
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
पाकिस्तान भारत को आंख दिखाने की हिमाकत तो खूब करता है. उसके प्रधानमंत्री, मंत्री, छिटपुट नेता और यहां तक कि मौलाना भी बड़बोले बयान देते रहते हैं. लेकिन, हकीकत ये है कि पाकिस्तान कर्ज के जाल में डूबता जा रहा है. उसकी पब्लिक प्रॉपर्टी गिरवी रखी हुई है. पाकिस्तान के हर बंदे पर औसतन 3 लाख रुपये से ज्यादा का कर्जा चढ़ चुका है. यह आंकड़ा किसी विरोधी देश का नहीं, बल्कि पाकिस्तान सरकार की खुद की इकोनॉमिक सर्वे 2024-25 का है. अपने खर्चे चलाने के लिए पाकिस्तान कभी तुर्किये से मदद मांगने लगता है, तो कभी अमेरिका और चीन की जी हजूरी करने लगता है. IMF से इतनी लताड़ लगती है, लेकिन इसे पाकिस्तान की बेशर्मी कहे या लाचारी… ये हर बार IMF के सामने अपना ‘कटोरा‘ रख देता है.
इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड यानी IMF ने इस बार भी पाकिस्तान के कटोरे में पैसे डाले हैं, लेकिन साथ में 11 शर्तें भी रख दी हैं. इन शर्तों के बाद पाकिस्तान के पास भले ही लोन आ जाए, लेकिन वो चाहकर भी कुछ काम नहीं कर पाएगा.
IMF ने 1.2 बिलियन डॉलर के फंड को दी मंजूरी
दरअसल, इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) ने पाकिस्तान को आर्थिक संकट से उबरने के लिए 1.2 बिलियन डॉलर (करीब 11 हजार करोड़ रुपये) के फंड को मंजूरी दी है. पाकिस्तान को यह फंडिंग 2024 में मिले एक बेलआउट प्रोग्राम का हिस्सा है, जो 37 महीनों तक चलेगा. इसमें किस्तों में उसे कुल 7 बिलियन डॉलर दिए जाने हैं. यह उसकी तीसरी किस्त है, जो पिछली यानी दूसरी किस्त के रिव्यू के बाद अप्रूव हुई है. IMF की दूसरी रिव्यू रिपोर्ट गुरुवार को सामने आई, जिसमें पाकिस्तान को 11 नई शर्तें पूरी करने को कहा गया है. ये शर्तें 7 अरब डॉलर के बेलआउट प्रोग्राम से जुड़ी हैं.
Express Tribune की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल से अब तक पाकिस्तान को IMF से कुल 3.3 अरब डॉलर (29.65 हजार करोड़ रुपए) मिल चुके हैं. अब पूरे प्रोग्राम के दौरान पाकिस्तान पर कुल 64 नियम और शर्तें लागू हो जाएंगी. शहबाज सरकार को इन शर्तों को 18 महीनों में पूरा करना होगा. इनमें से 11 शर्तें बेहद सख्त हैं. हम आपको इन 11 शर्तों के बारे में बता रहे हैं:-
1.सिविल सर्वेंट्स को देनी होगी संपत्ति की पूरी डिटेल
नई शर्तों में अहम मांग यह है कि हाई लेवल के फेडरल सिविल सर्वेंट्स को अपनी संपत्ति की पूरी डिटेल सरकारी वेबसाइट पर डालनी होगी. इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करना अनिवार्य है. IMF का कहना है कि इससे इनकम और संपत्ति के बीच अंतर पकड़ने में मदद मिलेगी.
2. सरकारी विभागों के लिए एक्शन प्लान
IMF ने पाकिस्तान को कहा है कि अक्टूबर 2026 तक 10 ऐसे सरकारी विभागों के लिए एक्शन प्लान जारी किया जाए जहां भ्रष्टाचार का खतरा सबसे ज्यादा है. इन विभागों की पहचान पहले ही रिस्क असेसमेंट के जरिए की जा चुकी है. इन योजनाओं का Coordination नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) करने वाला है.
3. विदेशी रेमिटेंस की लागत की पूरी समीक्षा
IMF ने पाकिस्तान को मई 2026 तक विदेशी रेमिटेंस की लागत की पूरी समीक्षा करने को कहा है. इसके साथ क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट में आने वाली रुकावटों पर एक ठोस एक्शन प्लान भी बनाने को कहा है. IMF का अनुमान है कि आने वाले सालों में रेमिटेंस की लागत बढ़कर 1.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है. इसका मतलब है कि पाकिस्तान लोन मिलने के बाद भी चाहकर भी टेरर फंडिंग नहीं कर पाएगा.
4. लोकल करेंसी बॉन्ड मार्केट का रिव्यू
IMF की एक और शर्त के तहत पाकिस्तान को सितंबर 2026 तक यह जांच करनी होगी, लोकल करेंसी बॉन्ड मार्केट के विकास में कौन-कौन सी बाधाएं हैं. इसके बाद सरकार को इसपर सुधार करने के एक रणनीति बनानी होगी. उस योजना को सार्वजनिक करना होगा.
5. फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू में सुधार
पाकिस्तान के फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (FBR) की कार्य करने की क्षमता पर IMF लंबे समय से सवाल उठा रहा है. अब सरकार को दिसंबर 2025 तक FBR सुधारों का पूरा रोडमैप तैयार करना है. इसमें स्टाफ की जरूरत, समय-सीमा, लक्ष्य, expected revenue और performance indicators शामिल होंगे.
6. टैक्स रिफॉर्म स्ट्रैटेजी
IMF ने यह भी साफ किया है कि दिसंबर 2026 तक पाकिस्तान को एक मीडियम-टर्म टैक्स रिफॉर्म स्ट्रैटेजी जारी करनी होगी. इसमें टैक्स पॉलिसी, टैक्स एडमिनिसट्रेशन, कानूनी बदलाव, गवर्नेंस और संसाधनों की पूरी रूपरेखा शामिल शामिल होनी चाहिए.
7. बिजली क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने की शर्त
IMF ने बिजली क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने की भी शर्त रखी है. अगले बजट से पहले सरकार को HESCO और SEPCO में प्राइवेट सेक्टर की एंट्री के लिए आधार तैयार करना होगा. साथ ही देश की सात सबसे बड़ी बिजली कंपनियों के साथ पब्लिक सर्विस ऑब्लिगेशन एग्रीमेंट को पूरा करना होगा. कंपनियों के नियमों को सख्त बनाने के लिए Companies Act 2017 में संशोधन संसद में पेश करना पड़ेगा.
8. मिनी बजट लाने की शर्त
IMF रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि अगर दिसंबर 2025 तक रिवेन्यू टारगेट पूरा नहीं होता, तो पाकिस्तान को मिनी बजट लाना होगा. इसमें उर्वरक और कीटनाशकों पर 5 फीसदी एक्साइज ड्यूटी बढ़ाना, महंगे मीठे उत्पादों पर नया टैक्स लगाना और ज्यादा वस्तुओं को स्टैंडर्ड सेल्स टैक्स स्लैब में लाना जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं.
9. कॉर्पोरेट कानून में बदलाव
IMF ने आदेश दिया है कि पाकिस्तान में कंपनी अधिनियम और विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) अधिनियम में संशोधन किए जाने चाहिए.
10. शुगर माफिया का राज खत्म करने पर जोर
IMF का मानना है कि इस्लामाबाद को चीनी बाजार को मुक्त करने के लिए एक राष्ट्रीय नीति विकसित करनी होगी. यह वो बाजार है जिस पर राजनीतिक रूप से जुड़े व्यापारिक समूहों का लंबे समय से दबदबा रहा है.
11. विदेश से पैसा भेजने पर कटौती
IMF की शर्तों के मुताबिक नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) सबसे कमजोर एजेंसियों के लिए एक्शन प्लान के समन्वय का काम करेगा.
पाकिस्तान पर 8.25 लाख करोड़ का विदेशी कर्ज
जुलाई 2025 तक पाकिस्तान पर कुल 80.6 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (25.66 लाख करोड़) का कर्ज है. इसमें घरेलू यानी देश के अंदर से लिया गया कर्ज 54.5 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (भारतीय रुपये में 17.41 लाख करोड़) और विदेशी कर्ज 26 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (भारतीय रुपये में 8.25 लाख करोड़) है.
अमेरिका की मर्जी के बिना कोई फैसला नहीं ले सकता IMF
आपको बता दें कि IMF में 191 सदस्य देश हैं. सबके पास एक-एक वोट का अधिकार है, लेकिन वोट की वैल्यू अलग-अलग है. अमेरिका के पास सबसे ज्यादा 16.5% वोटिंग राइट्स हैं. IMF में कोई भी फैसला लेने के लिए 85% वोट की जरूरत होती है. ऐसे में साफ है कि पाकिस्तान को लोन देने के फैसले में अमेरिका की मंजूरी मिली है. अगर अमेरिका वोट न करे तो सबका मिलाकर 83.5% वोट ही होगा, जो बहुमत के लिए पर्याप्त नहीं है.
निष्कर्ष
IMF की ये शर्तें पाकिस्तान में ऊंचे-ऊंचे पदों पर बैठे ‘रिश्वतखोरों’ और जिन्ना के देश में जमा किए जा रहे काले धन को निशाना बनाती हैं. ऐसे में इसे जाहिर तौर पर आतंकवादियों की फंडिंग का अहम सोर्स माना जाता है. इसलिए IMF ने पाकिस्तान पर ये नकेल कसी है, ताकि टेरर फंडिंग पर रोक लगे और पैसों का दुरुपयोग न हो पाए.
FAQs
पाकिस्तान के हर नागरिक पर अमूमन कितना कर्ज होगा?
जून 2025 तक पाकिस्तान का कुल सार्वजनिक कर्ज 286.832 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 80.6 ट्रिलियन रुपये) हो गया है. इस हिसाब से हर नागरिक पर औसतन 3 लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज होगा. नवंबर 2025 तक पाकिस्तान की आबादी 249 मिलियन से 255 मिलियन (करीब 24.9 करोड़ से 25.5 करोड़) के बीच रहने का अनुमान है.
IMF में कितना है भारत का वोट कोटा?
IMF में भारत का वोट कोटा 2.75%. ये सदस्य देशों की तुलना में काफी कम है. जबकि पाकिस्तान का वोट कोटा महज 0.43% है. भारत का एक अलग (स्वतंत्र) प्रतिनिधि होता है, जो भारत की तरफ से IMF में अपनी बात रखता है.
SDR क्या होता है?
स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स यानी SDR, IMF का बनाया एक इंटरनेशनल रिजर्व एसेट है. इसे ‘IMF की इंटरनेशनल करेंसी’ या ‘ग्लोबल करेंसी यूनिट’ कहा जाता है.
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