नई दिल्ली: बॉलीवुड में मशहूर संगीतकार खय्याम अब हमारे बीच नहीं हैं. 92 साल के खय्याम ने मुंबई के एक अस्पताल में अंतिम सांसें लीं और दुनिया छोड़ गया. वह कई दिनों से बीमार थे. खय्याम ऐसे संगीतकार थे, जिनकी मधुरता में कभी कमी नहीं आई. फिल्म ‘उमराव जान’ और ‘कभी-कभी’ जैसी बेमिसाल फिल्मों का संगीत देने वाले खय्याम इन्हीं संगीतकारों में से एक थे. मोहम्मद जहूर खय्याम हाशमी, जो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में खय्याम के नाम से जाने गए.

खय्याम को फिल्म ‘त्रिशूल’, ‘नूरी’ तथा ‘शोला और शबनम’ जैसी फिल्मों में शानदार संगीत के लिए जाना जाता है. उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया. अविभाजित हिंदुस्तान के पंजाब के नवांशहर (अब पाकिस्तान) में 18 फरवरी 1927 को जन्मे खय्याम, बचपन से ही संगीत के अनुरागी थे. इसलिए विभाजन के बाद उनका परिवार जब दिल्ली शिफ्ट हुआ, तो वहां उन्होंने संगीत की सूफियाना तालीम लेनी शुरू कर दी.

नहीं रहे बॉलीवुड के बेमिसाल संगीतकार खय्याम, मुंबई के अस्पताल में 92 साल की उम्र में हुआ निधन

यह बाबा चिश्ती की संगत में संगीत सीखने का ही असर था, जो बाद में चलकर खय्याम साहब की फिल्मों में हमें सुनने को मिला. चाहे वह ‘कभी-कभी’ फिल्म के गाने हों या फिर ‘उमराव जान’ या ‘बाजार’ के गाने हों, खय्याम का संगीत लोगों के सिर चढ़कर नहीं, बल्कि उनके दिलों में उतरकर सुकून पहुंचाता है. कुछ साल पहले बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में खय्याम साहब ने बताया था कि बचपन में छुप-छुपकर फिल्में देखने की ललक ने उनमें इस इंडस्ट्री के प्रति लगाव पैदा किया था. खय्याम के बचपन के दिनों में हिंदी सिनेमा का संगीत शास्त्रीय रागों और धुनों पर आधारित हुआ करता था, सो खय्याम का संगीत भी इसी संस्कार में ढला. बाद में जब वे बाकायदा फिल्म ‘शोला और शबनम’ से फिल्म जगत के संगीतकार के रूप में जाने-पहचाने गए, तो लोगों को इस बेमिसाल फनकार की काबिलियत का अंदाजा हुआ.

खय्याम साहब को हिंदी सिनेमा में 1982 में आई मुजफ्फर अली की फिल्म ‘उमराव जान’ के संगीत के लिए ज्यादा पहचाना जाता है. इस फिल्म के गाने हैं भी इतने ही कमाल. बीबीसी को दिए साक्षात्कार में खय्याम ने कहा था कि कमाल अमरोही की फिल्म ‘पाकीजा’ का संगीत गुलाम मोहम्मद ने दिया था. उर्दू बैकग्राउंड की इसी तर्ज की फिल्म ‘उमराव जान’ के लिए जब मुजफ्फर अली ने खय्याम साहब से कहा, तो एकबारगी उनके मन में डर बैठ गया कि लोग गुलाम मोहम्मद से उनकी तुलना करेंगे. लेकिन जब फिल्म ‘उमराव जान’ रिलीज हुई और इसके गानों ने तहलका मचाना शुरू किया, तब खय्याम के दिल से यह डर जाता रहा. आज इस फिल्म को खय्याम साहब के संगीत और दिग्गज एक्ट्रेस रेखा के करियर का माइल-स्टोन माना जाता है.