Mughal-e-Azam director K Asif : दिग्गज एक्टर दिलीप कुमार और मधुबाला स्टारर सुपरहिट फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ का नाम कई बार आने सुना होगा. कई सिनेमा लवर्स ने इस ऐतिहासिक फिल्म को देखा भी होगा. जितनी खास ‘मुगल-ए-आजम’ फिल्म है, उनती ही चर्चित इसके डायरेक्टर के. आसिफ (K Asif) की जिंदगी रही है, जिनकी लाइफ पर अब बायोपिक फिल्म बनने जा रही है. जी हां, बॉलीवुड (Bollywood) का एक ऐसा डायरेक्टर जिसने कई काल्पिनिक कहानियों पर फिल्में बनाईं, लेकिन अब खुद उनकी रियल लाइफ पर फिल्म निर्माता तिग्मांशु धूलिया एक मूवी बनाने का प्लान कर रहे हैं. जैसे ही इस बायोपिक को लेकर खबर सामने आई, वैसे ही एक बार फिर फिल्मी गलियारों में के. आसिफ के किस्सों की चर्चा शुरू हो गई.
के आसिफ का जन्म 14 जून, 1922 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में हुआ था. आपको जानकर हैरानी होगी कि के आसिफ ने अपने फिल्मी करियर में सिर्फ दो फिल्मों का निर्देशन किया, जिनमें से एक ‘मुगल-ए-आजम’ फिल्म ने उनके नाम को हमेशा के लिए दिग्गज डायरेक्टर्स की लिस्ट में शुमार कर दिया. इस फिल्म को बनाने में उन्होंने 13 साल लगा दिए, साथ ही उस जमाने पर एक गाने के लिए 10 लाख रुपये खर्च कर दिए थे. बहुम कम लोगों को पता है कि के आसिफ ने 4 शादियां की थीं और वो सुपरस्टार दिलीप कुमार के सगे जीजा भी थे. के आसिफ ने सिर्फ 5वीं तक पढ़ाई की थी, बाद में वो मुंबई चले आए.
अब फिल्म निर्माता तिग्मांशु धूलिया उनकी इसी जिंदगी पर बायोपिक बनाने की योजना बना रहे हैं, यह बायोपिक उत्तर प्रदेश के इटावा में जन्मे आसिफ के शानदार सिनेमाई करियर पर प्रकाश डालेगी. एक साहित्यिक उत्सव में भाग लेने आए 56 वर्षीय धूलिया ने कहा कि बहुत सी ऐसी चीजें नहीं है, जो उस युग के निर्देशकों के बारे में विस्तार से जानकारी देती हो. ‘पान सिंह तोमर’ और ‘हासिल’ जैसी प्रशंसित फिल्में बनाने वाले निर्देशक ने कहा, ‘हालांकि मुझसे इस बारे में ज्यादा बात न करने के लिए कहा गया है, लेकिन, ‘आसिफ’, एक फिल्म पाइपलाइन में है.’ हाल की फिल्मों के चलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘अगर मैं फिल्म बनाऊंगा तो वह भव्य होगी. विषय बड़ा होगा, लेकिन अभिनेता नहीं.’
आगे बताते हुए तिग्मांशु धूलिया ने कहा, ‘के. आसिफ ने बड़ा संघर्ष देखा, उन्होंने केवल 5वीं कक्षा तक पढ़ाई की लेकिन, वह एक सफल फिल्म निर्देशक और निर्माता बन गए. उन्होंने 12 साल में फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ बनाई.’ यह पूछे जाने पर कि क्या वह अवध के वाजिद अली शाह पर फिल्म बनाना चाहते थे, तो धूलिया ने कहा कि यह एक सफलता की कहानी नहीं बल्कि एक ट्रेजडी है क्योंकि उन्हें मेटियाब्रुज कोलकाता में निर्वासित किया गया था. वह 1857 के विद्रोह पर बन रही फिल्म का हिस्सा होंगे. धूलिया ने अपने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) के साथी इरफान खान को भी याद किया और उन्हें महान अभिनेता बताया.
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