लक्षद्वीप में 47 साल बाद क्यों बदले गये शराबबंदी के नियम? फैसले का क्या होगा असर? सरकार की क्या है दलील- जानिये सबकुछ- Explained

Written By: Parinay Kumar Updated by: Parinay Kumar
Updated Date:June 9, 2026 6:52 PM IST

Why Liquor Ban Ended In Lakshadweep: सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पर्यटन सुविधाओं को प्रतिस्पर्धी बनाना जरूरी है. इस फैसले से पर्यटन को रफ्तार मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

  • लक्षद्वीप में शराब की खरीद और बिक्री पर रोक साल 1979 से ही लागू था.
  • साल 2011 की जनगणना के मुताबिक लक्षद्वीप की आबादी 64,473 है.
  • लक्षद्वीप की 97% आबादी मुस्लिम है और यहां शराबबंदी की यही वजह थी.
  • 2024 के बाद लक्षद्वीप जाने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है.
  • लक्षद्वीप से शराबबंदी तो हट गई, लेकिन शराब पर टैक्स बहुत ज्यादा रखा गया है.
  • नए एक्साइज रेगुलेशन के तहत 21 साल से कम उम्र के लोगों को शराब बेचने पर रोक रहेगी.

लक्षद्वीप में 47 साल बाद शराब बिकने का रास्ता साफ हो गया है. केंद्र सरकार ने 'लक्षद्वीप शराबबंदी नियम-1979' को रद्द कर दिया है. केंद्र की तरफ से जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि लक्षद्वीप में शराब की दुकान खोलने के लिए कई नियम मानने होंगे. शराब की दुकान खोलने से पहले इसका ध्यान रखना बेहद जरूरी होगा कि वहां से 50 मीटर की दूरी पर कोई अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, धार्मिक क्षेत्र, महिलाओं का हॉस्टल या फिर अनाथालय नहीं होने चाहिए. नये नियम 5 जून से लागू हो चुके हैं.'लक्षद्वीप आबकारी नियम-2026' को मंजूरी मिलने के बाद अब इस केंद्र शासित प्रदेश में शराब के प्रोडक्शन, स्टोरेज, इंपोर्ट, एक्सपोर्ट, ट्रांसपोर्टेशन, खरीद-बिक्री और सेवन किया जा सकेगा. इसके लिए प्रशासन की तरफ से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा.

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लक्षद्वीप में शराब पर क्यों थी पाबंदी?

साल 2011 की जनगणना के मुताबिक, यहां 64,473 लोग रहते हैं, जिनमें लगभग 95 फीसदी अनुसूचित जनजाति (ST) के हैं. इस द्वीपसमूह की 97 फीसदी आबादी मुस्लिम है, जो भारत के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में सबसे अधिक अनुपात है. इस्लाम में शराब पीने पर रोक है और इसी धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए साल 1979 में यहां शराबबंदी लागू की गई थी. उस समय केवल कवरत्ती और बंगाराम द्वीपों पर सरकारी बार व पर्यटक रिसॉर्ट्स को सीमित छूट दी गई थी. प्रशासन का तर्क था कि शराबबंदी से अपराध, नशाखोरी और सामाजिक समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिलती है. हालांकि, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कुछ द्वीपों और रिसॉर्ट्स में समय-समय पर सीमित छूट मिलती रही है.

लक्षद्वीप में शराब के नियमों में अब क्यों हुआ बदलाव?

बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह केंद्र सरकार की क्षद्वीप को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने की कोशिश लगती है. अधिकारियों का लंबे समय से तर्क रहा है कि शराब की उपलब्धता पर रोक के कारण ये द्वीप हिंद महासागर के दूसरे पर्यटन स्थलों (खासकर मालदीव, जहां पर्यटक रिसॉर्ट्स में शराब मिलती है) के मुकाबले पिछड़ जाते हैं. सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पर्यटन सुविधाओं को प्रतिस्पर्धी बनाना जरूरी है. लक्षद्वीप प्रशासन का मानना है कि इससे पर्यटन को रफ्तार मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचेगा.

Q1. लक्षद्वीप में शराब पर अब तक क्यों लगी थी रोक?

लक्षद्वीप की 97% आबादी मुस्लिम है और इस्लाम में शराब हराम है. शराब पर रोक की सबसे बड़ी वजह यह थी.

Q2. लक्षद्वीप की आबादी कितनी है?

साल 2011 की जनगणना के मुताबिक लक्षद्वीप की आबादी 64,473 है.

Q3. लक्षद्वीप जाने के लिए परमिट क्यों लगता है?

परमिट का मुख्य कारण द्वीपों के संवेदनशील पर्यावरण, कोरल रीफ और समुद्री जैव विविधता की रक्षा करना है.

Q4. लक्षद्वीप में कब से लागू थी शराबबंदी?

लक्षद्वीप में शराब की खरीद-बिक्री पर रोक 1979 से लागू था. हालांकि कुछ द्वीपों और रिसॉर्ट्स में समय-समय पर सीमित छूट मिलती रही है.

Q5. देश के किन-किन राज्यों में लागू है शराबबंदी?

बिहार, गुजरात, नगालैंड और मिजोरम में फिलहाल शराबबंदी लागू है.

लक्षद्वीप जाने के लिए परमिट की जरूरत क्यों?

लक्षद्वीप समूह में कुल 36 द्वीप हैं. इनमें से 10 पर लोग रहते हैं. इनमें अगात्ती, अमिनी, एंड्रोट, बित्रा, चेतलाट, कदमत, कल्पेनी, कवरत्ती, किल्टन और मिनिकॉय शामिल हैं. विदेशियों और भारतीय पर्यटकों को खास परमिट लेने के बाद ही इन द्वीपों पर जाने की इजाजत मिलती है. विदेशी पर्यटकों को अगात्ती, बंगाराम और कदमत द्वीपों पर भी जाने की पाबंदी है. आपके मन में ये सवाल जरूर उठ रहे होंगे कि लक्षद्वीप भारत में ही है फिर क्यों वहां जाने के लिए भारतीय नागरिकों को भी परमिट लेना पड़ता है? परमिट का मुख्य कारण द्वीपों के संवेदनशील पर्यावरण, कोरल रीफ और समुद्री जैव विविधता की रक्षा करना है. इसके साथ-साथ सुरक्षा कारणों से भी आने-जाने वाले लोगों का रिकॉर्ड रखा जाता है.

लक्षद्वीप जाने के लिए परमिट कैसे मिलता है?

अगर आप भी लक्षद्वीप को अपने ट्रैवल बकेट में डाल रहे हैं तो सबसे पहले आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि वहां जाने के लिए आपको परमिट कहां से मिलेगा. इसके लिए आपके पास एक वैलिड पहचान पत्र होना बेहद जरूरी है. आप जब परमिट के लिए आवेदन कर रहे हों तो आपके पास यात्रा की पूरी डिटेल और होटल में कहां रुकने की आपकी बुकिंग है, इसकी जानकारी होनी चाहिए. आमतौर पर परमिट लक्षद्वीप प्रशासन अधिकृत टूर ऑपरेटर या सरकारी पर्यटन पैकेज के माध्यम से जारी किया जाता है. अगर कोई पर्यटक किसी होटल या रिसॉर्ट में ठहरने की बुकिंग करता है तो संबंधित संस्था भी परमिट प्रक्रिया में सहायता कर सकती है.

PM मोदी के जाने के बाद पर्यटन को मिली रफ्तार

जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्षद्वीप की यात्रा की थी और इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की थीं. प्रधानमंत्री मोदी ने वहां खूबसूरत समुद्र तट का आनंद लिया और स्नॉर्कलिंग की. यह लक्षद्वीप को विदेश में मौजूद पर्यटन स्थलों के विकल्प के तौर पर पेश करने की एक बड़ी कोशिश थी. इसके बाद से वहां पर्यटकों की संख्या में काफी इजाफा देखने को मिला है. India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में लक्षद्वीप जाने वाले पर्यटकों की संख्या सिर्फ़ 3,875 थी जो 2024 में बढ़कर 68,328 हो गई. पर्यटकों की संख्या में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी PM मोदी की यात्रा के बाद देखी गई.

लक्षद्वीप में शराबबंदी पर ज्यादा टैक्स

लक्षद्वीप से शराबबंदी तो हटा ली गई है, लेकिन वहां बेची जाने वाली शराबों पर ज्यादा टैक्स रखा गया है. भारत में बनी विदेशी शराब यानी IMFL और विदेशी शराब पर एक्साइज ड्यूटी 400%, बीयर पर 200% और वाइन पर 80% तय की गई है. जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली मेंIMFL बीयर, वाइन और इंपोर्टेड विदेशी शराब पर 25% VAT लगता है.

देश में कहां-कहां लागू है शराबबंदी?

लक्षद्वीप को छोड़कर बिहार, गुजरात, नगालैंड और मिजोरम में फिलहाल शराबबंदी कानून लागू है. बिहार में साल 2016 से पूर्ण शराबबंदी है. यहां शराब की खरीब-बिक्री और सेवन पर पाबंदी है. वहीं, गुजरात में 1960 से लगभग पूर्ण शराबबंदी लागू है, लेकिन विशेष परमिट के साथ वहां सीमित छूट भी दी गई है. उधर, नगालैंड में साल 1989 से शराबबंदी कानून लागू है. मिजोरम की बात की जाए तो यहां कई बार नियमों में बदलाव हुआ है. फिलहाल यहां शराब की बिक्री और सेवन पर कड़े प्रतिबंध लागू हैं.

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