रेटिंग: * *

बॉलीवुड फिल्में हॉलीवुड की कॉपी करने की कितनी भी कोशिश क्यों न करलें लेकिन कामयाब नहीं हो पाते। हॉलीवुड की देखा देखि बॉलीवुड फिल्ममेकर्स भी अपनी फिल्मों का सीक्वल बनाने लगे, लेकिन हमेशा इनका टाय टाय फुस ही हुआ है। हमने कई बॉलीवुड फिल्में देखि है जिनका पहला हिस्सा सुपर डुपर हिट होता है लेकिन उसका सीक्वल उतना ही बड़ा फ्लॉप। अनीस बाज़मी ने  वेलकम बैक ये सोच कर बनाई की ऑडियंस उनकी इस फ़िल्म को वेलकम करेगी लेकिन अफ़सोस वेलकम बैक, वेलकम के मुकाबले कुछ भी नहीं है।

फ़िल्म में अक्षय कुमार और कैटरिना को छोड़ कर ज्यादातर करैक्टर वेलकम के ही हैं। फ़िल्म की कहानी शुरू होती है उदय और मजनू से (नाना पाटेकर और अनिल कपूर) जो अब सुधर चुके हैं और दुबई में बिजनेस करते हैं। उनकी उम्र बढ़ रही है और इसीलिए दोनों अब शादी करना चाहते हैं। अचानक उदय को एक दिन पता चलता है की उसके पिता ने 3 शादियां की थी और तीसरी बीवी से उसे एक बेटी रंजना (श्रुति हासन) है जो उदय की बहन लगेगी। उदय और मजनू अपनी इस बहन की शादी की जिम्मेदारी लेते हैं और एक शरीफ घर की तलाश करते हैं जहाँ वो अपनी बहन की शादी कर सके। लेकिन रंजना को मुंबई के एक लोकल गुंडे अज्जू (जॉन अब्राहम) से प्यार हो जाता है। उदय और मजनू शादी के खिलाफ हैं लेजिं बेबस हैं क्योंकि वो इस गुंडे से पंगा नहीं ले पा रहें।

फ़िल्म की कहानी पहले हिस्से से थोड़ी मिलती जुलती है बस थोडा हेर फेर कर दिया गया है। कहानी भले गई ख़ास नहीं है लेकिन फिल्म के डायलॉग बड़े मस्त हैं। कुछ डायलॉग पर तो तालियां बजाने का मन करता है। फ़िल्म जी जान है अनिल कपूर, नाना पाटेकर और परेश रावल। जॉन अब्राहम और श्रुति हासन का काम ठीक ठाक है। शयनी आहूजा किसी जूनियर आर्टिस्ट जैसे लगते हैं . डिंपल कपाड़िया और नसरुद्दीन शाह से ऐसे बोरिंग रोल की उम्मीद हम नहीं करते हैं।

फ़िल्म का म्यूजिक बहुत ही ज्यादा बोरिंग है। इसी फ़िल्म को तभी देखे अगर आप उदय और मजनू के फैन्स हैं।