इस बार जलेगा और सूखे की मार झेलेगा भारत, मॉनसून पर मंडरा रहा ‘सुपर अल नीनो’ का खतरा

दुनियाभर के वैज्ञानिक 1997 और 2015 जैसे विनाशकारी अल नीनो वर्षों से तुलना कर रहे हैं. कुछ अंतरराष्ट्रीय मॉडल तो यह तक कह रहे हैं कि यह दशक का सबसे ताकतवर अल नीनो साबित हो सकता है.

Written by: Anjali Karmakar
Updated: May 15, 2026, 10:15 PM IST

देश के कई हिस्सों में मार्च के आखिर से ही शुरू हुई भीषण गर्मी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं. मई में तो तापमान लगातार नए रिकॉर्ड छू रहा है. इस बीच मॉनसून के दस्तक देने की डेट भी आ चुकी है. लेकिन, मौसम वैज्ञानिक एक नई चिंता जता रहे हैं. प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ती गर्मी को देखते हुए दुनियाभर की मौसम एजेंसियां आशंका जता रही हैं कि 2026 में एक मजबूत अल नीनो विकसित हो सकता है इसक असर भारत के मॉनसून, खेती और पानी के संकट पर पड़ सकता है.

क्या होता है अल नीनो?
अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्री सतह के असामान्य रूप से गर्म होने की स्थिति है. जब यह सामान्य से ज्यादा ताकतवर हो जाता है, तो उसे ‘सुपर अल नीनो’ कहा जाता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसी स्थिति दुनिया के मौसम चक्र को पूरी तरह बदल सकती है.

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मॉनसून पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
भारत में इसका सबसे बड़ा असर मॉनसून पर पड़ता है, क्योंकि देश की करीब 70% बारिश दक्षिण-पश्चिम मॉनसून से होती है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सुपर अल नीनो मजबूत हुआ, तो अगस्त और सितंबर में बारिश सामान्य से कम हो सकती है.

सूखे की मार झेलेंगे ये राज्य
रिपोर्ट के मुताबिक, सुपर अल नीनो एक्टिव होने से उत्तर भारत, पश्चिम भारत और मध्य भारत के कई इलाके सूखे जैसी स्थिति का सामना कर सकते हैं. पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली-NCR और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी और पानी का संकट गहरा सकता है.

खरीफ फसलों को हो सकता है नुकसान
सुपर अल नीनो का असर कृषि क्षेत्र पर सबसे ज्यादा पड़ने की आशंका है. भारत के लाखों किसान खरीफ फसलों के लिए मॉनसून पर निर्भर रहते हैं. अगर बारिश कम हुई तो धान, सोयाबीन, मक्का और दालों की पैदावार प्रभावित हो सकती है. इससे खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है.

पैदा हो सकता है स्वास्थ्य संकट
एक्सपर्ट यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि सुपर अल नीनो सिर्फ गर्मी ही नहीं बढ़ाएगा, बल्कि स्वास्थ्य संकट भी पैदा कर सकता है. लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव, डिहाइड्रेशन, हीटस्ट्रोक और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं.

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भारत में कब आएगा मॉनसून?
मौसम विभाग ने शुक्रवार को बताया कि मॉनसून केरलम में 26 मई को दस्तक दे सकता है. आमतौर पर मॉनसून 1 जून के आसपास केरल पहुंचता है, फिर देश के दूसरे हिस्सों को कवर करने के लिए उत्तर की ओर बढ़ता है. इस बार ये 5 दिन पहले आ सकता है. पिछले साल मॉनसून 24 मई को आया था.

जल्दी मॉनसून आना अच्छी बारिश की गारंटी नहीं
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने संकेत दिए हैं कि मॉनसून समय से पहले केरल पहुंच सकता है, लेकिन सिर्फ जल्दी आने से अच्छी बारिश की गारंटी नहीं मानी जाती. वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर प्रशांत महासागर का तापमान लगातार बढ़ता रहा, तो मॉनसून कमजोर पड़ सकता है. इसी वजह से सरकारें, स्वास्थ्य एजेंसियां और कृषि विशेषज्ञ पहले से तैयारी की सलाह दे रहे हैं.

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