AI की ट्रेनिंग पाएंगे 1 करोड़ युवा, मगर क्या नौकरियों की रफ्तार भी बढ़ेगी? Explained

Written By: Nandan Singh Updated by: Nandan Singh
Updated Date:August 16, 2026 1:41 PM IST

भारत AI की ताकत बनने के लिए 1 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित करने की तैयारी में है. लेकिन क्या देश की अर्थव्यवस्था इतने एआई स्किल्ड युवाओं को रोजगार दे पाएगी?

  • एक करोड़ युवाओं को एआई की ट्रेनिंग
  • भारत में अभी कितनी नौकरियों की मांग
  • किन नौकरियों पर होगा सबसे ज्यादा असर

AI Training In India: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई भारत में सिर्फ तकनीक का भविष्य नहीं, बल्कि रोजगार की दुनिया को बदलने वाली बड़ी ताकत बनकर उभर रहा है. सरकार 1 करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग देने की तैयारी में है, लेकिन इसके साथ एक अहम सवाल भी खड़ा होता है. क्या देश में इतनी बड़ी संख्या में एआई स्किल्ड युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर मौजूद होंगे? जहां एआई से नई नौकरियां और नए काम के क्षेत्र पैदा होने की उम्मीद है, वहीं कई मौजूदा भूमिकाओं के बदलने या खत्म होने का खतरा भी है. ऐसे में भारत के सामने चुनौती सिर्फ युवाओं को एआई सिखाने की नहीं, बल्कि उनकी स्किल को रोजगार और उद्योग की जरूरतों से जोड़ने की भी है.

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युवाओं को एआई की ट्रेनिंग

भारत तेजी से AI की ओर बढ़ रहा है. सरकार एआई की समझ और कौशल को बड़े पैमाने पर युवाओं तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है. लेकिन 1 करोड़ युवाओं को एआई की ट्रेनिंग देने के लक्ष्य से भी बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में इतने लोगों के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा होंगे? इसका जवाब सीधा हां या ना नहीं है. वजह यह है कि AI से सिर्फ नई नौकरियां पैदा नहीं होंगी, बल्कि पुरानी नौकरियों के काम करने का तरीका भी बदलेगा. कुछ काम खत्म हो सकते हैं, कुछ नए काम पैदा होंगे और बड़ी संख्या में मौजूदा नौकरियों में एआई एक सहायक तकनीक के रूप में शामिल हो जाएगा. नीति आयोग की 'Roadmap for Job Creation in the AI Economy' रिपोर्ट इसी बदलाव की तस्वीर सामने रखती है.

कितनी नौकरियों की मांग

सबसे पहले जरूरी बात यह है कि भारत में इस समय AI की नौकरी से जुड़े कितने पद खाली हैं, इसका कोई एक आधिकारिक सरकारी डेटाबेस नहीं है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि भारत में अभी 8 से 8.5 लाख AI नौकरियां खाली हैं. नीति आयोग की रिपोर्ट में दिया गया आंकड़ा एआई टैलेंट डिमांड यानी एआई स्किल प्रोफेशनल्स की अनुमानित मांग है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एआई टैलेंट की मांग 2024 में करीब 8 लाख से 8.5 लाख लोगों की थी. यह मांग 2026 तक बढ़कर 12.5 लाख से ज्यादा होने का अनुमान है. यानी लगभग दो वर्षों में एआई स्किल्ड लोगों की जरूरत काफी तेजी से बढ़ रही है. रिपोर्ट के अनुसार एआई टैलेंट की मांग करीब 25 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रही है, जबकि मौजूदा एआई टैलेंट सप्लाई लगभग 15 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रही है.

एआई स्किल्ड लोग कम

नीति आयोग की रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आती है. भारत में उपलब्ध एआई टैलेंट मौजूदा मांग का लगभग 50 प्रतिशत ही है. यानी कंपनियों को जितने एआई स्किल्ड लोगों की जरूरत है, उसके मुकाबले उपलब्ध प्रतिभा काफी कम है. मतलब अगर कंपनियों को 100 एआई स्किल्ड लोगों की जरूरत है और बाजार में केवल करीब 50 लोग उपलब्ध हैं, तो बाकी 50 पदों को भरना मुश्किल होगा. यही स्किल भारत के सामने बड़ी चुनौती है.

अगले पांच साल में कैसी होगी तस्वीर?

एआई रोजगार को अगले पांच वर्षों में समझने के लिए केवल एआई इंजीनियर या मशीन लर्निंग इंजीनियर की नौकरियों को देखना पर्याप्त नहीं होगा. नीति आयोग ने साल 2031 तक भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए दो अलग-अलग संभावनाएं रखी हैं. अगर एआई एडॉप्शन का फायदा भारत सही तरीके से नहीं उठा पाया, तो टेक्नोलॉजी वर्कफोर्स में बड़ी कमी आ सकती है. रिपोर्ट के अनुसार टेक वर्कफोस का हेडकाउंट साल 2023 के करीब 75-80 लाख से घटकर 2031 तक लगभग 60 लाख तक जा सकता है. लेकिन अगर भारत नए एआई यूज केसेस, नई टेक्नोलॉजी, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स यानी GCCs और नए एआई बेस्ड रोल्स का फायदा उठाता है, तो यही टेक वर्कफोर्स 2031 तक एक करोड़ तक पहुंच सकती है.

इंफोग्राफिक/notebooklm

कौन सी नई नौकरियां पैदा करेगा एआई

एआई के कारण रोजगार केवल एआई इंजीनियर तक सीमित नहीं रहेगा. नीति आयोग ने AI से पैदा होने वाली नई भूमिकाओं को मोटे तौर पर तीन हिस्सों में समझाया है. वे इस प्रकार हैं...

इंटरप्राइज एआई जॉब्स

ये वे नौकरियां हैं जिनमें कंपनियां अपने रोजमर्रा के कारोबार में AI का इस्तेमाल करेंगी. इनमें AI Architect, Prompt Engineer, AIOps Engineer, Ethical AI Specialist, AI-enabled Data Architect, AI Marketing Specialist शामिल हो सकते हैं. यानी जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति नया एआई मॉडल बनाए. बहुत से लोग मौजूदा एआई सिस्टम को कंपनियों के काम में इस्तेमाल करने का काम करेंगे.

फ्रंटियर आई जॉब्स

ये ज्यादा स्पेशलाइज्ड और एडवांस नौकरियां होंगी. AI जब Quantum Computing, Robotics, Haptics और दूसरी नई Technologies से जुड़ेगा, तब नई तरह की भूमिकाएं पैदा होंगी. उदाहरण के तौर पर नीति आयोग ने Quantum ML Engineer और Neurohaptic Engineer जैसी भूमिकाओं का उल्लेख किया है.

एआई और एआई जॉब्स

इस श्रेणी में वे लोग आएंगे जो खुद AI टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाएंगे. जैसे: AI Engineers, Advanced AI Research Scientists, Large Language Model Researchers, AI Model Developers यही वह क्षेत्र है जहां भारत को अमेरिका और चीन जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी होगी.

क्या एआई ट्रेंड युवाओं के लिए होंगी नौकरियां

एक करोड़ लोगों को AI की ट्रेनिंग देने का मतलब यह नहीं है कि बाजार में एक करोड़ एआई जॉब्स मौजूद होंगी. एआई ट्रेनिंग को ज्यादा सही तरीके से एआई रेडी वर्कफोर्स तैयार करने के रूप में देखना चाहिए. मान लीजिए कोई व्यक्ति बैंकिंग, मार्केटिंग, डिजाइन, अकाउंटिंग, शिक्षा या ग्राहक सेवा में काम करता है. एआई सीखने के बाद जरूरी नहीं कि वह एआई इंजीनियर बन जाए. वह अपने मौजूदा काम में एआई टूल्स का इस्तेमाल करके ज्यादा उत्पादक बन सकता है. यही वजह है कि आने वाले समय में एआई स्किल्स और ट्रेडिशनल डोमेन स्किल्स का कॉम्बिनेशन ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है.

किन नौकरियों पर होगा ज्यादा असर

एआई का सबसे बड़ा असर उन कामों पर पड़ने की संभावना है जो बार-बार दोहराए जाते हैं, नियमों के अनुसार किए जाते हैं और जिनमें डिजिटल जानकारी को संभालना शामिल है. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन यानी ILO की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में करीब चार में से एक नौकरी किसी न किसी स्तर पर Generative AI के एक्सपोजर में है. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि चार में से एक नौकरी खत्म हो जाएगी. ILO के अनुसार अधिकांश नौकरियों में रिप्लेसमेंट के बजाय ट्रांसफोर्मेशन ज्यादा संभावित है. सबसे ज्यादा एक्सपोजर क्लेरिकल जॉब्स में देखा गया है. जैसे- Data Entry Clerks, Typists Accounting, Bookkeeping Clerks और Administrative Secretaries. इसके अलावा Media, Software और Finance जैसे Highly Digitised क्षेत्रों की कई Professional Jobs में भी AI Exposure बढ़ रहा है. इसलिए भारत के लिए असली खतरा 'सभी नौकरियां खत्म हो जाएंगी' नहीं, बल्कि कई नौकरियों में पुराने स्किल्स की जरूरत कम और नए की जरूरत ज्यादा हो जाएगी.

एंट्री लेवल जॉब्स को लेकर चिंता

AI का असर खास तौर पर शुरुआती स्तर की कुछ टेक जॉब्स पर पड़ सकता है. नीति आयोग की रिपोर्ट में Junior QA Engineers और L1 Support Agents जैसे उदाहरण दिए गए हैं. ऐसे कामों के कई रूटीन हिस्से एआई कर सकता है. इसका मतलब यह हो सकता है कि कंपनियों को शुरुआती स्तर पर पहले की तुलना में कम लोगों की जरूरत पड़े. लेकिन उसी कर्मचारी के लिए L2/L3 Support, AI-assisted Testing, AI Governance या दूसरे एडवांस कामों के रास्ते खुल सकते हैं अगर वह समय रहते री-स्किल कर ले.

क्या कहता है आर्थिक सर्वेक्षण

भारत सरकार का आर्थिक सर्वेक्षण भी AI को केवल नौकरी खत्म करने वाली टेक्नोलॉजी के रूप में नहीं देखता. Economic Survey 2025-26 में कहा गया है कि AI के कारण रूटिन कॉग्निटिव टास्क ऑटोमेट हो सकते हैं, इसलिए आने वाले समय में Foundational skills, Reasoning, Problem Solving, Communication और Human Centric Abilities महत्वपूर्ण होंगी. AI के दौर में इंसान का योगदान Judgement, Expertise और बेहतर निर्णय लेने की दिशा में ऊपर जा सकता है. Economic Survey 2024-25 ने भी AI एडॉप्शन के संदर्भ में एजुकेशन और स्किलिंग को महत्वपूर्ण माना है. उसका जोर इस बात पर है कि एआई का इस्तेमाल मानव क्षमता को बढ़ाने के लिए हो और वर्कफोर्स को बदलती जरूरतों के लिए तैयार किया जाए.

क्या स्किल गैप कम होगा?

बड़ी संख्या में ट्रेनिंग निश्चित तौर पर भारत की AI क्षमता बढ़ा सकती है. लेकिन सिर्फ सर्टिफिकेट बांटने से समस्या हल नहीं होगी. ट्रेनिंग का फायदा तभी होगा जब युवाओं के पास मजबूत कंप्यूटर और गणित की बुनियादी समझ हो. प्रोग्रामिंग और डेटा स्किल हों. वास्तविक प्रोजेक्ट पर काम करने का अनुभव हो. इंडस्ट्री में इंटर्नशिप या अप्रेंटिसशिप के अवसर हों. एआई के साथ किसी एक सेक्टर की डोमेन नॉलेड भी हो. लगातार नए टूल्स और टेक्नोलॉजी सीखने की क्षमता हो. नीति आयोग ने भी इंडस्ट्री और शैक्षणिक जगत के बीच बेहतर तालमेल, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और एआई करिकुलम को तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी के अनुरूप रखने पर जोर दिया है.

IndiaAI FutureSkills से क्या संकेत मिलता है?

भारत में AI सीखने की मांग पहले से मौजूद है. IndiaAI के अनुसार FutureSkills Platform पर दिसंबर 2024 तक 8.6 लाख कैंडिडेट इनरोल कर चुके थे. यह बताता है कि एआई और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी सीखने में युवाओं की रुचि काफी बड़ी है. लेकिन इनरोलमेंट और रोजगार दो अलग चीजें हैं. किसी प्लेटफॉर्म पर लाखों लोग कोर्स में दाखिला ले सकते हैं, लेकिन नौकरी पाने के लिए उन्हें प्रैक्टिकल स्किल्स, इंडस्ट्री एक्सपोजर और वास्तविक काम का अनुभव भी चाहिए.

अमेरिका और चीन से भारत कितना पीछे है?

भारत के पास युवा और विशाल डिजिटल वर्कफोर्स के रूप में एक बड़ा एडवांटेज है. लेकिन एडवांस एआई रिसर्च और फ्रंटियर एआई डेवलपमेंट में अमेरिका और चीन अभी आगे हैं. Stanford AI Index 2025 के मुताबिक 2024 में US बेस्ड संस्थान ने 40 नोटेबल एआई मॉडल्स बनाए, जबकि चीन ने 15 और यूरोप ने 3 बनाए. चीन AI पब्लिकेशन और पेंटेंट्स में मजबूत स्थिति रखता है. नीति आयोग की रिपोर्ट भी बताती है कि भारत को Advanced AI Curriculum, Research Capability और Industry Grade AI Solutions के क्षेत्र में अभी काफी आगे जाना है. भारत में Computer Science Education भी कई जगह असमान है, जबकि चीन ने स्कूल लेवल पर AI शिक्षा को तेजी से आगे बढ़ाया है. इसलिए भारत की सबसे बड़ी ताकत स्केल है, जबकि सबसे बड़ी चुनौती स्केल को एडवांस स्किल और इनोवेशन में बदलना है.

भारत के लिए सबसे बड़ा अवसर

भारत को केवल अमेरिका और चीन की तरह Frontier AI Models बनाने की दौड़ में ही नहीं देखना चाहिए. भारत के लिए एक बड़ा अवसर AI-enabled Services और Global Capability Centres में है. नीति आयोग के अनुसार लगभग 70 प्रतिशत नए GCCs में AI/ML उनकी टॉप थ्री टैलेंट आवश्यकताओं में शामिल है. भारत में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां AI पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सिलेंस भी बना रही हैं. इसके अलावा Healthcare, Agriculture, Manufacturing, Finance, Education, Customer Service, Cybersecurity और Software Development जैसे क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल से नई तरह की जॉब्स और बिजनेस के अवसर बन सकते हैं.

इससे जुड़ते सवाल-जवाब यहां देखिए?

क्या भारत में अभी 8 लाख से ज्यादा AI नौकरियां खाली हैं?

नहीं. यह संख्या खाली पदों की ऑफिशियल काउंट नहीं है. यह 2024 में एआई स्किल्ड टैलेंट की अनुमानित इंडस्ट्री डिमांड है.

2026 तक एआई टैलेंट की मांग कितनी हो सकती है?

नीति के अनुसार 2026 तक यह मांग 12.5 लाख से ज्यादा हो सकती है, और 2024-26 के दौरान करीब 25 प्रतिशत CAGR से बढ़ने का अनुमान है.

सबसे ज्यादा जोखिम किन नौकरियों को है?

Data entry, typing, bookkeeping, accounting और administrative जैसे clerical काम सबसे ज्यादा exposed हैं. Software, finance और media जैसे highly digitalised क्षेत्रों में भी exposure बढ़ रहा है.

क्या AI सिर्फ IT jobs को प्रभावित करेगा?

नहीं, AI healthcare, banking, finance, manufacturing, agriculture, education, customer service, marketing और कई दूसरे क्षेत्रों में भी काम करने का तरीका बदल सकता है.

अमेरिका और चीन से भारत की सबसे बड़ी कमी क्या है?

Advanced AI research, frontier models, specialised education और AI innovation में भारत अभी पीछे है.

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