'किरिश का गाना सुनेगा?' जानें कौन है पिंटू प्रसाद? कैसे ऋतिक रोशन के गाने ने बदली उनकी जिंदगी

सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है जिसमें एक लड़का कहता है "कृष का गाना सुनेगा... ले बेटा," और फिर ऋतिक रोशन की फिल्म कृष का गाना "दिल ना दिया" गाना शुरू कर देते हैं.

Published date india.com Updated: January 3, 2026 8:49 AM IST
'किरिश का गाना सुनेगा?' जानें कौन है पिंटू प्रसाद? कैसे ऋतिक रोशन के गाने ने बदली उनकी जिंदगी

Pintu Prasad Kirish ka Gaana Sunega: सोशल मीडिया की विशाल दुनिया में, जहां अनगिनत कहानियां उभरती और गायब हो जाती हैं, एक व्यक्ति की अप्रत्याशित प्रसिद्धि ने कई लोगों का दिल जीत लिया है. अपनी अनूठी शैली और संक्रामक ऊर्जा के साथ, पिंटू प्रसाद, जिन्हें “वायरल धूम बॉय” के नाम से भी जाना जाता है, घर-घर में मशहूर हो गए हैं और कई लोग इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि वायरल कैचफ्रेज़, “किरिश का गाना सुनेगा… ले बेटा” के पीछे कौन है.

“किरिश का गाना सुनेगा?”

वायरल वीडियो की इस एक लाइन ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है. सोशल मीडिया यूजर्स इसी ऑडियो का इस्तेमाल करके अलग-अलग मिक्स और वर्जन बना रहे हैं लेकिन यह ट्रेंड कहां से आया और क्लिप में दिख रहा यह शख्स कौन है? वायरल रील, जो इंटरनेट पर स्क्रॉल करते-करते कई लोगों को अचानक दिख जाती है, ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कैसे एक अप्रत्याशित पल किसी आम इंसान को रातोंरात इंटरनेट सेंसेशन बना सकता है. अभिनेता ऋतिक रोशन की फिल्म ‘किरिश’ के बॉलीवुड हिट गाने ‘दिल ना दिया, दिल ना लिया’ को अपने अनोखे अंदाज में गाने की वजह से उन्हें घर-घर में “वायरल बॉय धूम” के नाम से जाना जाने लगा है.

32 के हैं “वायरल धूम बॉय”

झारखंड के जमशेदपुर के रहने वाले 32 वर्षीय पिंटू प्रसाद, लोकप्रिय “वायरल धूम बॉय” ट्रेंड के पीछे का चेहरा हैं और उनका जीवन आसान नहीं रहा है, उन्होंने बहुत कम उम्र में अपने माता-पिता को खो दिया और पारिवारिक सहयोग के बिना ही बड़े हु. इस वजह से उन्हें कई कठिन दौर से गुजरना पड़ा, जिनमें नशे की लत से जूझना भी शामिल है.

माता-पिता नहीं रहे तो कूड़ा बीनना और शौचालय साफ करना शुरू किया

अपनी कठिनाइयों के बावजूद, पिंटू का हंसमुख स्वभाव उनके वीडियो में साफ झलकता है. गुज़ारा करने के लिए पिंटू ने कई छोटे-मोटे और मुश्किल काम किए उन्होंने कूड़ा बीनने का काम किया, शौचालय साफ किए और यहां तक ​​कि मरे हुए जानवरों को भी संभाला, हमेशा ईमानदारी से अपना जीवन यापन किया. नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, “पिंटू प्रसाद ने बताया कि उनके माता-पिता का देहांत बचपन में ही हो गया था… इसलिए उन्होंने पेट भरने के लिए कूड़ा बीनना और शौचालय साफ करना शुरू किया.

पिंटू नशे से दूर रहकर नए हुनर सीख रहा है

सौभाग्य से, पिंटू के जीवन में एक और सकारात्मक मोड़ तब आया जब जमशेदपुर स्थित पुनर्वास केंद्र, अस्तित्व फाउंडेशन की नज़र उस पर पड़ी. संस्था के संस्थापक सौरभ तिवारी और उनकी टीम ने पिंटू की प्रतिभा को पहचाना और उसे अपने संरक्षण में लेकर उसे वह सहायता और देखभाल प्रदान की जिसकी उसे सख्त ज़रूरत थी. अब पिंटू नशे से दूर रहकर नए हुनर सीख रहा है और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है. वहीं आज पिंटू प्रसाद सिर्फ एक वायरल चेहरा नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है जो मुश्किल हालात से जूझ रहे हैं

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