कर्नाटक के सबसे अमीर नेता हैं डीके शिवकुमार, वीडियो पार्लर जाकर सीखी राजनीति, ऐसे तय किया कैडर से CM तक का सफर

Written By: Anjali Karmakar Updated by: Anjali Karmakar
Updated Date:June 3, 2026 5:03 PM IST

कर्नाटक में डीके शिवकुमार को कांग्रेस का संकटमोचक माना जाता है. वह पार्टी के लिए रिसोर्स जुटाने से लेकर दूसरे राज्यों में संकट आने पर कांग्रेस विधायकों को पनाह देने के लिए जाने जाते हैं.

कर्नाटक की राजनीति में लंबे संघर्ष, विवाद, जेल यात्रा और राजनीतिक धैर्य का प्रतीक बने डीके शिवकुमार के लिए आज का बेहद खास है. आज उन्होंने राज्य के 24वें मुख्यमंत्री की शपथ ली. जी परमेश्वर नए डिप्टी CM बनाए गए हैं. शिवकुमार को 30 मई को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में नेता चुना गया था. शिवकुमार के साथ 13 विधायकों ने भी शपथ ली है. इनमें पूर्व सीएम सिद्धारमैया के MLC बेटे यतींद्र सिद्धारमैया भी शामिल हैं.

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कर्नाटक में 2023 में विधानसभा चुनाव हुए थे. कांग्रेस को बहुमत मिला था. इसके बाद कर्नाटक कांग्रेस के दो दिग्गजों सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री के पद को लेकर मनमुटाव बढ़ गया था. आखिर में राहुल गांधी ने ढाई-ढाई साल के CM का फॉर्मूला रखा, जिसके आधार पर सिद्धारमैया शुरुआत के ढाई साल तक CM रहे. कुछ दिन में उनका टर्म पूरा हो रहा था. सिद्धारमैया ने 28 मई को CM पद से इस्तीफा दे दिया था. वो 20 मई 2023 से 28 मई 2026 तक मुख्यमंत्री रहे. अब सत्ता की बागडोर शिवकुमार के हाथ में आ गई है.

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डीके शिवकुमार का एक कांग्रेस कार्यकर्ता से कर्नाटक की सत्ता के टॉप पर पहुंचने का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा. रास्ते में तमाम बाधाएं आईं. जेल की सलाखें मिलीं. राजनीतिक उठा-पटक भी देखना पड़ा. दो बार CM का पद मिलते-मिलते रह गया. अब आखिरकार वो मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं.

आइए समझते हैं आखिर डीके शिवकुमार का कांग्रेस में इतना बड़ा कद कैसे हो गया? पहला चुनाव हारने वाले डीके शिवकुमार कांग्रेस की जीत के शिल्पकार कैसे बन गए?

डीके शिवकुमार का मतलब?

डीके शिवकुमार 64 साल के हैं. उनका जन्म 15 मई 1962 को हुआ था. उनके नाम के पीछे एक किस्सा है. कहा जाता है कि पिता केम्पेगौड़ा और माता गौरम्मा को 3 साल तक बच्चा नहीं हुआ. वे भगवान शिव के मंदिर शिवालधप्पा गए. वहां बच्चे के लिए प्रार्थना की. इसके बाद उन्हें बेटा हुआ. बच्चे का नाम उन्होंने शिवकुमार रखा. उनके गांव का नाम डोड्डालाहल्ली है. पिता का नाम केम्पेगौड़ा. इसलिए शिवकुमार का पूरा नाम हो गया डोड्डालाहल्ली केम्पेगौड़ा शिवकुमार. शॉर्ट में उन्हें डीके शिवकुमार कहते हैं.

RSS से रह चुका कनेक्शन

डीके शिवकुमार के जीवन के शुरुआती साल राजाजीनगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विट्ठल शाखा (कैंप) में जाते हुए बीते थे. 1979 में जब देवराज उर्स और उनके समर्थक कांग्रेस पार्टी छोड़कर चले गए थे, तब शिवकुमार ने एक छात्र नेता के रूप में कांग्रेस में अपनी पैठ बनाई. फिर पार्टी में अपनी जगह बनाने में सफल रहे.

वीडियो पार्लर से शुरू हुई राजनीति

शिवकुमार ने अपनी राजनीति की बारीकियां 1980 के दशक में छोटे से वीडियो पार्लर से सीखी थीं. बेंगलुरु दक्षिण जिले में स्थित यह दुकान सिर्फ फिल्मों का केंद्र नहीं थी, बल्कि स्थानीय युवाओं, कारोबारियों और राजनीति में रुचि रखने वालों का मिलन स्थल बन चुकी थी. यहीं से उन्होंने नेटवर्किंग करनी शुरू की. देखते ही देखते वो राजनीतिक समीकरणों में माहिर हो गए.

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23 साल की उम्र में दी थी देवगौड़ा को चुनौती

राजनीति में शिवकुमार की एंट्री 23 साल की उम्र में हो गई थी. 1985 में उन्होंने सथानूर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते हुए पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा को चुनौती दी थी. हालांकि, शिवकुमार इलेक्शन हार गए थे. मगर उनकी राजनीतिक पहचान बनने लगी थी. बाद में वह विधायक बने और अपने भाई डीके सुरेश के साथ मिलकर कनकपुरा क्षेत्र को कांग्रेस का मजबूत गढ़ बना दिया. डीके शिवकुमार वोक्कलिगा समुदाय से आते हैं. राज्य की 50 सीटों पर इस समुदाय का प्रभाव है.

कहलाते हैं कनकपुरा का रॉक’

शिवकुमार कनकपुरा क्षेत्र में ग्रेनाइट और खनन कारोबार से जुड़े हुए हैं. इसलिए उन्हें कनकपुरा बांडे’ यानी कनकपुरा का रॉक’ कहा जाता है. समर्थकों के लिए यह नाम उनकी मजबूती और राजनीतिक संघर्षों से लड़ने की क्षमता का प्रतीक बन गया.

कैसे मिला संकटमोचक का टैग?

समय के साथ डीके शिवकुमार कांग्रेस के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों में शामिल हो गए. 2002 में महाराष्ट्र में विलासराव देशमुख सरकार बचाने से लेकर 2017 में कांग्रेस नेता अहमद पटेल के राज्यसभा चुनाव तक, उन्होंने कई अहम राजनीतिक अभियानों को सफलतापूर्वक संभाला. गुजरात में विधायकों की टूट-फूट रोकने के लिए कांग्रेस विधायकों को बेंगलुरु के रिसॉर्ट में सुरक्षित रखने की रणनीति ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई. इसके बाद वह गांधी परिवार के सबसे विश्वसनीय नेताओं में गिने जाने लगे.

तिहाड़ जेल से लिया था बड़ा संकल्प

23 अक्टूबर 2019 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिवकुमार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया. इसके बाद वो करीब 50 दिन तिहाड़ जेल में रहे. जब जमानत पर बाहर आए, तो उनका बदला हुआ रूप सबके लिए चर्चा का विषय बन गया. हमेशा साफ-सुथरे और क्लीन-शेव लुक में दिखने वाले शिवकुमार उस दिन घनी दाढ़ी में नजर आए. शिवकुमार के करीबियों ने मीडिया में दावा किया कि उन्हें दाढ़ी न कटवाने की प्रतिज्ञा ली है. कहते हैं कि जेल में रहते हुए उन्होंने प्रण लिया था कि मुख्यमंत्री बनने तक वह दाढ़ी नहीं कटवाएंगे. वर्षों तक उन्होंने इस संकल्प को निभाया.

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मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा लंबा इंतजार

2023 में कांग्रेस की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद मुख्यमंत्री पद सिद्दरमैया को मिला. इसके बाद भी शिवकुमार ने संगठन और सरकार दोनों में अपनी भूमिका मजबूती से निभाई. उपमुख्यमंत्री और बेंगलुरु विकास मंत्री के रूप में उन्होंने कई बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को आगे बढ़ाया. अब जब उन्हें सिद्दरमैया के उत्तराधिकारी के रूप में मंजूरी मिल चुकी है, तो कर्नाटक की राजनीति में उनका वर्षों पुराना सपना साकार होने जा रहा है.

4 बार लगातार साथनूर से जीता विधानसभा का चुनाव

डीके शिवकुमार लगातार 4 बार 1989, 1994, 1999 और 2004 में साथनूर से चुनाव जीते. मार्जिन हमेशा 40 हजार से ज्यादा ही रहा. 2008 से डीके कनकपुरा से चुनाव लड़ रहे हैं और अब तक कभी नहीं हारे. 1990 में कांग्रेस ने डीके को टिकट नहीं दिया, तो उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा. इस बार भी उनके सामने एचडी देवगौड़ा थे, पर शिवकुमार ने उन्हें हरा दिया. 2004 में मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा ने शिवकुमार को शहरी विकास मंत्री बनाया. एक्सपर्ट कहते हैं कि यहीं से राजनीति में शिवकुमार का कद और बिजनेस तेजी से बढ़ा.

कर्नाटक के सबसे अमीर विधायक

डीके शिवकुमार कर्नाटक के सबसे अमीर विधायक हैं. 2023 में चुनाव आयोग को दिए हलफनामे के मुताबिक, डीके की कुल संपत्ति 1413 करोड़ है. उनके और उनके परिवार के पास कुल मिलाकर लगभग 273 करोड़ रुपये की चल संपत्ति है. इसमें बैंक जमा, शेयर, लाइफ इंश्योरेंस, पर्सनल लोन, गाड़ियां और जूलरी शामिल हैं. अकेले शिवकुमार के पास 244.93 करोड़ रुपये की चल संपत्ति है, जबकि उनकी पत्नी के पास 20.30 करोड़ रुपये की चल संपत्ति है. उनके पास लगभग 84.73 करोड़ रुपये की आवासीय संपत्तियां हैं. इसमें बेंगलुरु के पॉश इलाके सदाशिवनगर में एक आलीशान घर है, जिसकी कीमत करीब 42.75 करोड़ रुपये है.

BJP नेता के रिश्तेदार

डीके शिवकुमार की बेटी ऐश्वर्या शिवकुमार की शादी 2020 में अमर्त्य हेगड़े से हुई थी. अमर्त्य कैफे कॉफी डे यानी CCD के फाउंडर रहे वीजी सिद्धार्थ के बेटे और कर्नाटक के कद्दावर नेता एसएम कृष्णा के पोते हैं. एसएम कृष्णा 40 साल से ज्यादा वक्त तक कांग्रेस में रहे. केंद्रीय मंत्री के अलावा CM भी बने, लेकिन 2017 में BJP में शामिल हो गए थे.

करप्शन के 19 केस दर्ज

2018 में डीके शिवकुमार पर ED का एक्शन शुरू हो गया. उन पर मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी समेत 19 से ज्यादा मामले दर्ज हैं. कर्नाटक के पॉलिटिकल एक्सपर्ट दावा करते हैं कि BJP ने डीके शिवकुमार को तोड़ने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी.

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