
Digpal Singh
साल 2005-2006 में माखनलाल चतुर्वेदी युनिवर्सिटी से PGDM करने के बाद दो वर्ष तक कई अखबारों के लिए फ्रीलांसर के तौर पर काम किया. साल 2008 में लाइवहिंदुस्तान (HT Media) ... और पढ़ें
Udaipur Kanhaiyalal Murder Case Update: राजस्थान के उदयपुर में एक टेलर कन्हैयालाल की हत्या के बाद पूरा देश सदमे में है. हालात न बिगड़ें इसके लिए सुरक्षा एजेंसियों को चौकस रखा गया है और कई इलाकों में इंटरनेट बंद कर दिया गया है. दरअसल उदयपुर में एक दर्जी कन्हैयालाल की मंगलवार को गला काटकर नृशंस हत्या कर दी गई थी. इस घटना का वीडियो भी बनाया गया और यह वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया था. कन्हैयालाल की गर्दन पर धारदार हथियार से सात से आठ बार वार किए गए थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर दो दर्जन से ज्यादा घाव मिले हैं.
इस घटना के बाद स्थानीय लोग गुस्से में हैं. केंद्रीय गृहमंत्रालय ने इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है. उधर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत का कहना है कि राजस्थान का आतंकवादी रोधी दस्ता (ATS) जांच में एनआईए की मदद करेगा. एनआईए ने कन्हैया लाल हत्याकांड मामले में गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया है. आइए जानते हैं NIA, ATS और UAPA के बारे में सब कुछ.
सबसे पहले बात NIA के बारे में क्योंकि यही केंद्रीय जांच एजेंसी कन्हैयालाल हत्याकांड की जांच कर रही है. एनआईए का गठन नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी एक्ट 2008 के तहत 31 दिसंबर 2008 को भारत की संसद ने किया. इस एजेंसी का गठन साल 2008 के 26/11 मुंबई आतंकी हमला (26/11 Mumbai Terror Attack) के बाद हुआ. उस समय इंटेलिजेंस एजेंसियों की खामियों और इस तरह की आतंकवादी गतिविधियों से निपटने की उनकी क्षमताओं में कमी को देखते हुए, ऐसी जांच एजेंसी की कमी महसूस की गई और फिर आतंकी घटनाओं से निपटने के लिए NIA का गठन हुआ. मुख्य तौर पर यह एजेंसी आतंकवाद के खतरों से निपटने के लिए बनाई गई है. यह एजेंसी देश के तमाम हिस्सों में आतंकवाद से जुड़े अपराधों की जांच करती है और इसे किसी भी राज्य में जाने के लिए राज्य सरकार की अनुमति की भी आवश्यकता नहीं होती.
एनआईए सीधे भारत के गृहमंत्रालय के अंतर्गत काम करती है और इसका हेडक्वार्टर दिल्ली के सीजीओ कॉम्पलेक्स में है और हैदराबाद, गुवाहाटी, कोच्ची, लखनऊ, मुंबई, कोलकाता, रायपुर, जम्मू, चंडीगढ़, रांची, चेन्नई और इंफाल में इसके ब्रांच दफ्तर भी हैं. एनआईए के अपने स्पेशल कोर्ट भी हैं. एनआईए कन्हैयालाल मर्डर केस की जांच आतंकवाद के एंगल से कर रही है.
जिस तरह से आतंकवाद के खिलाफ केंद्रीय एजेंसी के रूप NIA काम करती है, उसी तरह से राज्य में आतंकवाद रोधी दस्ता (ATS) काम करता है. आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए देश के ज्यादातर राज्यों की पुलिस में एक अलग विभाग बना है, जिसे ATS कहा जाता है. आतंकवादी घटनाओं की जांच करना और ऐसी घटनाओं के लिए इंटेलिजेंस इनपुट जुटाना ATS का प्रमुख काम होता है. इसके अलावा ड्रग्स तस्करी और मानव तस्करी जैसे गतिविधियों पर रोकथाम लगाने के लिए भी काम करती है. राज्य पुलिस के साथ मिलकर ATS आतंकवादी घटनाओं की जांच करती है और दोषियों को सजा दिलाने का काम करती है. राजस्थान की सीमा पड़ोसी देश पाकिस्तान से लगती है, ऐसे में राज्य एटीएस की भूमिका बढ़ जाती है. राजस्थान ATS कन्हैयालाल मर्डर केस की जांच में NIA की मदद करेगी.
देश में गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी Unlawful Activities Prevention Act (UAPA) लाया गया था. UAPA का उद्देश्य भारत की अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ होने वाली गतिविधियों के खिलाफ जांच एजेंसियों को शक्तियां प्रदान करना है. UAPA अमेंडमेंट एक्ट 2019 के तहत अब अब केंद्र सरकार बिना उचित प्रक्रिया के किसी अपराधी को आतंकवादी घोषित कर सकती है. बता दें कि UAPA को एंटी टेररिस्ट लॉ भी कहा जाता है.
साल 2019 में देश के गृहमंत्री अमित शाह ने 8 जुलाई 2019 को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) संशोधन बिल 2019 लोकसभा में पेश किया. 24 जुलाई 2019 को लोकसभा में बिल पास हो गया. इसके बाद 2 अगस्त 2019 को राज्यसभा ने भी बिल को मंजूरी दे दी.
साल 1967 के कानून में संशोधन से सरकार और जांच एजेंसियों को आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिए कुछ विशेष अधिकार मिल गए. इसके तहत केंद्र सरकार किसी ऐसे व्यक्ति या संस्था को आतंकवादी घोषित कर सकती है, जो किसी आतंकवादी घटना में शामिल हो, आतंकवादी घटना को अंजाम देने की तैयारी कर रहा हो, आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा हो या किसी भी अन्य तरह से आतंकवादी कृत्य में शामिल हो. जांच एजेंसी आतंकवादी गतिविधियों की जांच करेगी और NIA के डायरेक्टर जनरल की मंजूरी लेकर जांच अधिकारी ऐसे व्यक्ति या संस्था की संपत्ति जब्त कर सकता है.
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