AI के जरिए सेलेब्स की फोटो पर दिखाते हैं कलाकारी? 3 साल के लिए जाएंगे जेल, लागू हो गए नए नियम
केंद्र सरकार ने AI जेनरेटेड कंटेंट के नियमों में बदलाव किए हैं. ये नियम 20 फरवरी 2026 से प्रभावी हो गए हैं. यह नियम IT Rules 2021 में संशोधन के रूप में लागू किया गया है.
AI टूल बनाने वाली कंपनियों को अपने यूजर्स को चेतावनी देनी होगी कि गलत AI कंटेंट बनाने पर सजा हो सकती है.
AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence). टेक वर्ल्ड में आज शायद AI ही एकमात्र ऐसा टर्म है, जिसकी सबसे ज्यादा चर्चा होती है. टेक्नोलॉजी से प्यार करने वाला हर व्यक्ति करीब हर दिन इससे रूबरू होता है. AI को इंसानों की जिंदगी में किसी आने वाले क्रांतिकारी बदलाव के शुरुआती संकेत के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन, दूसरी ओर इसका गलत इस्तेमाल होने के मामले भी आ रहे हैं.
AI का इस्तेमाल हम ऑफिस का प्रेजेंटेशन बनाने, रिज्यूमे बनाने, ऑफिशियल लेटर लिखने, फोटो बनाने और अपनी बेकार फोटो पर करेक्शन करने के लिए करते हैं. अक्सर हम AI पर सेलेब्स या नेताओं की तस्वीरें डालकर उसमें अपनी पसंद की एडिटिंग कर देते हैं और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देते हैं. कई बार ऐसा मजाक के लहजे में किया जाता है. लेकिन, ये एक क्राइम है. अगर आपको भी AI के जरिए दूसरों की फोटो पर कलाकारी दिखाने का शौक है, तो अब से संभल जाइए. क्योंकि, नए कानून के मुताबिक, ऐसा करने पर आप 3 साल के लिए जेल जा सकते हैं.
AI के इस्तेमाल को लेकर क्या है नया कानून?
केंद्र सरकार ने AI जेनरेटेड कंटेंट के नियमों में बदलाव किए हैं. ये नियम 20 फरवरी 2026 से प्रभावी हो गए हैं. यह नियम IT Rules 2021 में संशोधन के रूप में लागू किया गया है. इनके तहत सोशल मीडिया या इंटरनेट पर AI जेनरेटेड कंटेंट शेयर करना अब गंभीर कानूनी जिम्मेदारी बन गया है. नए नियम के मुताबिक, सिंथेटिकली या AI जेनरेटेड कंटेंट को परिभाषित किया गया है. यूजर्स के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं.
कानून में क्या हुए बदलाव?
नए कानून के मुताबिक, अगर कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो AI की मदद से बनाया गया है, तो उस पर 'लेबल' लगाना जरूरी कर दिया गया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट को शिकायत मिलने के महज 3 घंटे के भीतर हटाना होगा.
AI कंटेंट बनाने वाले टूल्स के लिए क्या चेतावनी है?
AI टूल बनाने वाली कंपनियों को अपने यूजर्स को चेतावनी देनी होगी कि गलत AI कंटेंट बनाने पर सजा हो सकती है. नियम तोड़ने पर उसका कंटेंट हटाया जाएगा. उसका अकाउंट सस्पेंड या बंद किया जा सकता है.
किन चीजों को सिंथेटिकली कंटेंट नहीं माना जाएगा?
नए कानून के मुताबिक, फोटो की ब्राइटनेस बढ़ाना, वीडियो कंप्रेस करना या बैकग्राउंड शोर कम करने को सिंथेटिकली कंटेंट नहीं माना जाएगा. अगर आप AI की मदद से पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन बनाते हैं, डायग्राम बनाते हैं या रिसर्च के लिए इमेजनरी केस स्टडी बना रहे हैं, तो भी ये सिंथेटिकली कंटेंट में नहीं माना जाएगा.
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किस तरह के कंटेंट पर लागू होगा नया नियम?
ये नियम मुख्य रूप से फोटो, वीडियो और ऑडियो पर लागू होगा. सिर्फ टेक्स्ट सिंथेटिकली कंटेंट नहीं है, लेकिन अगर टेक्स्ट का इस्तेमाल गैर-कानूनी काम में होता है, तो IT नियमों के दायरे में आएगा.
कंटेंट कितनी देर में हटाना होगा?
कोर्ट या सरकार के आदेश के बाद 3 घंटे के भीतर कंटेंट हटाना होगा. पहले यह 36 घंटे था.
क्या इससे कंपनियों की सिक्योरिटी बनी रहेगी?
अगर कंपनियां इन नियमों का पालन करते हुए AI कंटेंट को हटाती हैं, तो उनकी कानूनी सुरक्षा (धारा 79) बनी रहेगी. इसका मतलब है कि कंपनी पर कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा. इसे टेक्निकल टर्म में 'सेफ हार्बर' कहते हैं. यह सोशल मीडिया कंपनियों को मिला एक सुरक्षा कवच है, जो कहता है कि अगर किसी यूजर ने प्लेटफॉर्म पर कोई गलत पोस्ट या वीडियो डाला है, तो उसके लिए कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा.
नियमों की अनदेखी पर कैसी कार्रवाई?
भारत में ऐसे मामलों में IT एक्ट, 2000 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई होती है. BNS की धारा 353 के तहत गलत सूचना से डर या नफरत फैलाने पर 3 साल की जेल का प्रावधान है. BNS की धारा 336 के तहत AI के जरिए किसी की नकल उतारने पर 2 साल की जेल हो सकती है. IT एक्ट की धारा 79 के मुताबिक, नियम न मानने पर प्लेटफॉर्म की कानूनी सुरक्षा खत्म हो जाएगी.
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