
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
इजरायल-अमेरिका के जॉइंट ऑपरेशन में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद ईरान अपनी इस्लामिक सत्ता के अस्तित्व के लिए लड़ रही है. ईरान ने बेशक पूरी ताकत से पलटवार किया है. ईरानी सेना ने न सिर्फ इजरायल बल्कि, पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिका के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन बरसाए हैं. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का कहना है कि खामेनेई की हत्या का बदला लेना देश के बच्चे-बच्चे का हक है.
1979 से पहले ईरान के अमेरिका से लेकर इजरायल तक तमाम देशों के साथ रिश्ते बड़े अच्छे हुआ करते थे. आज इस जंग में ईरान एक तरफ है. कभी उसके दोस्त रहे इजरायल और अमेरिका उसके खिलाफ बम बरसा रहे हैं. सवाल उठता है कि इजरायल और अमेरिका को ईरान से क्या दिक्कत है? ईरान की तबाही से इजरायल या अमेरिका… किसे ज्यादा फायदा होगा? ईरान के पास ऐसा क्या है, जिसके लिए अमेरिका और इजरायल जंग लड़ रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की विशलिस्ट क्या है:-
मिडिल ईस्ट में ईरान की जगह?
मिडिल ईस्ट में 17 देश हैं. इनमें सऊदी अरब, ईरान, इराक, तुर्किये, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल, जॉर्डन, सीरिया, लेबनान, ओमान, यमन, कतर, कुवैत, बहरीन, साइप्रस और फिलिस्तीन शामिल हैं. इनमें से ईरान देश प्राकृतिक गैस भंडार के मामले में दुनियाभर में तीसरे और तेल उत्पादन में नौवें स्थान पर है. ईरान की अर्थव्यवस्था पेट्रोलियम निर्यात पर बहुत ज्यादा निर्भर है.
ईरान के पास कौन-कौन से नेचुरल रिसोर्सेज हैं?
ईरान के पास दुनिया का कुल सिद्ध तेल भंडारों का करीब 10% हिस्सा है. यहां का मुख्य तेल क्षेत्र ज़ाग्रोस बेसिन और फारस की खाड़ी में स्थित है. रूस के बाद ईरान के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार है. इसका प्रमुख क्षेत्र ‘साउथ पार्स’ (South Pars) है. ईरान की धरती में यूरेनियम, तांबा, लौह अयस्क, जस्ता, सोना, कोयला, लेड, और क्रोमियम के व्यापक भंडार मौजूद हैं. ये देश अपने उच्च गुणवत्ता वाले केसर (saffron) उत्पादन के लिए विश्व प्रसिद्ध है, जो मुख्य रूप से खुरासान रजावी प्रांत में उगाया जाता है. इसके साथ ही इस देश में फास्फेट, सिलिका रेत, चूना पत्थर और भारी खनिज भी पाए जाते हैं.
इस जंग से इजरायल या अमेरिका… किसे ज्यादा फायदा?
इंडियन मिलिट्री एक्सपर्ट डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, “अभी तक की जंग को देखें, तो अमेरिका के मुकाबले इजरायल, ईरान से ज्यादा आर्थिक और सैन्य फायदा पाने वाला देश दिख रहा है. अगर ईरान से अमेरिका के संबंध बेहतर हो जाते, तो इजरायल को मिडिल ईस्ट में एक मजबूत टक्कर मिल सकती थी. इसलिए इजरायल के PM बेंजामिन नेतन्याहू इस जंग में अमेरिका को भी खींच लाए हैं. लेकिन, अमेरिका बड़ी सोच रखता है और अपना बड़ा फायदा देख रहा है.”
चेलानी कहते हैं, “खामेनेई के बाद ईरान में नई सत्ता आने से अमेरिका को बड़ा फायदा है. मिडिल ईस्ट में कतर, इराक, सीरिया, जॉर्डन, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों में अमेरिका ने अपने मिलिट्री बेस बनाए हुए हैं. एकमात्र ईरान में अमेरिका का कोई आर्मी बेस नहीं है.”
उनके मुताबिक, ईरान के कब्जे वाले लाल सागर के रूट्स के जरिए अमेरिका का तेल और बाकी चीजों का ट्रेड भी चलता है. ऐसे में अगर खामनेई की मौत के बाद ईरान की बागडोर अमेरिका की पसंद के किसी शख्स को मिलती है, तो अमेरिका का एक तरह से पूरे मिडिल ईस्ट पर उसका कंट्रोल हो जाएगा. इसलिए लॉन्ग टर्म में ईरान से फायदा तो अमेरिका को ही है.
ईरान के खिलाफ ऑपरेशन से इजरायल को अब तक क्या-क्या मिला?
ईरान को लेकर क्या है नेतन्याहू की विशलिस्ट?
डॉ. चेलानी बताते हैं कि ईरान की न्यूक्लियर साइट्स को तबाह करना इजरायल और नेतन्याहू का अकेला इरादा नहीं है. इस जंग में बेंजामिन नेतन्याहू की विशलिस्ट बड़ी है:-
ईरान को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की विशलिस्ट?
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