20 जुलाई से संसद का महासंग्राम! विपक्ष की 3 पार्टियों में हुई टूट, फिर भी मैजिक नंबर नहीं जोड़ पाई सरकार,कैसे पास हो पाएंगे ये बिल

Written By: Anjali Karmakar Updated by: Anjali Karmakar
Updated Date:July 17, 2026 11:37 PM IST

मोदी सरकार ने 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक चलने वाले संसद के मानसून सत्र का एजेंडा बता दिया है. इस दौरान कुल 7 बिल पेश किए जाने हैं, जिनमें 5 नए बिल हैं. हैरानी की बात ये है कि लिस्ट में ‘परिसीमन बिल’ का जिक्र नहीं है.

  • TMC के 20 सांसदों का NCPI में हुआ विलय.
  • शिवसेना UBT के 9 में से 6 सांसद हुए बागी.
  • अप्रैल में महिला आरक्षण बिल नहीं हो पाया था पास.
  • लोकसभा में BJP के पास 240 कांग्रेस के पास 99 सीटें.
संसद का मानसून सत्र सोमवार यानी 20 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रहा है. 13 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र में मोदी सरकार कई बड़े विधेयकों और संवैधानिक संशोधनों को पारित कराने की तैयारी में है. दूसरी तरफ, विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए महंगाई, बेरोजगारी, NEET पेपर लीक, एजुकेशन पॉलिसी, राम मंदिर चढ़ावा चोरी और अन्य कई मुद्दों पर रणनीति बना ली है. न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, संसद का मानसून सत्र 25 दिनों तक चलेगा और कुल 19 बैठकें होंगी. इस दौरान NDA सरकार लोकसभा में 7 बिल पेश करेगी. इनमें से 2 पुराने और 5 नए बिल हैं. हैरानी की बात ये है कि लिस्ट में परिसीमन बिल’ और 'महिला आरक्षण बिल' का जिक्र नहीं है.
विपक्ष की 3 पार्टियों AAP, TMC और शिवसेना (UBT) में बड़ी टूट के पीछे परिसीमन बिल भी एक वजह मानी जा रही थी, क्योंकि सरकार को ये बिल पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जोड़ने थे. इन बगावत के बाद विपक्षी पार्टियों के ये सांसद NDA में शामिल भी हुए हैं, इसके बाद भी सरकार ने एजेंडे में परिसीमन बिल और महिला आरक्षण बिल को क्यों शामिल नहीं किया, ये बड़ा सवाल है.
आइए समझते हैं कि क्या विपक्ष में टूट के बाद भी NDA सरकार मैजिक नंबर यानी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाई है? क्या परिसीमन बिल और महिला आरक्षण बिल को ठंडे बस्ते में डाल दिया जा रहा है या सरकार कुछ बड़ा प्लान कर रही है? सरकार के एजेंडे में शामिल 7 बिलों को पास कराने के लिए कितने वोट चाहिए?

NDA सरकार कौन-कौन से बिल लाएगी?

1. फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) संशोधन बिल, 2026: इस बिल में विदेशी फंड के इस्तेमाल पर सख्त निगरानी का प्रावधान है. इस बिल में विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संगठनों (NGO) का रजिस्ट्रेशन खत्म होने पर संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण का प्रावधान भी है. इसके लिए अलग अथॉरिटी बनाई जाएगी.
2. राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026: ये बिल जन गण मन की हर तरह की प्रस्तुति को कानूनी संरक्षण देने के लिए लाया गया है. इसके तहत अपमान, अनादर या गायन में बाधा डालना अपराध माना जाएगा.
3. विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025: इस बिल के तहत UGC, AICTE और NCTE की जगह एक नया रेगुलेटर अथॉरिटी बनाने की बात की गई है. राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों (INI) को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा.
4. इनकम टैक्स (संशोधन) विधेयक, 2026: विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
5. सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026: इसमें सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 किए जाने का प्रावधान है. अभी जारी अध्यादेश को कानून का रूप दिया जाएगा.
6. जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026: इसमें 2 साल बाद रजिस्ट्रेशन केवल न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश से ही होगा. DM/SDM की मंजूरी का प्रावधान समाप्त किया जाएगा.
7. माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) डेवलपमेंट संशोधन विधेयक, 2026: समय पर भुगतान न करने वाले खरीदारों को भुगतान संबंधी विवादों के त्वरित निपटारे के लिए राज्यों में MSEFC (Micro & Small Enterprises Facilitation Council) की संख्या बढ़ाई जाएगी.

परिसीमन बिल क्या है और ये पास क्यों नहीं हो पाया था?

  • परिसीमन बिल दो विधेयकों का पैकेज है. इसमें लोकसभा की मैक्सिमम सीटें 550 से बढ़ाकर 850 करने और लोकसभा क्षेत्रों का आकार दोबारा तय करने (परिसीमन) के प्रावधान हैं.
  • महिला आरक्षण बिल भी इसी से जुड़ा हुआ है. इसमें 33% आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन इसेक लिए सीटों का परिसीमन जरूरी है. क्योंकि, इसके बाद ही लोकसभा की सीटें बढ़ेंगी.
  • मोदी सरकार ने 16 से 18 अप्रैल 2026 को संसद का विशेष सत्र बुलाकर ये विधेयक पेश किए थे. तर्क दिया कि 2029 चुनाव तक महिला आरक्षण कानून लागू करने के लिए इन्हें पारित होना जरूरी है.
  • 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में करीब 21 घंटे की चर्चा के बाद महिला आरक्षण बिल पर वोटिंग हुई थी. इस बिल के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े. लोकसभा में मौजूद कुल 528 सांसदों ने वोट डाले.
  • बिलों को पास कराने के लिए कुल सदस्य संख्या का दो-तिहाई बहुमत यानी 360 वोटों की जरूरत थी. लेकिन, संसद के कुल 540 सदस्यों (543 में 3 सीट खाली है) में से सिर्फ 528 ही मौजूद थे. इसका दो-तिहाई 352 होता है.
  • इस तरह बहुमत नहीं मिलने से ये बिल पास 54 वोट से गिर गया था. पहला बिल गिरने के बाद सरकार ने बाकी दोनों बिलों पर वोटिंग ही नहीं कराई.

विपक्ष के किस दल के कितने सांसदों ने छोड़ा साथ?

  • पहले पंजाब में आम आदमी पार्टी में टूट हुई. यहां राघव चड्ढा की अगुवाई में 10 में से 7 सांसदों ने AAP छोड़ दिया और BJP में शामिल हो गए.
  • फिर 14 जून को TMC नेता काकोली घोष दस्तीदार समेत लोकसभा 20 सांसद NDA समर्थित नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी से जुड़ गए. TMC से इस्तीफा दे चुके 4 राज्यसभा सांसद भी BJP में शामिल होकर दोबारा राज्यसभा पहुंच चुके हैं.
  • फिर महाराष्ट्र में उद्धव गुट के 9 में से 6 लोकसभा सांसद भी NDA के सहयोगी दल शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए.

लोकसभा और राज्यसभा में NDA-INDIA के नंबर देखिए

2024 के लोकसभा चुनाव में BJP 240 सीटों पर जीती थी. BJP की लीडरशिप वाले NDA में चंद्रबाबू नायडू की TDP के 16, नीतीश कुमार की पार्टी JDU के 12, शिवसेना (शिंदे गुट) के 7, LJP (राम विलास) के 5 और अन्य दलों के 13 सांसद भी शामिल थे. ये आंकड़ा बहुमत से 20 ज्यादा यानी 292 होता है. विपक्षी गठबंधन INDIA की बात करें, तो कांग्रेस की 99, सपा की 37, TMC की 9, DMK की 22, YSRCP 4, एनसीपी (शरद पवार) 8 समेत कुल 232 सीटें मिलीं.

विपक्ष में टूट के बाद लोकसभा का नंबर गेम कितना बदला?

TMC के 20 सांसदों का साथ मिलने के बाद NDA के 312 नंबर हो गए हैं. शिवसेना उद्धव गुट के 6 सांसदों के आने के बाद नंबर 318 हो गया. लोकसभा में फिलहाल असम की नागांव, पश्चिम बंगाल की बसीरहाट और मेघालय की शिलॉन्ग सीट खाली है. ऐसे में बिलों पर वोटिंग 540 सांसद करेंगे. इसका दो-तिहाई 360 होता है. NDA के नंबर 318 हैं यानी ये मैजिक नंबर से 42 वोट पीछे है.

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राज्यसभा में NDA का गणित समझिए

अप्रैल 2026 में पंजाब से AAP के 7 राज्यसभा सांसद BJP में आए थे. जून में राज्यसभा चुनाव होने के बाद NDA के पास 149 सांसद हैं. BJP के 114 हैं. यानी 245 सीटों वाली राज्यसभा में NDA के पास सामान्य बहुमत से 27 सीटें ज्यादा हैं. TMC छोड़कर BJP में आए सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बरैक निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुन लिए गए हैं. ऐसे में NDA के नंबर 152 हो गए हैं. 16 जुलाई को TMC की सांसद कोयल मलिक ने भी इस्तीफा दे दिया है और BJP से राज्यसभा जा सकती हैं. ऐसा हुआ, तो NDA के 153 नंबर हो जाएंगे. दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 वोट चाहिए. मतलब राज्यसभा में भी NDA 11 वोट पीछे है.

क्या सरकार परिसीमन बिल नहीं लाएगी?

ये कहना जल्दबाजी होगी. क्योंकि, राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है. दो-तिहाई बहुमत नहीं होने के बाद भी सरकार के पास बिल लाने के दूसरे तरीके हैं. संविधान के आर्टिकल 368 के तहत संविधान संशोधन विधेयक पेश करने के लिए राष्ट्रपति की अनुमति नहीं लेनी होती. इसे सरकार का कोई मंत्री या सांसद निजी तौर पर भी संसद सत्र के दौरान पेश कर सकता है. इसके लिए सरकार दांव भी चल रही है. NDA को इसके लिए छोटे दलों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी.

कैसा दांव और कौन से छोटे दल?

  • दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए तमिलनाडु की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और झारखंड की झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), ओडिशा की बीजू जनता दल (BJD) और आंध्र प्रदेश की YSR कांग्रेस ही NDA का सहारा हैं.
  • लोकसभा में फिलहाल DMK के 22 और JMM के 3 सांसद हैं. JMM अभी विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक का हिस्सा है.
  • तमिलनाडु में कांग्रेस-DMK का गठबंधन टूट चुका है, क्योंकि कांग्रेस ने अपने 5 विधायकों के साथ थलपति विजय की सरकार बनाने में मदद की थी. हालांकि, नेशनल लेवल पर DMK ने अभी तक INDIA से अलग होने को लेकर कोई ऑफिशियल बयान नहीं दिया है.
  • ऐसे में अगर DMK औैर JMM के सांसद सरकार का समर्थन कर दें, तो NDA का आंकड़ा 343 तक पहुंच जाएगा. फिर भी ये नंबर दो-तिहाई बहुमत से 19 सीट कम पड़ेगा.

परिसीमन के बाद आपके राज्य में हो जाएंगी कितनी लोकसभा की सीटें? आंकड़े आ गए सामने

फिर क्या रास्ता निकल सकता है?

अगर विपक्ष के ये सांसद वोटिंग के दिन सदन में गैर-हाजिर रहे, तो NDA का भला हो जाएगा. क्यों गैर-हाजिर सांसदों के चलते दो-तिहाई का आंकड़ा नीचे आ जाएगा. संभव है कि आंकड़ा 343 या इससे भी नीचे चला जाए. ऐसा हुआ तो सरकार सारे बिल पास करा सकती है. वहीं, राज्यसभा में NDA को ओडिशा की बीजू जनता दल (BJD) और आंध्र प्रदेश की YSR कांग्रेस का साथ चाहिए. संसद के उच्च सदन में YSR कांग्रेस के 4 और BJD के 5 सांसद हैं. अगर इनमें से कुछ सांसद NDA को समर्थन दे दें, तो सरकार 10 सीटों का फासला पूरा कर लेगी.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

सीनियर जर्नलिस्ट रशीद किदवाई ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “देश में 200-250 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस का वोट शेयर महज 4-5% है. ऐसे में 2029 में कांग्रेस को सीटें जीतने के लिए क्षेत्रीय दलों और छोटी पार्टियों की जरूरत पड़ेगी. लिहाजा BJP पहले से ही इन पार्टियों का साथ पाने की कोशिश करेगी.”

विपक्ष की रणनीति क्या होगी?

विपक्ष पहले दिन से ही सरकार को घेरने की तैयारी में है. महंगाई, बेरोजगारी, परीक्षा घोटाले, शासन व्यवस्था, संवैधानिक संशोधन और परिसीमन जैसे मुद्दों पर सरकार से विस्तृत चर्चा की मांग की जाएगी. साथ ही कई विधेयकों को संसदीय समिति के पास भेजने, संशोधन प्रस्ताव लाने और लंबी बहस कराने की रणनीति भी बनाई जा रही है. 20 जुलाई को विपक्षी दलों की बैठक में पूरे सत्र की संयुक्त रणनीति को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है.
कुल मिलाकर 20 जुलाई से शुरू होने वाला मानसून सत्र केवल कानून बनाने का मंच नहीं होगा, बल्कि यह सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक ताकत की सबसे बड़ी परीक्षा भी साबित हो सकता है.
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