ईरान-US की डील कंफर्म होने के बाद 80 डॉलर पर आया क्रूड ऑयल, क्या अब आपको सस्ता मिलने लगेगा पेट्रोल? जानें फायदे की बात
भारत में पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल यानी PPAC पेट्रोल-डीजल की खपत, कीमत और आयात से जुड़े आंकड़े जारी करता है. इसके मुताबिक, भारत में रोजाना करीब 90 से 95 करोड़ लीटर पेट्रोलियम उत्पादों की खपत होती है.
भारत की सरकारी तेल कंपनियां कभी भी कीमतों को ‘रियल-टाइम’ क्रूड के उतार-चढ़ाव से लिंक नहीं रखतीं (AI जेनरेटेड इमेज)
- रोज 95 करोड़ लीटर पेट्रोलियम उत्पाद फूंक देता है भारत.
- तेल कंपनियों को हर महीने हो रहा 30,000 करोड़ का नुकसान.
- घरों में रोजाना करीब 50 लाख गैस सिलेंडरों की डिलीवरी.
- हर रोज सुबह 6 बजे आते हैं पेट्रोल-डीजल के रेट.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (14 जून 2026) को सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान के साथ समझौता हो गया है. होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा. ईरान ने भी डील पर सहमति की बात कंफर्म की है. अब इस पीस डील पर 19 जून 2026 को साइन किए जाएंगे. डील की बात कंफर्म होते ही इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम 80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं.
आइए जानते हैं कि अगर क्रूड ऑयल के दाम गिरे, तो क्या भारत में पेट्रोल-डीजल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट के प्राइस भी कम होंगे? क्या आपको अब पेट्रोल सस्ते में मिलने लगेगा?
भारत में रोज खर्च होता है कितना तेल?
- भारत में पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल यानी PPAC पेट्रोल-डीजल की खपत, कीमत और आयात से जुड़े आंकड़े जारी करता है.
- PPAC के मुताबिक, भारत में रोजाना करीब 90 से 95 करोड़ लीटर पेट्रोलियम उत्पादों की खपत होती है. डीजल की खपत 25 से 30 करोड़ लीटर रोजाना है.
- पेट्रोल की खपत 10 से 12 करोड़ लीटर प्रतिदिन है. LPG की बात करें तो घरों में रोजाना करीब 50 लाख गैस सिलेंडर डिलीवर किए जाते हैं.
- एविएशन टर्बाइन फ्यूल मतलब हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल की खपत 4 से 6 करोड़ लीटर प्रतिदिन है.
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अभी कितना चल रहा इंटरनेशनल क्रूड ऑयल का प्राइस?
बीते दिनों इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड करीब 5% टूटकर 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी लगभग 5% गिरकर 91 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गया. लेकिन, अब अमेरिका-ईरान की पीस डील कंफर्म होने के बाद क्रूड ऑयल 80.28 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है.
WTI Crude का भाव 5.02% की भारी-भरकम गिरावट के साथ 80.62 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है. ग्लोबल बेंचमार्क माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) भी 4.57% की कमजोरी के साथ 83.34 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. कुछ हफ्ते पहले तक ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, ऐसे में मौजूदा गिरावट को बाजार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.
हर रोज सुबह 6 बजे आते हैं पेट्रोल-डीजल के रेट
भारत अपनी जरूरत का करीब 85% से ज्यादा क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है. देश में रोज सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें तय की जाती हैं. बीते महीने 4 बार पेट्रोलियम प्रोडक्ट खासतौर पर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए गए हैं. दिल्ली में अभी 1 लीटर पेट्रोल 102 रुपये में बिक रहा है. डीजल 97 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है.
क्रूड ऑयल के दाम गिरने पर भी आपको नहीं मिलेगा सस्ता पेट्रोल
इन कीमतों को तय करने का एक पूरा गणित है. अगर पुराने डेटा और एक्सपर्ट्स की थ्योरी को देखें, तो क्रूड ऑयल में हर 1 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट होने पर भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग 50 से 55 पैसे प्रति लीटर की कटौती करने का स्कोप बनता है. ऐसे में अगर क्रूड ऑयल 80 डॉलर प्रति बैरल तक तक आ गया है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिलनी चाहिए. लेकिन, ऐसा होना फिलहाल के लिए मुमकिन नहीं लगता.
क्यों नहीं सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल?
भारत की सरकारी तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कभी भी कीमतों को रियल-टाइम’ क्रूड के उतार-चढ़ाव से लिंक नहीं रखतीं. तेल कंपनियों का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि जब भी क्रूड ऑयल गिरा, तो कंपनियां सबसे पहले अपने नुकसान की भरपाई करती हैं. इसके बाद ही आम आदमी को राहत दी जाती है.
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तेल कंपनियों को हर महीने कितना हो रहा घाटा?
सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं. पेट्रोलियम मंत्रालय की ज्वॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार, कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और LPG की बिक्री पर हर महीने करीब 30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है.
क्रूड ऑयल में किसका कितना मार्जिन?
भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत काम करने वाला पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) पेट्रोल-डीजल की खपत, कच्चे तेल के इंपोर्ट, रिफाइनरी डेटा, LPG, ATF वगैरह के आंकड़े जारी करता है. PPAC के 25 मई 2026 के डेटा के मुताबिक, भारत में कच्चा तेल 55.18 रुपये प्रति लीटर में आ जाता है. इसपर 3.82 पैसे तेल कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम का मार्जिन जोड़ा जाता है. यानी ये मार्जिन तेल कंपनियों की रिफाइनरी और पाइपलाइन बिछाने का खर्चा हर लीटर में 3.82 रुपये पड़ता है.
केंद्र और राज्य सरकारों का शेयर?
इसके बाद केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी के तौर पर 19 रुपये प्रति लीटर वसूलती है. फिर 4.40 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल पंप के मालिक के पास बतौर मार्जिन जाता है. इन पैसों से पेट्रोल के स्टोरेज, पेट्रोल पंप के मेंटेनेंस और कर्मचारियों की सैलरी निकलती है. 15.37 पैसे राज्य सरकार VAT (वैल्यू एडेड टैक्स) के तौर पर वसूलती है. इस तरह सबका मार्जिन और टैक्स जुड़ने के बाद आपको 97.77 रुपये में मिल रहा था. 25 मई से अब पेट्रोल 102 रुपये में मिलने लगा है.
3 साल पहले कितने में आता था कच्चा तेल?
अब PPAC के 25 जून 2023 के आंकड़े देखते हैं. तीन साल पहले प्रति लीटर कच्चा तेल 38.60 रुपये में भारत आता था. लेकिन, तब भी आपको 96.71 रुपये में पेट्रोल मिलता था. तब भी केंद्र सरकार 19.90 रुपये बतौर एक्साइज ड्यूटी वसूलती थी. राज्य सरकार भी 15.71 रुपये VAT के तौर पर लेती थी. दोनों आंकड़ों में सबसे बड़ा गैप तेल कंपनियों की मार्जिन का है.
किसके लिए है फायदे और घाटे का खेल?
इन आंकड़ों से साफ है कि तेल को लेकर फायदे और घाटे का सारा खेल तेल कंपनियों का है. PPAC के 2023 के आंकड़े बताते हैं कि जब कच्चा तेल 38.60 रुपये प्रति लीटर मिलता था, तब कंपनी का मार्जिन 18.75 रुपये प्रति लीटर होता था. 2026 में प्रति लीटर कच्चा तेल 55.18 रुपये प्रति लीटर आ रहा है. ऐसे में तेल कंपनी का मार्जिन 14.93 घटकर 3.82 रुपये रह गया है. इन आंकड़ों से आप समझ सकते हैं कि कच्चे तेल के दाम घटने कंपनी को मुनाफा कम होता है. इन नुकसान को पाटने के लिए आपको पेट्रोल-डीजल सस्ते में नहीं दिया जाता. इसलिए पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए जा रहे हैं.
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