ममता के खिलाफ बगावत से BJP के साथी तक... बंगाल के नए CM सुवेंदु अधिकारी की दिलचस्प कहानी

सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को भबानीपुर सीट से हराया है. वे नंदीग्राम से भी लगातार दूसरी बार चुनाव जीते हैं. 2021 में उन्होंने इसी सीट से पहली बार ममता को हराया था.

Written by: Anjali Karmakar
Updated: May 8, 2026, 5:00 PM IST

पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे ने किसी के सालों का सपना सच किया, तो किसी को अब तक का सबसे बड़ा सदमा दिया है. बंगाल की राजनीति में इस बार का चुनाव सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि रिश्तों के टूटने और राजनीतिक बदलते समीकरण की कहानी भी बन गया है. कभी ममता बनर्जी (Mamata Banerjee ) के सबसे करीबी माने जाने वाले सुवेंदु अधिकारी आज उनके सबसे बड़े राजनीतिक विरोधियों में शामिल हैं. अधिकारी ने बंगाल की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है. उन्होंने 2021 के चुनाव में ममता बनर्जी को नंदीग्राम से मात दी थी. 2026 के इलेक्शन में ममता को भबानीपुर सीटे से भी भारी वोटों से हराया. नंदीग्राम में भी उन्होंने बड़ी जीत हासिल की. BJP ने इस बफादारी का इनाम भी दिया है. सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री होंगे. उनका शपथ ग्रहण शनिवार सुबह 11 बजे होगा.

आइए समझते हैं कभी ममता बनर्जी के सबसे खास और भरोसेमंद रहे सुवेंदु दा कैसे उनके सबसे बड़े विरोधी बन गए? TMC के बागी से BJP सरकार के मुख्यमंत्री बनने की दिलचस्प कहानी.

सुवेंदु अधिकारी कौन हैं?
55 साल के सुवेंदु अधिकारी BJP के ताकतवर नेताओं में से एक हैं. मौजूदा वक्त में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी माने जाते हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वह BJP के चार प्रमुख रणनीतिकारों में एक हैं. सुवेंदु के पिता शिशिर अधिकारी 2009 से 2024 तक कांग्रेस कांटी लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस सांसद रहे. शिशिर अधिकारी मनमोहन सिंह की सरकार में राज्य मंत्री भी बने. उनके भाई दिवेंदु और सौमेंदु भी लोकसभा के सदस्य रहे हैं.

Bengal Election Results 2026: ओवर कॉन्फिडेंस या एंटी-इनकमबेंसी… आखिर बंगाल ने ‘दीदी’ को क्यों कहा अलविदा? TMC की हार के 7 कारण

कांग्रेस से शुरू हुआ राजनीतिक करियर
सुवेंदु ने अपने पिता के रास्ते पर चलते हुए कांग्रेस से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की. वह पूर्वी मिदनापुर के कांथी नगरपालिका से पार्षद चुने गए. बाद में वह ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए. 2006 में कांथी दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से विधायक के रूप में बंगाल विधानसभा में प्रवेश किया.

पूर्वी मिदनापुर के राजनीतिक सम्राट
नंदीग्राम आंदोलन के दौरान वे ममता बनर्जी के भरोसेमंद सहयोगी बने और पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिने जाने लगे. अधिकारी परिवार का पूर्वी मिदनापुर इलाके में मजबूत जनाधार था, जिससे TMC को चुनावी बढ़त मिलती रही. पूर्वी मिदनापुर में इस परिवार का इतना दबदबा है कि उन्हें अक्सर इस क्षेत्र का ‘राजनीतिक सम्राट’ कहा जाता है.

नंदीग्राम आंदोलन के दौरान तैयार की दीदी की जमीन
2007 में सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के प्रमुख आयोजक के रूप में अपनी पहचान बनाई. उन्होंने ममता बनर्जी के साथ नंदीग्राम आंदोलन का नेतृत्व किया. पूर्वी मिदनापुर जिले के इस क्षेत्र में लेफ्ट के नेतृत्व वाली सरकार की इंडोनेशिया के सलीम ग्रुप की एक कंपनी के सेटअप के विरोध में हिंसा भड़क उठी थी. यह केंद्र एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) का हिस्सा था, जिसके लिए 10,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण जरूरी थी.

माछ-भात पॉलिटिक्स से महिला आरक्षण तक… वो 7 वजहें, जिनसे बंगाल में इसबार हुआ खेला, BJP ने ‘तृणमूल’ उखाड़कर खिलाया ‘कमल’

सुवेंदु ने भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति को किया लीड
सुवेंदु अधिकारी ने भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति (भूमि बेदखली विरोधी समिति) की अगुवाई की, जो आंदोलन में सबसे आगे थी. 14 मार्च, 2007 को प्रदर्शनों को तितर-बितर करने के प्रयास में पुलिस फायरिंग में 14 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, जिससे पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया. इसके तुरंत बाद परियोजना रोक दी गई.

सिंगूर में भी ममता का दिया साथ
नंदीग्राम विवाद और पड़ोसी हुगली जिले के सिंगूर में टाटा मोटर्स के प्लांट के खिलाफ प्रदर्शनों ने तृणमूल कांग्रेस को 2011 के बंगाल विधानसभा चुनावों में सत्ता में पहुंचाया. इसमें सुवेंदु ने ममता दीदी का भरपूर साथ दिया था.

सुवेंदु अधिकारी ने TMC के टिकट पर लड़ा लोकसभा चुनाव
इसके बाद ममता बनर्जी ने सुवेंदु अधिकारी को लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया. सुवेंदु ने 2009 और 2014 में तामलुक निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की. ऐसा करते ही उन्होंने मुख्यमंत्री बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक के रूप में अपनी जगह पक्की कर ली. 2016 में तृणमूल की लगातार दूसरी जीत के बाद ममता ने अधिकारी को बंगाल लौटने के लिए कहा. उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करते हुए परिवहन मंत्रालय का महत्वपूर्ण प्रभार सौंपा गया. बाद में उन्हें अन्य मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी दी गई.

इन कदमों से TMC से हुए दूर
1.अभिषेक बनर्जी का उदय और पार्टी में वर्चस्व: TMC के भीतर ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी का कद बढ़ने से सुवेंदु अधिकारी सहज नहीं थे. सुवेंदु, जो खुद को जमीनी स्तर का नेता मानते थे, उन्हें पार्टी में किनारे किए जाने का एहसास होने लगा था.

Bengal Election Result: अपने ही गढ़ में 55% सीटें हार गई TMC, समझिए कैसे BJP ने ममता बनर्जी के मुस्लिम वोट बैंक में लगाई सेंध

2. प्रशांत किशोर (PK) की भूमिका: 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले, TMC ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को नियुक्त किया था. सुवेंदु अधिकारी और PK की टीम के बीच तालमेल नहीं बैठ पाया. ऐसी खबरें थीं कि सुवेंदु पार्टी के मामलों में बाहरी दखल से नाराज थे.

3. नंदीग्राम की विरासत पर दावा: 2007-2008 के नंदीग्राम आंदोलन में सुवेंदु अधिकारी की भूमिका बहुत अहम थी, जिसके दम पर ममता बनर्जी 2011 में सत्ता में आईं. सुवेंदु का मानना था कि उनके इलाके (मेदिनीपुर) के काम को उचित सम्मान नहीं मिल रहा है.

4. विचारधारा में बदलाव: जुलाई 2020 से ही सुवेंदु ने पार्टी कार्यक्रमों से दूरी बना ली थी. दिसंबर 2020 में उन्होंने ममता कैबिनेट और TMC से इस्तीफा दे दिया. इसके तुरंत बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले दिसंबर 2020 में BJP में शामिल हो गए.

BJP में साबित की अपनी अहमियत
ममता बनर्जी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया. उस वक्त BJP राज्य की 294 सीटों में से केवल 77 सीटें ही जीत सकी, जबकि तृणमूल ने 215 सीटें जीतीं. वहीं, सुवेंदु अधिकारी ने बड़ा उलटफेर करते हुए ममता बनर्जी को हरा दिया और BJP में अपनी अहमियत साबित कर दी. सुवेंदु अधिकारी ने 2021 की रणनीति को अपनाते हुए नंदीग्राम के साथ-साथ ममता बनर्जी को उनके गृह क्षेत्र भबानीपुर में भी चुनौती दी. भबानीपुर में ममता को 15 हजार से ज्यादा वोटों से हरा दिया.

बंगाल चुनाव के नतीजे
बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को आए. BJP ने 293 में से 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. TMC सिर्फ 80 पर सिमट गई. राज्य में कुल 294 विधानसभा सीट हैं, एक सीट फालता पर 21 मई को दोबारा मतदान होगा. रिजल्ट 24 मई को घोषित किए जाएंगे.

अंग-बंग से कलिंग तक BJP, बंगाल में ऐतिहासिक जीत का राष्ट्रीय राजनीति पर क्या होगा असर?

संबंधित खबरे

Add India.com as a Preferred Source Add India.com as a Preferred Source

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें EXPLAINERS की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.