आपकी हर पर्सनल बातें सुन रहा है स्मार्टफोन, हमेशा ऑफ रखें 4 फीचर्स, डेटा सेफ्टी के लिए काम आएंगे ये 9 टिप्स
बेशक स्मार्टफोन से हमारे काम पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट तरीके से होते हैं, लेकिन इससे हमारी प्राइवेसी और सिक्योरिटी को बड़ा खतरा पैदा हो रहा है. आपको जानकर हैरानी होगी कि आपका स्मार्टफोन आपकी पर्सनल बातें सुनता है.
कभी भी स्मार्टफोन के बैकग्राउंड में कोई ऐप खुला न रखें.
टेक्नोलॉजी ने हमारा काम जितना आसान किया है, जिंदगी में उतनी ही मुश्किलें बढ़ा दी हैं. आज के समय में करीब 10 में से 9 लोगों के पास कोई न कोई मोबाइल फोन जरूर होगा. हालांकि, स्मार्टफोन के आने के बाद तो नॉर्मल फोन की वैल्यू कम हो गई है. बहुत सस्ता भी हिसाब लगाए तो 6 से 7 हजार में ठीक-ठाक स्मार्टफोन आ जाता है. बेशक स्मार्टफोन से हमारे काम पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट तरीके से होते हैं, लेकिन इससे हमारी प्राइवेसी और सिक्योरिटी को बड़ा खतरा पैदा हो रहा है. आपको जानकर हैरानी होगी कि आपका स्मार्टफोन आपकी पर्सनल बातें सुनता है.
जरा सोचिए. आप अपने कमरे में बैठे हैं और किसी के साथ ब्रांडेड कपड़े खरीदने की बात कर रहे हैं. कुछ देर में आप अपना फोन चेक करते हैं. आपको इन्हीं चीजों के ऐड दिखने लगते हैं. ऐसा आपके स्मार्टफोन के चलते होता है. आपके स्मार्टफोन में जरूर कोई न कोई ऐप बैकग्राउंड में खुला हुआ है, कभी न कभी आपने किसी ऐप को माइक्रोफोन का एक्सेस दे दिया होगा. इसलिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां बहुत जरूरी है.
क्या हर वक्त हमारी पर्सनल बातें सुनता है स्मार्टफोन?
नहीं. स्मार्टफोन हर वक्त आपकी बातें नहीं सुनता है. अगर आपने किसी ऐप को माइक्रोफोन की परमिशन दी है. अगर आप iPhone यूज़र हैं और Hey Siri’ वॉयस असिस्टेंट ऑन रखा है. एंडरॉयड यूज़र हैं और रोज OK Google’ का इस्तेमाल करते हैं, तो मुमिकन है कि ये फीचर बैकग्राउंड में आपके बातें सुनते हों. इसलिए इस्तेमाल के बाद ऐसे ऐप या ऑप्शन को बैकग्राउंड में छोड़ना नहीं चाहिए, बल्कि याद से ऑफ करना जरूरी है.
सर्च हिस्ट्री और लोकेशन से भी ट्रैक करती हैं कंपनियां
सिर्फ माइक्रोफोन एक्सेस से नहीं, बल्कि एडवर्टाइजमेंट कंपनियां आपके ऑनलाइन बिहेवियर, ब्राउजिंग हिस्ट्री, सर्च हिस्ट्री, लोकेशन से भी आपको ट्रैक करते हैं और एड दिखाते हैं. मान लीजिए, आपने एक बार अनारकली सूट सर्च किया, बस इसके बाद आप जब भी गूगल खोलेंगे, कोई भी पेज देखेंगे... आपको अनाकली सूट के ऑप्शन पॉप अप होंगे.
प्राइवेसी के लिए ये 4 फीचर ऑफ करना बेहतर
अपनी पर्सनल सेफ्टी और डेटा प्राइवेसी के लिए आपको स्मार्टफोन के 4 फीचर माइक्रोफोन, लोकेशन, वॉयस असिस्टेंट और ब्राउजिंग हिस्ट्री बंद रखना चाहिए.
स्मार्टफोन हमारा कौन-कौन सा डेटा इकट्ठा करता है?
हमारे स्मार्टफोन और दूसरे डिजिटल डिवाइस जैसे स्मार्टवॉच, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी वगैरह कई तरह का डेटा इकट्ठा करते हैं:-
- GPS, Wi Fi और IP एड्रेस के जरिए आपकी लोकेशन ट्रैक की जाती है.
- आपकी ब्राउजिंग हिस्ट्री से आपका सर्च पैटर्न देखा जाता है.
- आप इंटरनेट पर कब कौन सी चीज सर्च करते हैं, ये भी रिकॉर्ड हो जाता है.
- आपने पिछले महीने या पिछले साल आज के दिन क्या खरीदा था, इसका डेटा भी सेव हो जाता है.
- आप अपना मोबाइल फोन किस टाइम ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, किस ऐप पर ज्यादा वक्त बीताते हैं, ये भी रिकॉर्ड होता है.
- आपने अगर कोई ऐप इंस्टॉल किया, तो वो आपसे माइक्रोफोन और लोकेशन का एक्सेस मांगते हैं. अगर आपने दे दिया, तो बस ये हर वक्त आपकी बातें सुनते हैं.
क्या भारत में डेटा प्रोटेक्शन का कोई कानून नहीं है?
हां भारत में डेटा प्रोटेक्शन के लिए 2 कानून हैं. डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 (DPDP Act) और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 (IT Act). डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट नया कानून है, जो आपके ऑनलाइन डेटा सिक्योरिटी के लिए बना है. मतलब आपने ऑनलाइन अपना जो डेटा शेयर किया है, उसे कोई भी कंपनी बिना आपकी इजाजत के इस्तेमाल नहीं कर सकती है. जबकि इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 (IT Act) आपको कानूनी कार्रवाई का हक देता है. यानी अगर कोई कंपनी आपकी निजी जानकारी बिना आपकी मंजूरी के किसी और को देती है तो उस पर आप कानूनी कार्रवाई का प्रोसेस कर सकते हैं.
स्मार्टफोन प्राइवेसी के लिए अपनाइए ये टिप्स
- प्लेस्टोर या ऐप स्टोर के अलावा कहीं से ऐप इंस्टॉल न करें.
- इंस्टॉलेशन के समय ऐप की पॉलिसी जरूर पढ़ें.
- अगर कोई ऐप आपसे गैलरी, माइक्रोफोन, फोटोज या लोकेशन की परमिशन मांगता है, तो मत दें.
- अगर बिना परमिशन ऐप का एक्सेस नहीं मिलेगा, तब While Using the App ऑप्शन चुनें.
- किसी भी डिलीवरी ऐप को लोकेशन ट्रैक करने की परमिशन सिर्फ ऐप यूज के दौरान ही दें.
- अपने मोबाइल में सेव कॉन्टैक्ट लिस्ट को एक्सेस करने की परमिशन किसी को भी न दें.
- अपनी पर्सनल सेफ्टी के लिए फोटो या गैलरी के एक्सेस का परमिशन बिल्कुल नहीं देना चाहिए.
- हमेशा टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन प्रोसेस का इस्तेमाल करें.
- पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करने से बचें.
- किसी अनजान को अपना हॉटस्पॉट इस्तेमाल करने की परमिशन न दें.
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