Sink Aircraft Carrier: अमेरिकी युद्धपोतों ने ईरान यु्द्ध में एक बार फिर से अपनी ताकत दिखाई है और उन्होंने दिखाया कि क्यों समुद्र के इस भारी-भरकम हथियारों को महाविनाशक माना जाता है. अमेरिका के ये युद्धपोत ज्यादातर दुश्मनों की रेंज से दूर ही रहते हैं. लेकिन, चीन के सैन्य वैज्ञानिकों का दावा है कि 3000 किलोमीटर दूर समंदर में तैर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर हमला कर उन्हें डुबो देना चीन के लिए संभव है.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, नानजिंग में नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी के कॉलेज ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज ने ये शोध किया है. इस पेपर का नाम है, ‘एंटी-शिप मिसाइल झुंड ऑपरेशन की प्रभावशीलता पर शोध‘ (Research on the effectiveness of anti‑ship missile swarm operation under distributed confrontation).
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे अमेरिका चुपचाप एशिया के तटों से अपनी सबसे अहम मिलिट्री संपत्तियों को हटा रहा है, वे माइक्रोनेशिया में गुआम जैसी जगहों पर वापस जा रही हैं. यह अमेरिका का एक द्वीप इलाका है जो ज़्यादातर आम मिसाइलों की पहुंच से बहुत दूर है. चीन की सेना के लिए इतनी दूर निशाना लगाना आसान नहीं है क्योंकि दूरी एक ढाल है.
चीनी रक्षा वैज्ञानिकों की एक टीम ने दूर हमले की इसी पहेली को सुलझा रही है. उनका जवाब, जो एक पीयर-रिव्यू जर्नल में खुलकर पब्लिश हुआ है, बताता है कि 3,000 किलोमीटर दूर से अमेरिकी कैरियर ग्रुप को कैसे नष्ट किया जा सकता है. यह शंघाई से गुआम की सटीक दूरी है. इस शोध को 25 मई को चीन के टॉप डिफेंस जर्नल्स में से एक, ‘टैक्टिकल मिसाइल टेक्नोलॉजी’ में पब्लिश किया गया है.

सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक मिसाइलों के झुंड ये हमला संभव है. (photo credit AI, for representation only)
पेंटागन ने ‘डिस्ट्रिब्यूटेड मैरीटाइम ऑपरेशन्स’ (DMO) नाम का एक नया कॉन्सेप्ट अपनाया. समुद्र के एक छोटे से हिस्से में कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को इकट्ठा करने के बजाय, डीएमओ जहाजों को सैकड़ों किलोमीटर के दायरे में फैला देता है. यह सबसे कीमती कैरियर को पीछे रखता है, जबकि छोटे और कम अहम जहाजों को आगे भेजता है ताकि वे मिसाइल शील्ड और तैरते हुए रडार का काम कर सकें.
अमेरिकी बेड़ा बिखरा हुआ और कई परतों वाला है. सबसे बाहरी परत एजिस डिस्ट्रॉयर का एक नेटवर्क है जो कैरियर से 600 से 800 किलोमीटर आगे तैनात है. ये SM-3 इंटरसेप्टर से लैस हैं जो बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिरा सकते हैं. पास के इलाके में, SM-6 और ESSM मिसाइलों से लैस बिना क्रू वाले समुद्री जहाज़ों ने एक अतिरिक्त “मिसाइल स्पंज” (मिसाइल सोखने वाला घेरा) बना लिया है.

(Infographics credit notebooklm)
एसोसिएट प्रोफेसर गाओ तियान्युन के मुताबिक एयर-डिफेंस जहाज़ों, फाइटर जेट और अर्ली-वॉर्निंग एयरक्राफ्ट की घनी अंदरूनी परत के पीछे एयरक्राफ्ट कैरियर छिपा रहता है. यानी कैरियर को नष्ट करने के लिए, आपको पहले उन सभी परतों को हटाना होगा, लेकिन वे बहुत बड़े इलाके में फैली होती हैं, जिससे उन्हें खोजना, उन पर निशाना लगाना और एक साथ उन सभी को हराना बहुत मुश्किल हो जाता है.
चीनी शोधकर्ताओं की योजना एक सरप्राइज हमले से शुरू होती है. वे आगे तैनात एजिस डिस्ट्रॉयर (युद्धपोत) पर हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइलें दागने के लिए पनडुब्बी का इस्तेमाल करने का सुझाव देते हैं. सबसे पहले बाहरी परत पर हमला करके, पीएलए मिडकोर्स मिसाइल डिफेंस शील्ड में सेंध लगा सकती है. एक बार जब वह शील्ड टूट जाती है, तो कैरियर पर बाद में होने वाले हमलों का खतरा बहुत बढ़ जाता है.
इसके बाद फायरपावर पैकेज का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें तीन तरह के हथियारों का मिश्रण होता है, सस्ते डिकॉय ड्रोन और कम लागत वाली क्रूज़ मिसाइलें ताकि दुश्मन के सेंसर भर जाएं और उनके इंटरसेप्टर स्टॉक खत्म हो जाएं.
अंत में सबसोनिक स्टील्थ क्रूज मिसाइलें लहरों के ऊपर से गुज़रती हैं और रडार की पकड़ से बचकर निकल जाती हैं. और फिर बाकी बचे अहम लक्ष्यों पर निशाना साधने के लिए और हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल होगा. कई दिशाओं से एक ही समय में हमला करने वाले ‘स्वार्म’ (मिसाइलों के झुंड) का जबरदस्त तालमेल सबसे एडवांस्ड एजिस सिस्टम को भी पछाड़ सकता है.
पेपर की सबसे अनोखी बातों में से एक है “लीडर-फॉलोअर” मोड नाम की रणनीति. मिसाइल झुंड की एक मिसाइल ऊंचाई पर जाकर जासूस का काम करती है. यह युद्धक्षेत्र को स्कैन करती है और रडार की पहुंच से नीचे उड़ रही दूसरी मिसाइलों को टारगेट का डेटा भेजती है. अगर लीडर मिसाइल को मार गिराया जाता है, तो तुरंत दूसरी मिसाइल उसकी जगह ले लेती है. इसे दूर से कमांड की जरूरत नहीं और भारी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बावजूद हमला जारी रख सकता है.
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