नई दिल्ली. बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री श्रीदेवी शनिवार रात तकरीबन 11 बजे दुनिया छोड़कर चली गईं. 54 साल की श्रीदेवी का निधन दुबई में कार्डिएक अरेस्ट की वजह से गया. श्रीदेवी अपने भतीजे और एक्टर मोहित मारवाह की शादी में शामिल होने के लिए दुबई में थीं. इंडियन एंबेसी के ऑफिसर दुबई के अधिकारियों के साथ श्रीदेवी को जल्द से जल्द भारत लाने की कोशिश में जुटे हैं. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इसमें कितना वक्त लगेगा. इन सबके बीच सभी को यह जान लेना चाहिए कि विदेश से किसी शव को भारत लाने की प्रक्रिया क्या है और इसमें कितना वक्त लगता है? 

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विदेश में अगर किसी की मौत होती है और शव को वापस भारत लाना होता है तो इसके लिए कई डॉक्युमेंट्स चाहिए होते हैं. भारत की फॉरेन मिनिस्ट्री ने अपनी वेबसाइट पर इससे संबंधित सभी जानकारियां दे रखी हैं. इसमें बताया गया है कि शव वापसी के लिए मेडिकल रिपोर्ट की जरूरत होती है. इसके साथ ही मृत्यु प्रमाणपत्र भी चाहिए होता है. यह स्थानीय अस्पताल ही जारी करता है. Also Read - बोनी कपूर और बेटियों समेत सामने आई स्टाफ मेंबर्स की कोरोना रिपोर्ट

पुलिस रिपोर्ट की कॉपी में अगर दुर्घटना या अप्राकृतिक मौत का जिक्र हो (रिपोर्ट अगर किसी दूसरी भाषा में लिखी गई हो) मृतक के किसी नजदीकी रिलेटिव से सहमति पत्र जो की नोटरी से अटेस्टेड हो, मृतक के पासपोर्ट और वीजा की कॉपी, इन दस्तावेजों के अलावा शव पर लेपन का क्लीयरेंस और उसकी व्यवस्था की भी जरूरत होती है. इसके साथ ही लोकल इमीग्रेशन और कस्टम से भी इसे क्लियरेंस मिलना जरूरी होता है. मृतक किसी इनफेक्टेड डिजीज से पीड़ित था या नहीं, इसका सर्टिफिकेट भी जरूरी होता है. 

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देश के हिसाब से ये नियम बदल सकते हैं लेकिन ज्यादातर मामले में नियम इसी प्रकार के होते हैं. हालांकि प्राकृतिक मौत के मामले में शव को वापस लाने में अधिक देर नहीं लगती है लेकिन अप्राकृतिक मौत के मामले में यह प्रक्रिया लंबी चलती है. ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि लोकल पुलिस इसकी गहराई से जांच करती है और शव से जुड़े सुबूत एकत्रित करती है. शव को वापस लाने की प्रक्रिया के दौरान इंडियन एंबेसी के कांसुलेट मृतक के परिजनों के संपर्क में रहते हैं.

यहां यह भी जान लेना जरूरी है कि खाड़ी देशों से शव को वापस लाने में आमतौर पर 2 से 4 हफ्ते का वक्त लग ही जाता है. ये सारी जटिल प्रक्रिया इतना समय ले ही लेती हैं. हालांकि बड़ी हस्तियों की मौत के मामले में ये सब कुछ ही घंटे में पूरा हो सकता है. वहीं, अप्राकृतिक मौत के केस में तो जांच संतोषजनक स्थिति में पहुंचने के बाद ही प्रक्रिया को पूरा किया जाता है.