
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
भारत में लिव-इन रिलेशनशिप गैर कानूनी नहीं है. कपल किसी भी जेंडर का हो सकता है, लेकिन उनकी उम्र 18 साल से ज्यादा होनी चाहिए. बिना किसी दबाव के दोनों की आपसी सहमति होनी चाहिए. लिव-इन में रहने वाले कपल की जिंदगी में उनके माता-पिता समेत कोई दखल नहीं कर सकता है. भारत के संविधान, 1950 के अनुच्छेद 21 के तहत लिव-इन जोड़ों को जीवन का अधिकार है.
आइए समझते हैं भारत में लिव इन कपल को मिले हैं कौन से अधिकार? उत्तराखंड ने UCC में इसे क्यों शामिल किया? क्या लिव इन रिलेशन में पैदा हुए बच्चे को पिता की संपत्ति में बराबर का हक मिलता है:-
लिव इन रिलेशन को लेकर क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट?
2010 में लिव इन रिलेशनशिप को लेकर सुप्रीम कोर्ट का एक ऐतिहासिक फैसला आया था. डी. वेलुसामी VS डी. पचैअम्माल के मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर कोई महिला लंबे समय से रिलेशनशिप में साथ रह रही है, तो वह हिंदू मैरिज एक्ट के मुताबिक CRPC-125 में क्लेम कर सकती है. क्रिमिनल लॉ में बदलाव के बाद अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के सेक्शन 144 में मेंटेनेंस के प्रावधान आते हैं. इसके साथ ही घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 की धारा 2 (F) में भी लिव इन रिलेशन को जोड़ा गया था. यानी लिव इन में रह रहे जोड़े भी घरेलू हिंसा की रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं. लिव इन रिलेशन के लिए एक कपल को पति-पत्नी की तरह एक साथ रहना होगा, लेकिन इसके लिए कोई टाइम लिमिट नहीं है.
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क्या लिव इन रिलेशन के दौरान पैदा हुए बच्चे को पिता की संपत्ति में हक मिलेगा?
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत ऐसे बच्चों को पिता की स्व-अर्जित संपत्ति पर अधिकार हो सकता है. अगर संपत्ति पूर्वजों से विरासत में मिली हो, तो बच्चा उसके हिस्से के लिए भी दावेदारी पेश कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कई बार कहा है कि अगर लिव-इन रिलेशनशिप लंबे समय तक स्थायी और सार्वजनिक रूप से मान्य रही है, तो उसमें पैदा हुए बच्चे को वैध माना जाएगा. ऐसे में वह बच्चा पिता की संपत्ति में हकदार हो सकता है, लेकिन यह अधिकार संपत्ति के प्रकार और परिस्थितियों पर निर्भर करता है.
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