संसद में दो-तिहाई बहुमत क्यों जोड़ रही है सरकार? पास कराने हैं कौन से 4 बिल, TMC-शिवसेना UBT के बाद क्या इन छोटे दलों का मिलेगा साथ
विपक्षी दलों में लगातार हो रही इस टूट-फूट से संसद में NDA की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति और मजबूत होती दिखाई दे रही है. क्योंकि, इससे NDA संसद में दो-तिहाई बहुमत की स्थिति के बेहद करीब पहुंच रहा है.
2024 के लोकसभा चुनाव में BJP को 240 सीटें मिली. (PTI)
- TMC के 20 सांसदों का NCPI में विलय.
- लोकसभा में NCPI करती है NDA को सपोर्ट.
- शिवसेना UBT के 6 सांसद भी शिंदे गुट में होंगे शामिल.
- जुलाई में शुरू होगा संसद का मानसून सेशन.
देश के विपक्षी खेमे में इन दिनों भारी राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिल रही है. इसकी शुरुआत पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) में टूट से हुई. राघव चड्ढा समेत 7 सांसद BJP में शामिल हो गए. फिर पश्चिम बंगाल का नंबर आया. ममता बनर्जी की पार्टी TMC को बड़े झटके का सामना करना पड़ा. पार्टी के 80 में से 58 विधायक अलग हो गए, जबकि लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने बगावत कर त्रिपुरा की अपेक्षाकृत छोटी पार्टी नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया. अब महाराष्ट्र में भी उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 6 सांसद बागी हो गए हैं. विपक्षी दलों में लगातार हो रही इस टूट-फूट से संसद में NDA की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति और मजबूत होती दिखाई दे रही है. क्योंकि, इससे NDA संसद में दो-तिहाई बहुमत की स्थिति के बेहद करीब पहुंच रहा है.
आइए जानते हैं आखिर विपक्षी खेमे में मची इस भगदड़ के BJP के लिए क्या मायने है? BJP और NDA को लोकसभा और राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत क्यों चाहिए? कौन से 4 बिल हैं, जिन्हें पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है? क्या NDA विपक्षी खेमे में टूट से दो-तिहाई बहुमत जोड़ लेगी?
सरकार कौन से 4 बिल पास कराना चाहती है?
पहला बिल– संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 लेकर आई है. इसके तहत राज्यों से 815 और केंद्र शासित प्रदेश से 35 सीटें हो सकती हैं.
दूसरा बिल– परिसीमन (संशोधन) विधेयक 2026 है. परिसीमन के लिए जनसंख्या की परिभाषा में बदलाव किया जाएगा, ताकि2011 की जनगणना को आधार बनाया जाए.
तीसरा बिल- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 है. ये विधेयक पुडुचेरी, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन करता है, ताकि परिसीमन और महिला आरक्षण को लागू किया जा सके.
चौथा बिल: दिसंबर 2024 में केंद्र सरकार 'वन नेशन-वन इलेक्शन' बिल संसद में लेकर आई थी. विपक्ष के हंगामे के बाद इसे ज्वॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) को भेज दिया गया था. संसद के इस मॉनसून सेशन में सरकार ये चारों बिल दोबारा पेश कर सकती है.
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ये पहले क्यों पास नहीं हो पाए?
17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में करीब 21 घंटे की चर्चा के बाद महिला आरक्षण बिल पर वोटिंग हुई थी. इस बिल के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े. लोकसभा में मौजूद कुल 528 सांसदों ने वोट डाले. बिलों को पास कराने के लिए कुल सदस्य संख्या का दो-तिहाई बहुमत यानी 360 वोटों की जरूरत थी. लेकिन, संसद के कुल 540 सदस्यों (543 में 3 सीट खाली है) में से सिर्फ 528 ही मौजूद थे. इसका दो-तिहाई 352 होता है. इस तरह बहुमत नहीं मिलने से ये बिल पास 54 वोट से गिर गया था. पहला बिल गिरने के बाद सरकार ने बाकी दोनों बिलों पर वोटिंग ही नहीं कराई. जबकि, वन नेशन-वन इलेक्शन बिल JPC के पास है.
अभी लोकसभा में क्या है NDA का नंबर गेम?
2024 के लोकसभा चुनाव में BJP को 240 सीटें मिली. NDA में चंद्रबाबू नायडू की TDP के 16, नीतीश कुमार की पार्टी JDU के 12, शिवसेना (शिंदे गुट) के 7, LJP (राम विलास) के 5 सीटें आईं. अन्य दलों के 12 सांसदों ने भी NDA को सपोर्ट किया. कुल मिलाकर नंबर 292 होता है, जो बहुमत के आंकड़ें से 10 नंबर ज्यादा है. वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन INDIA के पास 233 सांसद हैं. इसमें कांग्रेस के अकेले 90 सांसद हैं. 14 सांसद ऐसे हैं, जो किसी गठबंधन के साथ नहीं हैं.
राज्यसभा में NDA के साथ कितने सांसद?
राज्यसभा की कुल 244 सीटों में से NDA के पास शुरू में 138 सांसद थे. 24 अप्रैल को AAP के 7 राज्यसभा सांसदों ने BJP में विलय कर लिया. इससे BJP की अकेले की संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गई. ऐसे में NDA के नंबर 145 हो गए हैं. फिर 11 जून को 12 राज्यसभा सीटों पर BJP के उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं. ऐसे में BJP के नंबर बढ़कर 125 हो गए हैं. NDA में भी 157 हो गए हैं.
विपक्षी दलों में टूट से कितना बदल सकता है संसद का नंबर गेम?
- 14 जून को TMC नेता काकोली घोष दस्तीदार समेत लोकसभा 20 सांसद NDA समर्थित नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी से जुड़ गए. इससे लोकसभा में BJP का नंबर 292 से बढ़कर 312 हो गया है.
- फिर महाराष्ट्र में उद्धव गुट 9 में से 6 लोकसभा सांसद भी NDA के सहयोगी दल शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो सकते हैं. ऐसे में NDA की संख्या 318 हो जाएगा.
- दूसरी ओर, राज्यसभा में TMC के 4 सांसद इस्तीफा दे दिया है. इन सीटों पर उपचुनाव होंगे. उम्मीद है कि BJP ये सीटें जीत ले. ऐसे में आंकड़ा बढ़कर 154 हो सकता है.
क्या इससे BJP-NDA दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लेगी?
इतना कुछ होने के बाद भी मोदी सरकार लोकसभा में दो-तिहाई के आंकड़े से 44 सीटें दूर रहेगी. राज्यसभा में 10 सीटों की जरूरत पड़ेगी. ऐसे में NDA को अभी भी छोटे दलों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी.
NDA की मदद कर सकते हैं कौन से छोटे दल?
- अब दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए तमिलनाडु की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और झारखंड की झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), ओडिशा की बीजू जनता दल (BJD) और आंध्र प्रदेश की YSR कांग्रेस ही NDA का सहारा हैं.
- लोकसभा में फिलहाल DMK के 22 और JMM के 3 सांसद हैं. JMM अभी विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक का हिस्सा है.
- तमिलनाडु में कांग्रेस-DMK का गठबंधन टूट चुका है, क्योंकि कांग्रेस ने अपने 5 विधायकों के साथ थलपति विजय की सरकार बनाने में मदद की थी. हालांकि, नेशनल लेवल पर DMK ने अभी तक INDIA से अलग होने को लेकर कोई ऑफिशियल बयान नहीं दिया है.
- ऐसे में अगर DMK औैर JMM के सांसद सरकार का समर्थन कर दें, तो NDA का आंकड़ा 343 तक पहुंच जाएगा. फिर भी ये नंबर दो-तिहाई बहुमत से 19 सीट कम पड़ेगा.
फिर क्या रास्ता निकल सकता है?
- अगर विपक्ष के ये सांसद महिला आरक्षण बिल समेत 4 बिल के पेश होने और वोटिंग के दिन सदन में गैर-हाजिर रहे, तो NDA का भला हो जाएगा. क्यों गैर-हाजिर सांसदों के चलते दो-तिहाई का आंकड़ा नीचे आ जाएगा. संभव है कि आंकड़ा 343 या इससे भी नीचे चला जाए. ऐसा हुआ तो सरकार सारे बिल पास करा सकती है.
- वहीं, राज्यसभा में NDA को ओडिशा की बीजू जनता दल (BJD) और आंध्र प्रदेश की YSR कांग्रेस का साथ चाहिए. संसद के उच्च सदन में YSR कांग्रेस के 4 और BJD के 5 सांसद हैं. अगर इनमें से कुछ सांसद NDA को समर्थन दे दें, तो सरकार 10 सीटों का फासला पूरा कर लेगी.
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
सीनियर जर्नलिस्ट रशीद किदवाई ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, "देश में 200-250 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस का वोट शेयर महज 4-5% है. ऐसे में 2029 में कांग्रेस को सीटें जीतने के लिए क्षेत्रीय दलों और छोटी पार्टियों की जरूरत पड़ेगी. लिहाजा BJP पहले से ही इन पार्टियों का साथ पाने की कोशिश करेगी."
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