समंदर में 3000 किलोमीटर दूर करेंगे सर्जिकल स्ट्राइक और डुबो देंगे विशाल विमानवाहक पोत, चीन के सैन्य वैज्ञानिकों ने बताया कैसे करेंगे ये कारनामा- Explained

Sink Aircraft Carrier: चीन के वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर चीन ठान ले तो हजारों किलोमीटर दूर बैठे अमेरिकी युद्धपोतों को भी मारकर डुबोया जा सकता है. उन्होंने हमले की पूरी सैन्य रणनीति समझाई है. अभी तक किसी और देश के पास ऐसी क्षमता होने की जानकारी नहीं है.

Written by: Vineet Sharan Edited by: Vineet Sharan
Updated: June 13, 2026, 12:13 PM IST

  • चीन की सेना के वैज्ञानिकों का नया प्रस्ताव
  • बताया, कैसे संभव है समंदर में दूर हमला
  • दावा, शंघाई से गुआम तक निशाना लगाना संभव
    एंटी-शिप मिसाइल झुंड के जरिए हमले की योजना
  • टैक्टिकल मिसाइल टेक्नोलॉजी’ में शोध प्रकाशित

Sink Aircraft Carrier: अमेरिकी युद्धपोतों ने ईरान यु्द्ध में एक बार फिर से अपनी ताकत दिखाई है और उन्होंने दिखाया कि क्यों समुद्र के इस भारी-भरकम हथियारों को महाविनाशक माना जाता है. अमेरिका के ये युद्धपोत ज्यादातर दुश्मनों की रेंज से दूर ही रहते हैं. लेकिन, चीन के सैन्य वैज्ञानिकों का दावा है कि 3000 किलोमीटर दूर समंदर में तैर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर हमला कर उन्हें डुबो देना चीन के लिए संभव है.

किसने तैयार किया सैन्य प्रस्ताव?

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, नानजिंग में नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी के कॉलेज ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज ने ये शोध किया है. इस पेपर का नाम है, एंटी-शिप मिसाइल झुंड ऑपरेशन की प्रभावशीलता पर शोध (Research on the effectiveness of antiship missile swarm operation under distributed confrontation).

आ गया अल-नीनो, भारत को पहुंचाएगा कितना नुकसान? जानें कैसे हमारे देश में बिजली उत्पादन को घटा देगा ये खतरनाक मौसम पैटर्न- Explained

क्यों है चीन को इतने दूर हमले की जरूरत?

विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे अमेरिका चुपचाप एशिया के तटों से अपनी सबसे अहम मिलिट्री संपत्तियों को हटा रहा है, वे माइक्रोनेशिया में गुआम जैसी जगहों पर वापस जा रही हैं. यह अमेरिका का एक द्वीप इलाका है जो ज़्यादातर आम मिसाइलों की पहुंच से बहुत दूर है. चीन की सेना के लिए इतनी दूर निशाना लगाना आसान नहीं है क्योंकि दूरी एक ढाल है.

शंघाई से गुआम की कितनी है दूरी?

चीनी रक्षा वैज्ञानिकों की एक टीम ने दूर हमले की इसी पहेली को सुलझा रही है. उनका जवाब, जो एक पीयर-रिव्यू जर्नल में खुलकर पब्लिश हुआ है, बताता है कि 3,000 किलोमीटर दूर से अमेरिकी कैरियर ग्रुप को कैसे नष्ट किया जा सकता है. यह शंघाई से गुआम की सटीक दूरी है. इस शोध को 25 मई को चीन के टॉप डिफेंस जर्नल्स में से एक, ‘टैक्टिकल मिसाइल टेक्नोलॉजी’ में पब्लिश किया गया है.

सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक मिसाइलों के झुंड ये हमला संभव है. (photo credit AI, for representation only)

क्या है अमेरिका की सैन्य रणनीति?

पेंटागन ने ‘डिस्ट्रिब्यूटेड मैरीटाइम ऑपरेशन्स’ (DMO) नाम का एक नया कॉन्सेप्ट अपनाया. समुद्र के एक छोटे से हिस्से में कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को इकट्ठा करने के बजाय, डीएमओ जहाजों को सैकड़ों किलोमीटर के दायरे में फैला देता है. यह सबसे कीमती कैरियर को पीछे रखता है, जबकि छोटे और कम अहम जहाजों को आगे भेजता है ताकि वे मिसाइल शील्ड और तैरते हुए रडार का काम कर सकें.

कैसे सोख लेता है दुश्मन की मिसाइलें?

अमेरिकी बेड़ा बिखरा हुआ और कई परतों वाला है. सबसे बाहरी परत एजिस डिस्ट्रॉयर का एक नेटवर्क है जो कैरियर से 600 से 800 किलोमीटर आगे तैनात है. ये SM-3 इंटरसेप्टर से लैस हैं जो बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिरा सकते हैं. पास के इलाके में, SM-6 और ESSM मिसाइलों से लैस बिना क्रू वाले समुद्री जहाज़ों ने एक अतिरिक्त “मिसाइल स्पंज” (मिसाइल सोखने वाला घेरा) बना लिया है.

(Infographics credit notebooklm)

कितना मुश्किल है अमेरिकी युद्धपोतों को हराना ?

एसोसिएट प्रोफेसर गाओ तियान्युन के मुताबिक एयर-डिफेंस जहाज़ों, फाइटर जेट और अर्ली-वॉर्निंग एयरक्राफ्ट की घनी अंदरूनी परत के पीछे एयरक्राफ्ट कैरियर छिपा रहता है. यानी कैरियर को नष्ट करने के लिए, आपको पहले उन सभी परतों को हटाना होगा, लेकिन वे बहुत बड़े इलाके में फैली होती हैं, जिससे उन्हें खोजना, उन पर निशाना लगाना और एक साथ उन सभी को हराना बहुत मुश्किल हो जाता है.

हमले का पहला चरण कैसा होगा?

चीनी शोधकर्ताओं की योजना एक सरप्राइज हमले से शुरू होती है. वे आगे तैनात एजिस डिस्ट्रॉयर (युद्धपोत) पर हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइलें दागने के लिए पनडुब्बी का इस्तेमाल करने का सुझाव देते हैं. सबसे पहले बाहरी परत पर हमला करके, पीएलए मिडकोर्स मिसाइल डिफेंस शील्ड में सेंध लगा सकती है. एक बार जब वह शील्ड टूट जाती है, तो कैरियर पर बाद में होने वाले हमलों का खतरा बहुत बढ़ जाता है.

दूसरे चरण में क्या?

इसके बाद फायरपावर पैकेज का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें तीन तरह के हथियारों का मिश्रण होता है, सस्ते डिकॉय ड्रोन और कम लागत वाली क्रूज़ मिसाइलें ताकि दुश्मन के सेंसर भर जाएं और उनके इंटरसेप्टर स्टॉक खत्म हो जाएं.

फिर अंतिम प्रहार

अंत में सबसोनिक स्टील्थ क्रूज मिसाइलें लहरों के ऊपर से गुज़रती हैं और रडार की पकड़ से बचकर निकल जाती हैं. और फिर बाकी बचे अहम लक्ष्यों पर निशाना साधने के लिए और हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल होगा. कई दिशाओं से एक ही समय में हमला करने वाले ‘स्वार्म’ (मिसाइलों के झुंड) का जबरदस्त तालमेल सबसे एडवांस्ड एजिस सिस्टम को भी पछाड़ सकता है.

लीडर-फॉलोअर मोड क्या है?

पेपर की सबसे अनोखी बातों में से एक है “लीडर-फॉलोअर” मोड नाम की रणनीति. मिसाइल झुंड की एक मिसाइल ऊंचाई पर जाकर जासूस का काम करती है. यह युद्धक्षेत्र को स्कैन करती है और रडार की पहुंच से नीचे उड़ रही दूसरी मिसाइलों को टारगेट का डेटा भेजती है. अगर लीडर मिसाइल को मार गिराया जाता है, तो तुरंत दूसरी मिसाइल उसकी जगह ले लेती है. इसे दूर से कमांड की जरूरत नहीं और भारी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बावजूद हमला जारी रख सकता है.

संबंधित खबरे

Add India.com as a Preferred Source Add India.com as a Preferred Source

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें EXPLAINERS की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.