किंग्सवे-राजपथ से होते हुए कर्तव्य पथ तक का सफर, क्या है 3KM लंबी इस सड़क का इतिहास | Explained

Written By: Ikramuddin Saifi Updated by: Ikramuddin Saifi
Updated Date:September 8, 2022 11:02 AM IST

100 Year Old History of Rajpath: भारत की सबसे महत्वपूर्ण सड़कों में शुमार राजपाथ वही है जहां हर साल गणतंत्र दिवस की परेड निकाली जाती है. यहां देश की बड़ी राजनीतिक शख्सियतों के अंतिम संस्कार भी होते रहे हैं.

100 Year Old History of Rajpath: ऐतिहासिक राजपथ (Rajpath) को अब कर्तव्य पथ (Kartavya Path) के नाम से जाना जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुरुवार को नवीनीकृत 'कर्तव्य पथ' और सेंट्रल विस्टा एवेन्यू (Centre Vista Avenue) का उद्घाटन करेंगे. पीएम के उद्घाटन करते ही इंडिया गेट पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा से लेकर राष्ट्रपति भवन तक पूरे इलाके को औपचारिक रूप से 'कर्तव्य पथ' कहा जाएगा. नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय से मिले एक प्रस्ताव को पारित कर राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया है.

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राजपथ (कर्तव्य पथ) की अहमियत

देश की सबसे महत्वपूर्ण सड़कों में शुमार राजपाथ वही है जहां से हर साल गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को परेड निकाली जाती है. यहां देश की बड़ी राजनीतिक शख्सियतों के अंतिम संस्कार भी होते रहे हैं. करीब तीन किलोमीटर लंबे राजपथ (कर्तव्य पथ) का इतिहास साल 1911 से शुरू होता है जब दिल्ली को भारत की राजधानी के रूप में विकसित किया जा रहा था. यहां हम जानेंगे राजपथ का इतिहास और इससे जुड़े अहम तथ्यों के बारे में-

राजपथ से कर्तव्य पथ तक की यात्रा

अंग्रेजी हुकूमत में 'किंग्सवे' नाम से जाना जाने वाला राजपथ रायसीना हिल पर राष्ट्रपति भवन से शुरू होता है. ये विजय चौक और इंडिया गेट से होते पुराना किला पर जाकर समाप्त होता है. इस रोड की लंबाई करीब तीन तीन किलोमीटर है. साल 1911 में ब्रिटिश हुकूमत ने तय किया कि ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली की जानी चाहिए.

साल 1911 में शुरू हुआ निर्माण

फिर उसी साल 1911 नई दिल्ली डिस्ट्रिक्ट में कंस्ट्रक्शन का काम शुरू किया गया, जहां ब्रिटिश हुकूमत की प्रशासनिक राजधानी होगी. तब देश की राजधानी नई दिल्ली को डिजाइन करने का जिम्मा सर इडविन लुटियंस (Sir Edwin Lutyens) और सर हर्बर्ट बेकर (Sir Herbert Baker) को सौंपा गया. लुटियंस को सबसे महान ब्रिटिश शिल्पकार माना जाता है. साल 1920 में राजपथ बनकर तैयार हुआ. तब इसका नाम किंग्सवे ही था, यानी राजा का रास्ता.

इडविन लुटियंस को बाद में नई दिल्ली को डिजाइन करने के लिए 'ग्रेटेस्ट ब्रिटिश आर्किटेक्ट' से भी सम्मानित किया गया. तब इसके निर्माण में उनके योगदान के लिए नई दिल्ली को लुटियंस दिल्ली (या लुट्यन्स की दिल्ली) भी बुलाया गया.

आजादी के बाद बदल दिया नाम

बाद में देश की आजादी के बाद किंग्सवे का नाम बदलकर राजपथ कर दिया गया. राजपथ किंग्सवे का ही हिंदी अनुवाद है. दशकों तक किंग्सवे नाम से जाने गए राजपथ का नाम अब एक बार फिर बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया गया है.

नेताजी बोस की प्रतिमा का भी अनावरण आज

प्रधानमंत्री इस अवसर पर इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का भी अनावरण करेंगे. ये कदम अमृत काल में नए भारत के लिए प्रधानमंत्री के दूसरे 'पंच प्राण' के अनुरूप हैं. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा, जिसका अनावरण प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा, उसी स्थान पर स्थापित किया जा रहा है, जहां इस साल की शुरूआत में पराक्रम दिवस (23 जनवरी) पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया गया था.

ग्रेनाइट से बनी यह प्रतिमा हमारे स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी के अपार योगदान के लिए एक उपयुक्त श्रद्धांजलि है और उनके प्रति देश के ऋणी होने का प्रतीक होगी.

क्यों हुआ राथपथ का पुनर्विकास

राजपथ और सेंट्रल विस्टा एवेन्यू के आसपास के इलाकों में भीड़ के कारण बुनियादी ढांचे पर पड़ते दबाव और सार्वजनिक शौचालय, पीने के पानी, स्ट्रीट फर्नीचर और पार्किंग स्थल की पर्याप्त व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण राजपथ का पुनर्विकास किया गया है.

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