नई दिल्ली: भूमि पेडनेकर के लिए फिल्म ‘सांड की आंख’ में वृद्ध (बूढ़ी) महिला की भूमिका निभाना आसान नहीं था. तुषार हीरानंदानी द्वारा निर्देशित, ‘सांड की आंख’ साल 2019 में रिलीज हुई थी, और यह भारत की सबसे बुजुर्ग शार्पशूटर, प्रकाशी तोमर और चंद्रो तोमर के जीवन पर आधारित थी. भूमि ने चंद्रो तोमर की भूमिका निभाई थी, जिन्होंने काफी प्रशंसा हासिल की. Also Read - भूमि पेडनेकर इस फेस्टिव सीजन में बांट रही हैं ये गिफ्ट, हर जगह हो रही तारीफ़ 

किरदार निभाने के दौरान सामना किए गए चुनौतियों के बारे में भूमि ने कहा, “मुझे लगता है कि ‘सांड की आंख’ से जुड़ी कठिनाई शारीरिक काम से जुड़ा था, क्योंकि उसका मेकअप खास था और ईमानदारी से कहूं तो यह बहुत कठिन था. उस अनुभव से गुजरना बहुत कठिन था, उसका मेकअप त्वचा पर बहुत कठोर था, उससे मेरी त्वचा जल गई थी और मुझे बहुत बड़ी एलर्जी का सामना करना पड़ा.” Also Read - भूमि पेडनेकर ने की 'बधाई दो' की तैयारी शुरू, इस वजह से एक्ट्रेस है सुपर एक्साइटेड

अभिनेत्री ने आगे कहा, “बॉडी लैंग्वेज को क्रैक करना और एक ऐसा किरदार निभाना जो अधिक आयु का है, हमेशा एक चुनौती भरा रहता है. इसलिए, मुझे लगता है कि शारीरिक रूप से यह मेरी सभी फिल्मों की तुलना में बहुत कठिन था.” हालांकि ऐसी प्रगतिशील और महत्वपूर्ण कंटेंट का एक हिस्सा होने को लेकर भूमि खुद को भाग्यशाली मानती हैं.

 

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उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि मेरा सिनेमा ऑफ-बीट है या नहीं. मुझे निश्चित रूप से लगता है कि मुख्य धारा सिनेमा की परिभाषा पिछले 5 वर्षों में काफी बदल गई है जहां मेरी फिल्मों ने उस परिवर्तन में योगदान दिया है. मैं वास्तव में इसे लेकर खुश हूं, क्योंकि यही कलाकारों का काम होता है.”

इनपुट- एजेंसी