क्या भारत के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से डर गया चीन? पाकिस्तान में बनाएगा सबसे लंबी सुरंग, टारगेट पर है ये समुद्री रास्ता
पाकिस्तान में चीन की नई हाईवे और मेगा सुरंग परियोजना सिर्फ एक सड़क निर्माण योजना नहीं है, बल्कि दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीतिक तस्वीर का हिस्सा है. इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है.
चीन पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्रों में एक आधुनिक हाईवे और विशाल सड़क सुरंग के निर्माण में सहयोग करेगा. (AI जेनरेटेड इमेज)
- ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट की कुल लागत 92,000 करोड़ रुपये.
- CPEC के तहत पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश कर चुका चीन.
- PoK से होकर गुजरता है चीन के CPEC प्रोजेक्ट का एक हिस्सा.
- मलक्का स्ट्रेट के करीब है भारत का ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट.
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच चीन एक बार फिर पाकिस्तान में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट की तैयारी कर रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन पाकिस्तान में एक नए हाईवे और देश की सबसे लंबी सड़क सुरंग (रोड टनल) के निर्माण की योजना पर काम कर रहा है. इस प्रोजेक्ट को सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि साउथ एशिया में एक जियो-पॉलिटिकल समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये प्रोजेक्ट चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (CPEC) को और मजबूत करने के साथ-साथ हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की रणनीतिक पहुंच बढ़ाने का माध्यम भी बन सकती है. ऐसे समय में जब भारत अपने महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है, चीन की यह नई पहल क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकती है.
क्या है चीन की नई योजना?
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्रों में एक आधुनिक हाईवे और विशाल सड़क सुरंग के निर्माण में सहयोग करेगा. यह सुरंग पाकिस्तान की अब तक की सबसे बड़ी रोड टनल मानी जा रही है. इस प्रोजेक्ट का मकसद दुर्गम पर्वतीय इलाकों में आवाजाही को आसान बनाना और चीन-पाकिस्तान के बीच संपर्क को और मजबूत करना है.
CPEC को मिलेगी नई ताकत
चीन पिछले एक दशक से चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (CPEC) के तहत पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश कर चुका है. इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य चीन के पश्चिमी क्षेत्र शिनजियांग को पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से जोड़ना है. नई हाईवे और टनल प्रोजेक्ट को CPEC के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है. इससे चीन को अरब सागर तक बेहतर पहुंच मिल सकती है. पाकिस्तान में उसकी आर्थिक और रणनीतिक मौजूदगी और मजबूत हो सकती है.
भारत के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?
भारत लंबे समय से CPEC का विरोध करता रहा है, क्योंकि इसका एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है. भारत का कहना है कि यह उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है. ऐसे में पाकिस्तान में किसी भी बड़े चीनी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर नई दिल्ली की नजर रहती है. नई सड़क और सुरंग परियोजना भी रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क से चीन और पाकिस्तान के बीच सैन्य और लॉजिस्टिक सहयोग को भी मजबूती मिल सकती है. हालांकि, चीन और पाकिस्तान इसे पूरी तरह आर्थिक विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से जुड़ा प्रोजेक्ट बताते हैं.
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से क्या कनेक्शन?
भारत इस समय अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. ग्रेट निकोबार की सबसे बड़ी रणनीतिक विशेषता इसकी भौगोलिक स्थिति है. यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक मलक्का स्ट्रेट के करीब स्थित है.यही वजह है कि इसे भारत की समुद्री रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और भारत दोनों हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. पाकिस्तान में चीन की नई परियोजनाओं और ग्रेट निकोबार में भारत के निवेश को इसी व्यापक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में देखा जा रहा है.
पाकिस्तान में प्रोजेक्ट पूरा करने से चीन को क्या फायदा होगा?
अगर यह परियोजना पूरी होती है, तो चीन को कई फायदे मिल सकते हैं. उसे पाकिस्तान के बंदरगाहों तक बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा, व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में उसकी आर्थिक पकड़ मजबूत होगी.
भारत के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के बारे में जानिए
- ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत सरकार का एक बहुत बड़ा और महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है. यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के सबसे दक्षिणी द्वीप ग्रेट निकोबार पर बनाया जा रहा है.
- इस प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 72,000 से 92,000 करोड़ रुपये है. इसमें बड़ा अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, इंटरनेशनल एयरपोर्ट, टाउनशिप और पावर प्लांट शामिल हैं.
- इसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता का मुकाबला करना और भारत को एक प्रमुख ग्लोबल मैरीटाइम और ट्रांसशिपमेंट हब बनाना है.
- यह प्रोजेक्ट मलक्का स्ट्रेट के करीब स्थित है, जो चीन के मरीन ट्रेड (समुद्री व्यापार) और एनर्जी सप्लाई का रूट है. इससे हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) में भारत की रणनीतिक बढ़त मजबूत होगी.
- ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को तीन फेज में पूरा किया जाएगा. पहले फेज में 2025 से 2035 तक काम होगा.इसमें गलाथिया बे में एक बड़ा पोर्ट बनेगा.
- इसकी शुरुआती क्षमता 4.4 मिलियन TEU और बाद में 16 मिलियन TEU होगी. यह पोर्ट इतना गहरा होगा कि बड़ी-बड़ी जहाजें आसानी से आ-जा सकें.
- इस प्रोजेक्ट के तहत गालाथिया बे (Galathea Bay) में इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एक नया एयरपोर्ट, पावर प्लांट और एक ग्रीनफील्ड टाउनशिप बनाया जा रहा है.
- इस प्रोजेक्ट का दायरा और आकार काफी बड़ा है, जिसके कारण इसे भारी विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है.
- प्रोजेक्ट को लेकर सरकार का यह आधिकारिक दावा है कि शोम्पेन (Shompen) और निकोबारी (Nicobarese) जैसी कमजोर और संरक्षित जनजातियों के आवासों और अधिकारों की रक्षा की जाएगी.
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