तमिलनाडु में विजय का 'राज' रोकने के लिए क्या पहली बार हाथ मिलाएगी DMK और AIADMK? समझिए क्या बन रहे समीकरण

Written By: Anjali Karmakar Updated by: Anjali Karmakar
Updated Date:May 6, 2026 11:23 PM IST

DMK और AIADMK की कहानी सिर्फ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की नहीं, बल्कि विचारधारा, व्यक्तित्व और सत्ता संघर्ष की भी कहानी है. ये दोनों पार्टियां कभी एक ही आंदोलन का हिस्सा थीं, लेकिन समय, महत्वाकांक्षा और नेतृत्व की लड़ाई ने इन्हें कट्टर दुश्मन बना दिया.

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे किसी के लिए सरप्राइज करने वाले थे, तो किसी के लिए ये सबसे बड़ा शॉक था. तमिल एक्टर थलपति विजय ने 2 साल पुरानी पार्टी से तमिलनाडु की सियासत की पूरी बाज़ी ही पलट दी है. राज्य की राजनीति में एक्टर थलपति विजय ने ऐसी एंट्री मारी, जो सुपर-डुपर हिट हो गई. विजय की पार्टी तमिलागा वेट्री कज़गम (TVK) चुनाव में नंबर वन पार्टी के तौर पर उभरी है. TVK ने कुल 234 सीटों में से 108 सीटें जीती हैं. बहुमत का आंकड़ा 118 है. यानी चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी TVK के नेता के तौर पर थलपति विजय सरकार बना सकते हैं, लेकिन उन्हें किंगमेकर की जरूरत है.

Advertising
Advertising

कांग्रेस ने TVK को समर्थन दे दिया है. फिर भी विजय सरकार नहीं बना पा रहे. क्योंकि, बहुमत के नंबर पूरे नहीं हो पा रहे. इस बीच ऐसी खबर आ रही है कि तमिलनाडु की राजनीति में धुर-विरोधी DMK और AIADMK विजय को रोकने के लिए हाथ मिला सकते हैं. आइए समझते हैं कि DMK और AIADMK की दुश्मनी कैसे शुरू हुई? हमेशा से एक दूसरे के विरोधी रहे दोनों पार्टियां क्या विजय को रोकने के लिए दुश्मनी भुलाकर गठबंधन कर सकते हैं? किस फॉर्मूले के तहत राज्य में DMK-AIADMK की सरकार बन सकती है?

धुरंधर थलपति विजय के किंगमेकर कौन? समझिए बहुमत से दूर होकर भी तमिलनाडु में कैसे बन सकती है TVK सरकार

दक्षिण भारत की राजनीति में DMK और AIADMK के बीच की दुश्मनी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. आज ये दोनों दल एक-दूसरे के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इनकी जड़ें एक ही आंदोलन से निकली थीं. यही कारण है कि इनकी कहानी में साथ और टकराव दोनों शामिल हैं.

एक ही आंदोलन से शुरुआत

द्रविड़ आंदोलन से इस कहानी की शुरुआत होती है. इसका नेतृत्व E. V. Ramasamy (पेरियार) कर रहे थे. यह आंदोलन सामाजिक समानता, ब्राह्मणवाद के विरोध और क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करने के लिए चलाया गया था. इसी आंदोलन से 1949 में C. N. Annadurai ने अलग होकर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी DMK की स्थापना की. उनका मकसद था—राजनीति के जरिए द्रविड़ विचारधारा को आगे बढ़ाना. DMK ने जल्द ही तमिलनाडु की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बना ली.

MGR का उदय और पार्टी में दरार की शुरुआत

1960-70 के दशक में DMK के भीतर एक बड़ा चेहरा उभरा. नाम था एमजी रामाचंद्रन (M. G. Ramachandran). इन्हें लोग प्यार से MGR कहते थे. वे सिर्फ सुपरस्टार ही नहीं, बल्कि जनता के दिलों पर राज करने वाले नेता भी थे. शुरुआत में MGR, DMK के प्रमुख नेता एम करुणानिधि (M. Karunanidhi) के करीबी सहयोगी थे. समय के साथ दोनों के बीच मतभेद बढ़ने लगे. MGR ने पार्टी नेतृत्व पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, जिससे टकराव खुलकर सामने आ गया.

दोस्ती से दुश्मनी की शुरुआत

1972 में हालात इतने बिगड़ गए कि MGR को DMK से बाहर कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाई. नाम रखा-ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी AIADMK. यहीं से DMK और AIADMK की दुश्मनी की असली शुरुआत हुई. एक ही विचारधारा से निकली दो पार्टियां अब सत्ता के लिए आमने-सामने थीं. तमिलनाडु की राजनीति दो धड़ों में बंट गई—एक DMK, दूसरी AIADMK.

बंधु से विरोधी तक… कभी ममता के सबसे खास हुआ करते थे सुवेंदु अधिकारी, इन 4 बातों ने रिश्तों में बोई दुश्मनी की बीज

जयललिता बनाम करुणानिधि

1987 में MGR के निधन के बाद AIADMK की कमान जे जयललिता (J. Jayalalithaa) के हाथों में आ गई. DMK का नेतृत्व करुणानिधि के पास था. यह दौर दोनों पार्टियों की दुश्मनी का सबसे तीखा समय माना जाता है. विधानसभा में टकराव, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक बदले की कार्रवाई आम बात बन गई थी. 1989 में विधानसभा के अंदर जयललिता के साथ हुई बदसलूकी ने इस दुश्मनी को और गहरा कर दिया.

अभी किनके हाथ में DMK-AIADMK की कमान?

एम करुणानिधि की मौत के बाद उनके बेटे एमके स्टालिन ने DMK की कमान संभाली. स्टालिन इस चुनाव में अपनी कोलाथुर (Kolathur) विधानसभा सीट हार गए हैं. वहीं, AIADMK अभी OPS और EPS गुटों में बंटी हुई है. OPS यानी ओ पनीर सेलवम. इन्हें जयललिता का करीबी माना जाता था. EPS यानी ई पलानीस्वामी. ये जयललिता के दोस्त शशिकला के करीबी थे. शशिकला ने पार्टी पर कभी अपना दावा किय था. AIADMK अलग-अलग गुटों में बंटी होने के बावजूद DMK की सबसे बड़ी विरोधी पार्टी बनी हुई है.

क्या पहले कभी साथ आए DMK और AIADMK?

सीधे तौर पर देखें तो DMK और AIADMK कभी भी एक साथ गठबंधन में नहीं आए. हालांकि, दोनों पार्टियों ने अलग-अलग समय पर राष्ट्रीय राजनीति में अलग-अलग दलों के साथ हाथ मिलाया. DMK ने अक्सर कांग्रेस और उसके यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (UPA) का साथ दिया. दूसरी ओर, AIADMK ने समय-समय पर BJP और उसके गठबंधन NDA के साथ तालमेल बिठाया. हालांकि, राज्य स्तर पर ये दोनों पार्टियां हमेशा एक-दूसरे के खिलाफ ही चुनाव लड़ती रही है.

थलपति विजय को रोकने के लिए क्या साथ आ सकती है DMK-AIADMK?

राज्य में DMK और AIADMK जैसी धुर विरोधी पार्टियों के गठबंधन की अटकलें लग रही हैं. असल में TVK चीफ थलपति विजय ने बुधवार को राज्यपाल के सामने कांग्रेस के सपोर्ट लेटर के साथ सरकार बनाने का दावा पेश किया है. लेकिन, राज्यपाल ने विजय को बाकी 5 विधायकों के साइन लाने को कहा है, ताकि बहुमत के नंबर पूरे हो सके. ऐसे में विजय ने राज्यपाल से मोहलत मांगी है. पहले शपथ ग्रहण की डेट 8 मई तय हुई थी. चूंकि, नंबर नहीं हैं; इसलिए माना जा रहा है कि शपथ ग्रहण आगे के लिए टल सकता है. इस बीच DMK-AIADMK के एक्टिव होने की अटकले हैं. राजनीति में कुछ भी मुमकिन नहीं होता. इसलिए सत्ता के लिए दो धुर-विरोधी हाथ मिला लें, इसकी संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता.

दुनिया में पहली बार जहां बनी थी लेफ्ट की सरकार, वहीं मिला आखिरी सलाम’, कांग्रेस से है आगाज़ और अंजाम का कनेक्शन

अभी क्या हैं नंबर गेम?

TVK चीफ थलपति विजय ने पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली सीट से चुनाव लड़ा. दोनों सीट से जीत मिली है. नियम के मुताबिक, दो सीटों पर चुनाव जीतने पर बाद में एक सीट खाली करनी होती है. ऐसे में TVK के पास 107 सीटें रह जाती हैं. विधानसभा की सीटें 234 हैं. सरकार बनाने के लिए 118 सीटें चाहिए. TVK के 107 और कांग्रेस के 5 सीटें मिलाकर टोटल 113 होता है. 5 सीटों के लिए लेफ्ट और VKC ने समर्थन देने से इनकार कर दिया है. चुनाव में CPI, CPIM और VKC ने 2-2 सीटें जीती हैं. अगर इन तीनों का समर्थन मिल जाता, तो विजय 118 का आंकड़ा पूरा कर लेंगे. अब ऐसा नहीं होने की स्थिति में DMK और AIADMK के साथ आने की अटकलें लग रही हैं.

फिलहाल कौन-कौन सी किसे समर्थन देंगी यह साफ नहीं है. इसलिए TVK ने बुधवार को अपने सभी नवनिर्वाचित विधायकों को महाबलीपुरम के चेंगलपट्टू स्थित फोर प्वॉइंट्स नाम के रिसॉर्ट में शिफ्ट कर दिया है, ताकि हॉर्स ट्रेडिंग (विधायकों के खरीद-फरोख्त) से बचा जा सके.

तमिलनाडु की राजनीति में थलपति विजय की सुपरहिट एंट्री, DMK को पछाड़कर नंबर 1 बनी TVK, सरकार बनाने का मौका

Add India.com as a Preferred Source

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें मनोरंजन की और अन्य ताजा-तरीन खबरें