लिव-इन कपल से हुए बच्चे को क्या पिता की पुश्तैनी संपत्ति में मिलेगा हक? क्या गहनों का भी होता है बंटवारा? जान लें ये कानून

लिव-इन का मतलब आमतौर पर शादी किए बिना लड़का-लड़की का पति-पत्नी की तरह साथ रहना होता है. कपल किसी भी जेंडर का हो सकता है. यानी अगर कोई लड़का-लड़की, लड़का-लड़का या लड़की-लड़की अपनी मर्जी से साथ रहना चाहे, तो रह सकते हैं. उनकी उम्र 18 साल से ज्यादा होनी चाहिए.

Published date india.com Published: December 19, 2025 8:58 PM IST
लिव-इन कपल से हुए बच्चे को क्या पिता की पुश्तैनी संपत्ति में मिलेगा हक? क्या गहनों का भी होता है बंटवारा? जान लें ये कानून
2010 में लिव इन रिलेशनशिप को लेकर सुप्रीम कोर्ट का एक ऐतिहासिक फैसला आया था.

भारत में लंबे समय तक भारतीय संस्कृति के मुताबिक शादी से पहले लड़का-लड़की का साथ रहना अपराध माना जाता था. पहले हिंदू धर्म में ‘एकपत्नी व्रत’ को शादी के सबसे पवित्र रूपों में से एक माना जाता था. अब समय के साथ लोगों में बदलाव आया है. वे कुछ अन्य प्रथाओं को भी स्वीकार करने लगे हैं. लिव-इन रिलेशनशिप इसकी का उदाहरण है. भारत के संविधान, 1950 के अनुच्छेद 21 के तहत लिव-इन जोड़ों को जीवन का अधिकार है.

आइए समझते हैं भारत में लिव इन कपल को मिले हैं कौन से अधिकार? उत्तराखंड ने UCC में इसे क्यों शामिल किया? क्या लिव इन रिलेशन में पैदा हुए बच्चे को पिता की संपत्ति में बराबर का हक मिलता है:-

लिव-इन रिलेशनशिप क्या है?
लिव-इन का मतलब आमतौर पर शादी किए बिना लड़का-लड़की का पति-पत्नी की तरह साथ रहना होता है. कपल किसी भी जेंडर का हो सकता है. यानी अगर कोई लड़का-लड़की, लड़का-लड़का या लड़की-लड़की अपनी मर्जी से साथ रहना चाहे, तो रह सकते हैं. उनकी उम्र 18 साल से ज्यादा होनी चाहिए. बिना किसी दबाव के दोनों की आपसी सहमति होनी चाहिए. लिव-इन में रहने वाले कपल की जिंदगी में उनके माता-पिता समेत कोई दखल नहीं रहता है. लिव इन रिलेशन के लिए एक कपल को पति-पत्नी की तरह एक साथ रहना होगा, लेकिन इसके लिए कोई टाइम लिमिट नहीं है.

लिव इन रिलेशन को लेकर क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट?
2010 में लिव इन रिलेशनशिप को लेकर सुप्रीम कोर्ट का एक ऐतिहासिक फैसला आया था. डी. वेलुसामी VS डी. पचैअम्माल के मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर कोई महिला लंबे समय से रिलेशनशिप में साथ रह रही है, तो वह हिंदू मैरिज एक्ट के मुताबिक CRPC-125 में क्लेम कर सकती है. क्रिमिनल लॉ में बदलाव के बाद अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के सेक्शन 144 में मेंटेनेंस के प्रावधान आते हैं. इसके साथ ही घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 की धारा 2 (F) में भी लिव इन रिलेशन को जोड़ा गया था. यानी लिव इन में रह रहे जोड़े भी घरेलू हिंसा की रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं.

क्या लिव इन रिलेशन के दौरान पैदा हुए बच्चे को पिता की संपत्ति में हक मिलेगा?
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत ऐसे बच्चों को पिता की स्व-अर्जित (Self Own Property) संपत्ति पर अधिकार मिलेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कई बार कहा है कि अगर लिव-इन रिलेशनशिप लंबे समय तक स्थायी और सार्वजनिक रूप से मान्य रही है, तो उसमें पैदा हुए बच्चे को वैध माना जाएगा. ऐसे में वह बच्चा पिता की संपत्ति में हकदार हो सकता है.

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क्या पिता की पुश्तैनी संपत्ति में हिस्सा मिलेगा?
नियमों के तहत लिव-इन रिलेशनशिप के मेल पार्टनर को संपत्ति पूर्वजों से विरासत में मिली हो, तो बच्चा उसके हिस्से के लिए भी दावेदारी पेश कर सकता है. लेकिन, यह अधिकार संपत्ति के प्रकार और परिस्थितियों पर निर्भर करता है.

लिव-इन कपल की बेटी को पुश्तैनी गहनों में हक मिलेगा?
सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों के मुताबिक, लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुई बेटी को भी पिता की पैतृक संपत्ति और गहनों में बराबर का अधिकार मिलेगा. ये ठीक वैसे ही जैसे शादीशुदा जोड़े की बेटी को मिलता है; लेकिन अगर पिता अपनी वसीयत में उसे शामिल न करें, तो कोई हक नहीं बनेगा.

उत्तराखंड सरकार ने UCC में लिव-इन-कपल के लिए बनाए हैं ये नियम

  • उत्तराखंड यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC लागू करने वाला देश का पहला राज्य है.
  • उत्तराखंड में BJP सरकार ने अपने UCC में लिव-इन-रिलेशनशिप को मैरिज की तरह ही ट्रीट किया है और कुछ नियम बनाए हैं.
  • नियमों के तहत उत्तराखंड में रह रहे किसी भी राज्य के युवाओं को लिव-इन में रहने के लिए रजिस्ट्रार के सामने स्टेटमेंट देना जरूरी होगा.
  • अगर उत्तराखंड राज्य का कोई युवा राज्य के बाहर लिव-इन में रहता है, तो उसे उस राज्य में रजिस्ट्रार के सामने इसका स्टेटमेंट पेश करना होगा.
  • अगर लिव-इन में रहते हुए बच्चे का जन्म होता है, तो उस बच्चे को वैध संतान माना जाएगा.
  • रजिस्‍टर्ड लिव-इन पार्टनर्स को रिलेशन खत्‍म करने के लिए भी रजिस्‍ट्रार से परमिशन लेनी होगी.
  • लिव-इन पार्टनर्स के आवेदन की जांच करने के बाद रजिस्‍ट्रार इसे टर्मिनेट करेंगे.
  • इसमें लड़की को मेंटेनेंस मांगने का भी अधिकार होगा, जिसके लिए लड़की अदालत में अपील कर सकेगी.

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