गंगा से लेकर अमेज़न तक... तेजी से धंस रहे हैं पृथ्वी के ये 18 डेल्टा, 23 करोड़ जिंदगियों पर मंडरा रहा मौत का साया

दुनिया के 40 बड़े नदी डेल्टा में से 18 ऐसे हैं जहां जमीन का धंसना समुद्र स्तर से तेज है. स्टडी के मुताबिक, हद से ज्यादा ग्राउंड वॉटर का इस्तेमाल,नदियों में मिट्टी की कमी और तेज शहरीकरण डेल्टा के धंसने के मुख्य कारण हैं.

Published date india.com Published: January 22, 2026 5:28 PM IST
गंगा से लेकर अमेज़न तक... तेजी से धंस रहे हैं पृथ्वी के ये 18 डेल्टा, 23 करोड़ जिंदगियों पर मंडरा रहा मौत का साया
गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा दुनिया का सबसे बड़ा डेल्टा है. ये गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों से बना है. इसे सुंदरबन डेल्टा भी कहते हैं. (AP)

इस समय ग्लोबल वॉर्मिंग (Global Warming) और क्लाइमेंट चेंज (Climate Change) दुनिया की सबसे बड़ी समस्याओं में एक हैं. इनकी वजह से इकोसिस्टम बदल रहा है. हिमालय के बर्फ पिघल रहे हैं. इससे समुद्र का स्तर भी बढ़ता जा रहा है. अब ग्लोबल वॉर्मिंग और क्लाइमेट चेंज का असर हमारी नदियों पर भी दिखने लगा है. एक हालिया रिसर्च स्टडी के मुताबिक, दुनिया के कई बड़े नदी डेल्टा (River Deltas)धीरे-धीरे धंस रहे हैं. कई जगहों पर जमीन का धंसना समुद्र के स्तर बढ़ने से भी तेज है. इससे इन इलाकों में रहने वाले लाखों-करोड़ों लोगों के लिए बाढ़ और नुकसान का खतरा बढ़ रहा है.

साइंस मैगजीन ‘Nature’में ये रिसर्च स्टडी पब्लिश हुई है.अमेरिका की वर्जीनिया टेक यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ये स्टडी की है. वैज्ञानिकों ने एडवांस सैटेलाइट टेक्नीक की मदद से जमीन की ऊंचाई में हो रहे बदलावों को बहुत बारीकी से मापा है.

कैसे हुई स्टडी?
वर्जीनिया टेक में जियोफिजिक्स और रिमोट सेंसिंग के एसोसिएट प्रोफेसर मंचूशर शिर्ज़ाई इस स्टडी के को-ऑथर हैं. शिर्ज़ाई और उनकी टीम ने 2014 से 2023 के बीच दुनिया के 40 सबसे बड़े नदी डेल्टाओं में होने वाले भू-धंसाव की स्टडी की है. लेकिन, स्टडी में 18 डेल्टाओं के बारे ही डिटेल दी गई है.

मंचूशर शिर्ज़ाई ने’लाइव साइंस’ के साथ इस स्टडी पर बात की है. शिर्ज़ाई बताते हैं, “ये ग्लोबल लेवल पर अब तक हुई सबसे बड़ी स्टडी है. हमने जिन डेल्टाओं को एनालाइज किया है, उनमें ग्राउंड वॉटर स्टोरेज में बदलाव इन डेल्टाओं के धंसाव की एक बड़ी वजह है.”

मिसिसिपी नदी उत्तरी अमेरिका की सबसे बड़ी और दुनिया की सबसे लंबी नदियों में से एक है. यहां के डेल्टा में मिट्टी का तेजी से कटाव हो रहा है. (AP)

नदी डेल्टा क्या होते हैं?
नदी डेल्टा वह क्षेत्र होता है, जहां कोई नदी समुद्र में मिलती है. यहां नदी अपने साथ लाई हुई मिट्टी जमा करती है. इसी वजह से डेल्टा की जमीन बहुत उपजाऊ हो जाती है. इन क्षेत्रों में खेती अच्छी होती है और बड़ी आबादी रहती है.

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पृथ्वी पर कितने डेल्टा?
पृथ्वी पर डेल्टाओं की निश्चित संख्या बताना मुश्किल है, लेकिन हालिया स्टडी में दुनिया के 40 प्रमुख नदी डेल्टाओं की बात की गई है.इनमें से 18 डेल्टा तेज़ी से डूब रहे हैं.

कौन-कौन से डेल्टा सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?
स्टडी में मेकांग, नील, गंगा-ब्रह्मपुत्र, मिसिसिपी, येलो रिवर और चाओ फ्राया जैसे बड़े डेल्टा सबसे ज्यादा प्रभावित पाए गए हैं. कुछ जगहों पर जमीन समुद्र के स्तर बढ़ने की गति से दोगुनी रफ्तार से नीचे जा रही है.
इसके साथ ही हिमालय समेत कई ऊंचे पर्वतों से बह रही नदियों में भी गाद जमा हो रही है.

स्टडी के मुताबिक, जमीन के धंसने के 3 बड़े कारण सामने आए हैं:-

पहला कारण: ग्राउंड वॉटर का हद से ज्यादा इस्तेमाल
कई क्षेत्रों में लोग जमीन के नीचे से बहुत ज्यादा पानी निकाल रहे हैं. जब पानी निकल जाता है, तो जमीन के अंदर खाली जगह बन जाती है और जमीन नीचे बैठने लगती है.

दूसरा कारण: नदियों में मिट्टी की कमी
पहले नदियां अपने साथ बहुत सारी मिट्टी समुद्र तक पहुंचाती थीं. अब बांध और नहरों के कारण यह मिट्टी डेल्टा तक नहीं पहुंच पा रही है. इससे जमीन कमजोर हो जाती है.

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक चाओ फ्राया नदी के डेल्टा पर बसा है, जो दुनिया के सबसे तेजी से डूबते डेल्टाओं में से एक है. (AP)

तीसरा कारण: तेज शहरीकरण
डेल्टा क्षेत्रों में शहर तेजी से फैल रहे हैं. भारी इमारतें, सड़कें और निर्माण कार्य जमीन पर दबाव डालते हैं, जिससे जमीन और तेजी से धंसती है.

ये कितना बड़ा खतरा?
स्टडी के मुताबिक, जिन 18 डेल्टाओं पर खतरा मंडरा रहा है; वहां 23 करोड़ 60 लाख के आसपास आबादी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कोई दूर की समस्या नहीं है, बल्कि अभी की समस्या है.अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो बाढ़, जमीन का नुकसान और लोगों का विस्थापन बढ़ जाएगा. इससे खेती, घर और रोजगार सभी प्रभावित होंगे.

स्टडी के सुझाव
इस स्टडी में समस्या ने निपटने के लिए सुझाव भी दिए गए हैं. स्टडी के मुताबिक, अगर ग्राउंड लेवल वॉटर का सीमित और समझदारी से इस्तेमाल किया जाए, नदियों को प्राकृतिक रूप से बहने दिया जाए और शहरों का विकास संतुलित तरीके से किया जाए, तो डेल्टा को बचाया जा सकता है.

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