क्या बिना परमिशन आपकी जमीन और सोना ले सकती है सरकार? जान लें अपने मतलब की ये बातें

सरकार सड़क या रेलवे की पटरी बनाने जैसे काम के लिए सिर्फ मुआवजा देकर जमीन अधिग्रहण कर सकती है. इसमें आपकी मर्जी हो या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.

Published date india.com Published: December 27, 2025 9:34 PM IST
क्या बिना परमिशन आपकी जमीन और सोना ले सकती है सरकार? जान लें अपने मतलब की ये बातें
सांकेतिक फोटो.

सोना और जमीन से किसी भी परिवार की आर्थिक हालत को मापा जाता रहा है. ये हमारी जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी भी होते हैं. ये दोनों ऐसी संपत्तियां होती हैं, जो पुरखों से चली आती हैं. हमारे बाप-दादा ने एक समय पर कहीं जमीन खरीदी होगी. विरासत के तौर पर हमें मिला और बाद में हम इसे अपने बच्चों के नाम करके जाएंगे. सोने के साथ भी यही सिलसिला चलता रहता है. बेशक हमारे बाप-दादा की बनाई जमीन-जायदाद और सोने के जेवरों पर हमारा हक होता है. लेकिन, क्या कभी आपने सोचा है कि सरकार खास परिस्थिति में आपका सोना और आपकी जमीन ले सकती है? आइए जानते हैं जमीन और सोने को लेकर क्या कहता है भारत का कानून:-

जमीन अधिग्रहण का कानून
अभी सरकार ‘राइट टू फेयर कॉम्पेन्सेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन, रीहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट एक्ट, 2013′(LARR Act) के तहत जमीन अधिग्रहण करती है.ये कानून सुनिश्चित करता है कि सरकार या निजी कंपनी ‘जनहित’ में जब भी जमीन लें, तो जमीन मालिकों और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा मिले. अगर अधिग्रहण में किसी घर का जाता है, तो नया घर, या उसकी वाजिब कीमत, या फिर निर्माण में मदद दी जाती है.

क्या जमीन लेने में परमिशन नहीं ली जाती?
सरकार सड़क या रेलवे की पटरी बनाने जैसे काम के लिए सिर्फ मुआवजा देकर जमीन अधिग्रहण कर सकती है. इसमें आपकी मर्जी हो या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. हालांकि, अगर कोई निजी कंपनी किसी क्षेत्र में प्रोजेक्ट शुरू करना चाहती है, तो वह तब तक जमीन नहीं ले सकती जब तक उसे एक बड़ी संख्या में जमीन मालिकों की लिखित मंजूरी न मिली हो.

ऐसे में जमीन का मुआवजा कैसे तय होगा?
ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार मूल्य का कम से कम 2 गुना मुआवजे के तौर पर मिलेगा. शहरी क्षेत्रों में 1 गुना दिया जाता है. इसके अलावा सरकार पुनर्वास, कैश मदद और वैकल्पिक जमीन या नौकरी भी देती है. हालांकि, ‘बाजार मूल्य’ को लेकर विवाद होते रहे हैं.

क्या आप जमीन देने से मना कर सकते हैं?
कुछ स्थिति में प्रभावित व्यक्ति या समूह अदालत में याचिका दायर कर जमीन अधिग्रहण पर रोक लगाने की मांग कर सकते हैं. जैसे- अधिग्रहण प्रक्रिया में गड़बड़ी हो, पुनर्वास या मुआवजे में न्याय न हो, सहमति संबंधित नियमों का उल्लंघन हो.अदालत ने समय-समय पर यह स्पष्ट किया है कि भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता और जनहित की वास्तविकता जरूरी है.

क्या सरकार हमारा सोना भी ले सकती है?
हां. सैद्धांतिक रूप से सरकार आपातकाल (जैसे आर्थिक संकट) में नागरिकों से सोना ले सकती है.अमेरिका में 1933 में ऐसा हुआ था. अभी भारत में ऐसा कोई सीधा कानून नहीं है. RBI के पास सोने के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए गोल्ड लोन या गोल्ड मॉनिटाइजेशन स्कीम जैसे ऑप्शन हैं.इसके तहत गोल्ड गिरवी रखकर आपको इमरजेंसी में कैश मिलता है. इस केस में आपका सोना सुरक्षित रहता है.

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अमेरिका में ऐसा क्या हुआ, जो लोगों का सोना लेने की जरूरत पड़ी थी?
अमेरिका में सरकार ने 1933 में महामंदी (Great Depression)आई थी. सारे बिजनेस, इंडस्ट्रीज ठप पड़े थे. इकोनॉमी में फ्लो रूक गया था. इस दौरान सरकार ने लोगों से सोना लिया था. ऐसा इसलिए किया गया था, ताकि ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ का इस्तेमाल करके आर्थिक संकट को खत्म किया जा सके. तब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने अपने Executive Order 6102 के तहत नागरिकों को अपना सोना (सिक्के, बिस्किट) बैंकों में जमा करके डॉलर में बदलने के लिए मजबूर किया था. इससे फेडरल रिजर्व बढ़ गया. आखिरकार अमेरिकी सरकार महामंदी से निकल पाई.

अब गोल्ड स्टैंडर्ड का इस्तेमाल होता है?
भारत में करेंसी अब गोल्ड स्टैंडर्ड पर नहीं बनती. दुनिया का कोई भी देश अब इसे फॉलो नहीं करता. अब सभी देश फिएट करेंसी (Fiat Currency) इस्तेमाल करते हैं, जो सरकार के भरोसे और सेंट्रल बैंक के मिनिमम रिजर्व सिस्टम पर आधारित होती है.

फिएट करेंसी कैसे काम करती है
1971 में अमेरिका ने सबसे पहले गोल्ड स्टैंडर्ड छोड़ा. इसके बाद सभी देश फिएट करेंसी पर आ गए.
RBI के पास हमेशा कम से कम 200 करोड़ का रिजर्व होना चाहिए. इसमें से 115 करोड़ का सोना और बाकी विदेशी मुद्रा होनी चाहिए. इस सिस्टम के तहत, RBI बिना सोने के भंडार की सीमा के असीमित नोट छाप सकती है. हालांकि, वह आर्थिक विकास और ज़रूरत के हिसाब से नोट जारी करती है, जिससे लचीलापन बना रहता है.

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