया, लेकिन इस कदम को उठाने से बहुत पहले ही उनका झुकाव आध्यात्मिकता की ओर था. आइए जानते हैं इस पर एक्टर की पत्नी ने क्या कुछ कहा था.
कविता ने लवीना टंडन के साथ एक इंटरव्यू में खुलासा किया, ‘उनका झुकाव हमेशा आध्यात्मिकता की ओर रहा. जब विनोद खन्ना 17 साल के थे, तब उन्होंने मुंबई के एक प्रतिष्ठित पुस्तक भंडार, स्ट्रैंड बुकस्टोर से ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ अ योगी’ खरीदी और उसे पूरा पढ़े बिना नहीं छोड़ा. वे पूरी रात जागकर उसे पढ़ते रहे. अपने करियर के चरम पर भी, जब भी जे. कृष्णमूर्ति (आध्यात्मिक व्यक्तित्व) शहर में होते थे, अगर उस समय उनकी शूटिंग चल रही होती थी, तो वे छुट्टी लेकर उनके प्रवचन सुनने जाते थे.’
विनोद खन्ना और ओशो के बीच संबंध की शुरुआत के बारे में बताते हुए कविता ने आगे कहा, ‘मुझे लगता है कि उन्होंने ओशो के प्रवचन तब सुनना शुरू किया जब वे अपने जीवन के एक बेहद कठिन दौर से गुजर रहे थे, उनके परिवार में पांच लोगों की मृत्यु हो गई थी, जिनमें उनके बहुत करीबी लोग भी शामिल थे, जैसे उनकी मां. जब उनकी मां का निधन हुआ, तो वे आश्रम चले गए और संन्यास ले लिया. इस तरह उनकी यह यात्रा शुरू हुई.’
कविता ने आगे कहा,’ज्यादातर लोगों को यह नहीं पता कि तीन साल तक, अपनी साइन की हुई फिल्मों की शूटिंग पूरी करते हुए, जिनमें हेरा फेरी और कुर्बानी जैसी सुपरहिट फिल्में शामिल थीं, जिनमें वे अपने सबसे बेहतरीन रूप में नज़र आए, वे आकर शूटिंग करते थे. अगर शूटिंग लोकेशन पर होती थी, तो वे वहां मौजूद रहते थे, लेकिन उनका ठिकाना पुणे था. आश्रम में उनका कमरा सिर्फ चार फीट लंबा और छह फीट चौड़ा था.’
कविता ने बताया कि ‘ओशो अपने प्रवचनों में इस बारे में मज़ाक भी करते थे, कहते थे कि कमरा इतना छोटा था कि उन्हें पलंग के ऊपर से चढ़कर तिरछे सोना पड़ता था क्योंकि वहां मुश्किल से ही जगह होती थी और उन्हें सचमुच पलंग के ऊपर से चढ़कर कमरे में जाना पड़ता था.’ विनोद खन्ना ने अपने बढ़ते फिल्मी करियर और आध्यात्मिक साधना को संतुलित रखा और कहा, ‘लेकिन उन्होंने यह कर दिखाया कैमरे के सामने वे फिल्में कर रहे थे, कैमरे के पीछे वे ध्यान कर रहे थे और वे आश्रम में ओशो के माली थे फिर वे ओरेगन चले गए’. अपनी प्रभावशाली उपस्थिति के लिए जाने जाने वाले विनोद खन्ना ने ‘मेरे अपने’, ‘अमर अकबर एंथोनी’ और ‘राजपूत’ जैसी प्रतिष्ठित बॉलीवुड फिल्मों में अभिनय किया.
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