
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
किसी भी देश की सेहत और खुशहाली का अंदाजा उसकी इकोनॉमी (Indian Economy) से लगाया जाता है. इसमें विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरिन एक्सचेंज (Forex) का बड़ा रोल होता है. भारत ने विदेशी मुद्रा भंडार में ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो अमेरिका, रूस और फ्रांस समेत कई देशों के पास भी नहीं है. ये लगातार तीसरा हफ्ता है जब भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़त देखने को मिली है.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 19 दिसंबर को खत्म हुए हफ्ते में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 4.38 अरब डॉलर बढ़कर 693.32 अरब डॉलर पर पहुंच गया है. इस बढ़त में आधे से ज्यादा हिस्सा सोने का रहा. खास बात ये है कि रुपये में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार और फॉरेन करेंसी एसेट दोनों ही घटा है. जबकि, गोल्ड रिजर्व डॉलर और रुपये दोनों में बढ़ा है.
आइए समझते हैं विदेशी मुद्रा भंडार में क्या-क्या शामिल होता है? RBI के लिए सोने का स्टॉक इतना जरूरी क्यों है? करेंसी नोट छापने के लिए सोने का क्या कनेक्शन है? विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा:-
विदेशी मुद्रा भंडार में क्या-क्या शामिल होता है?
RBI अपने विदेशी मुद्रा भंडार को डॉलर, यूरो, सोने और इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड्स यानी IMF में SDRs के रूप में रखता है. इन्हीं को इंवेस्ट करके कमाई की जाती है. RBI के मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा विदेशी सरकारी बॉन्ड्स या डॉलर में इंवेस्ट होता है.
अभी कहां पहुंचा देश का विदेशी मुद्रा भंडार?
बीते हफ्ते फॉरेक्स रिजर्व में आई करीब 4.4 अरब डॉलर की कुल बढ़त का आधे से ज्यादा गोल्ड रिजर्व की वजह से रहा. हफ्ते के दौरान गोल्ड रिजर्व 2.62 अरब डॉलर की बढ़त के साथ 110.36 अरब डॉलर पर पहुंच गए. रुपये के मूल्य में इसमें 12 हजार करोड़ रुपये की बढ़त रही. फॉरेक्स रिजर्व में शामिल गोल्ड रिजर्व का मूल्य 9.86 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इसके साथ ही फॉरेन करेंसी एसेट्स डॉलर के वैल्यू में 1.641 अरब डॉलर बढ़कर 559.42 अरब डॉलर पर पहुंच गई. जबकि, रुपये में फॉरेन करेंसी एसेट की वैल्यू 44 हजार करोड़ रुपये घटकर 50 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया.
Forex में भारत ने किन देशों को पछाड़ा?
चीन, जापान और स्विट्जरलैंड के बाद विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश है. रूस, अमेरिका और फ्रांस जैसे देश भी भारत के मुकाबले में काफी पीछे हैं. दुनिया में भारत के पास 686 अरब डॉलर का खजाना है, जो कि दुनिया का चौथा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाला देश है.
गोल्ड रिजर्व कितना बढ़ा है?
भारत के गोल्ड रिजर्व में भी बढ़ोतरी हुई है. रिजर्व बैंक के मुताबिक, बीते 19 दिसंबर को खत्म हुए हफ्ते के दौरान गोल्ड स्टॉक की वैल्यू में 2.623 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. इसी के साथ अब अपना सोने के भंडार की वैल्यू बढ़ कर 110.365 बिलियन डॉलर हो गई है. यह देश के कुल फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व का 14.7% से कुछ ज्यादा बैठता है.
SDR में हुई कितनी बढ़ोतरी?
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट (SDR) में 8 मिलियन डॉलर की मामूली वृद्धि हुई है. इससे एक सप्ताह पहले भी इसमें 14 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी. अब यह बढ़ कर 18.744 बिलियन डॉलर का हो गया है.
रिजर्व बैंक सोना क्यों खरीदता है?
किसी देश की करेंसी इंटरनेशनल लेवल पर कमजोर होती है, तो गोल्ड रिजर्व उस देश की पर्जेसिंग पावर क्रय और उसकी आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने में मदद करता है. 1991 में जब भारत की इकोनॉमी डूब रही थी और उसके पास सामान इंपोर्ट करने के लिए डॉलर नहीं थे, तो उसने सोने को गिरवी रख पैसे जुटाए थे और इस फाइनेंशियल क्राइसिस से बाहर आया था. ऐसी क्राइसिस का आगे सामना न करना पड़े, इसलिए RBI सोना खरीदता है. RBI अपने विदेशी मुद्रा भंडार को डायवर्सिफाइ करने के लिए सोना खरीदता है, ताकि डॉलर या अन्य करेंसी पर निर्भरता कम हो. क्योंकि, सोना एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, जो आर्थिक अनिश्चितता या करेंसी डिवैल्यूएशन के समय मूल्य बनाए रखता है.
सोना और करेंसी का क्या रिलेशन है?
अगर किसी देश की करेंसी की वैल्यू गिरती है, तो सोना उस देश में महंगा हो जाता है. क्योंकि, ग्लोबल लेवल पर इसका वैल्यूएशन डॉलर में होता है. वहीं, सोना ऐतिहासिक रूप से एक ऑप्शनल करेंसी के रूप में देखा जाता है, खासकर जब पेपर करेंसी पर भरोसा कम हो जाए. नोटबंदी के दौरान ऐसा देखा गया था.
करेंसी नोट छापने के लिए सोने का क्या कनेक्शन है?
करेंसी नोट छापने और सोने के बीच अब कोई डायरेक्ट कनेक्शन नहीं है. ज्यादातर देश 1971 के बाद गोल्ड स्टैंडर्ड खत्म कर चुके हैं. अब नोट ‘फिएट करेंसी’ (fiat currency) हैं, जिनका मूल्य सरकार और बाजार तय करते हैं. हालांकि, सोने का भंडार अभी भी केंद्रीय बैंकों के लिए स्थिरता और विश्वास का स्रोत होता है.
गोल्ड रिजर्व बढ़ने से आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
गोल्ड रिजर्व बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और रुपये पर भरोसा बढ़ता है. इससे महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है. लेकिन, इससे सोने के दाम भी बढ़ सकते हैं. सोने की कीमत बढ़ने से जूलरी महंगे होते हैं. भारत में इसके चलते फेस्टिवल और शादी और अन्य अवसरों पर खरीदारी प्रभावित होती है. दूसरी ओर सोने में निवेश करने वाले लोगों को कीमत बढ़ने से फायदा होता है, लेकिन गिरावट से नुकसान भी हो सकता है.
FAQs
घर में कितना सोना रख सकते हैं?
अगर किसी महिला की शादी नहीं हुई तो अपने पास 250 ग्राम तक सोना रख सकती है. जिन महिलाओं की शादी हो रखी है वो अपने पास 500 ग्राम तक सोना रख सकती हैं. हालांकि, आपको सोने के स्रोत के बारे में बताना जरूरी है, जैसे खरीद का बिल या विरासत में मिला कोई प्रमाण. वहीं, देश में कोई भी पुरुष अपने पास 100 ग्राम तक का सोना रख सकता है. इससे ज्यादा सोना रखने पर इनकम टैक्स विभाग कार्रवाई कर सकता है.
कैसी कार्रवाई हो सकती है?
लिमिट से ज्यादा और बिना स्रोत के सोना मिलने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट न केवल इसे जब्त कर सकता है, बल्कि आपको 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माना लग सकता है.
क्या सरकार इमरजेंसी में हमारा सोना ले सकती है?
हां. ऐसा हो सकता हैं. कई देशों में ये रूल है, जब सरकार इमरजेंसी, नेशनल क्राइसिस और जंग के हालात में फंड जुटाने के लिए आपका सोना ले सकती है. हालांकि, अभी तक भारत में ऐसा कोई मामला नहीं आया है.
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