Explainer: क्या है GAGAN सिस्टम, ये GPS से कितना अलग? जानिए इसके बारे में सबकुछ

Written By: Anjali Karmakar Updated by: Anjali Karmakar
Updated Date:June 30, 2026 10:24 PM IST

What is GAGAN Navigation System:भारत ने बीते कुछ साल में अंतरिक्ष और नेविगेशन तकनीक के क्षेत्र में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं. इन्हीं में से एक है GAGAN यानी GPS Aided GEO Augmented Navigation सिस्टम.

  • दुनिया में अब तक 3 स्पेस-बेस्ड ऑग्मेंटेशन सिस्टम
  • US-यूरोप और जापान के बाद लिस्ट में शामिल हुआ भारत
  • पूरे भारत में बने हैं 15 ग्राउंड स्टेशन
  • कंट्रोल सेंटर की गलतियों को करेक्ट करता है गगन

इंडिगो का एयरबस A320 27 जून की दोपहर को राजस्थान के उदयपुर में रनवे पर उतरता है. सबकुछ बिल्कुल नॉर्मल लगता है, लेकिन इन चंद मिनटों में एक नया रिकॉर्ड बन जाता है. क्योंकि इंडिगो के एयरक्राफ्ट ने लैंडिंग के लिए GPS या रेडियो सिग्नल का इस्तेमाल नहीं किया था. इसने स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम GAGAN का इस्तेमाल किया था. इसकी मदद से एयरक्राफ्ट खराब मौसम, कम विजिबिलिटी और ऐसे एयरपोर्ट पर भी सुरक्षित लैंडिंग कर सकते हैं, जहां पारंपरिक लैंडिंग सिस्टम मौजूद नहीं हैं.

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आइए जानते हैं कि GAGAN क्या है, यह कैसे काम करता है और दुनिया के अन्य देशों के सिस्टम से कितना अलग है.

क्या है GAGAN सिस्टम?

  • GAGAN (GPS Aided GEO Augmented Navigation) भारत का Satellite Based Augmentation System (SBAS) है. इसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है.
  • इसका मुख्य उद्देश्य GPS सिग्नल को और अधिक सटीक, भरोसेमंद और हमेशा उपलब्ध बनाना है, ताकि सिविल एविएशन में एयरक्राफ्ट टेकऑफ से लेकर लैंडिंग तक सुरक्षित तरीके से उड़ान भर सकें. दूसरे शब्दों में कहें तो GAGAN खुद GPS नहीं है, बल्कि GPS को और बेहतर बनाने वाला सिस्टम है.

GAGAN कैसे करता है काम?

  • GAGAN तीन हिस्सों से बना है- ग्राउंड सेगमेंट, स्पेस सेगमेंट और यूजर सेगमेंट. इसके तहत सबसे पहले GPS की गलतियां पकड़ी जाती हैं. देशभर में लगे 15 Indian Reference Stations (INRES) लगातार GPS सिग्नल की निगरानी करते हैं. ये स्टेशन पता लगाते हैं कि GPS सिग्नल में कितनी खामियां हैं.
  • ये सिस्टम सैटेलाइट की घड़ी में गड़बड़ी को ठीक कर सकता है. सैटेलाइट के ऑर्बिट में बदलाव कर सकता है. आयनमंडल (Ionosphere) की वजह से सिग्नल में देरी को मैनेज कर सकता है.
  • गगन इन सभी स्टेशनों से मिली जानकारी Indian Master Control Centre (INMCC) तक पहुंचता है. यहां कंप्यूटर इन खामियों का एनालिसिस कर करेक्शन तैयार करते हैं.
  • करेक्शन डेटा को इंडियन लैंड अपलिंक स्टेशंस (INLUS) के जरिए GSAT-8, GSAT-10 और GSAT-15 जैसे जियोस्टेशनरी सैटेलाइट तक भेजा जाता है.
  • अब ये सैटेलाइट करेक्शन मैसेज दोबारा एयरक्राफ्ट तक भेजते हैं. अगर एयरक्राफ्ट में SBAS रिसीवर लगा है, तो वह GPS के साथ इन करेक्शन डेटा को जोड़कर अपनी सटीक स्थिति पता कर लेता है. इससे पायलट को रनवे तक पहुंचने में ज्यादा सटीक जानकारी मिलती है.

GAGAN GPS की गलतियां कैसे सुधारता है?

  • GPS पूरी तरह सटीक नहीं होता. GAGAN मुख्य रूप से तीन तरह की गलतियों को ठीक करता है. ये आयनमंडल की वजह से होने वाली देरी को सही करता है. धरती के ऊपर मौजूद आयनमंडल GPS सिग्नल की गति को प्रभावित करता है. GAGAN लगातार इसकी निगरानी कर रियल टाइम करेक्शन देता है.
  • GPS सैटेलाइट की घड़ी या ऑर्बिट में थोड़ा सा भी बदलाव पोजिशन एरर पैदा कर सकता है. GAGAN इन्हें तुरंत सुधार देता है.
  • GAGAN हार्डवेयर से जुड़ी गलतियां भी ठीक करता है. रिसीवर और सैटेलाइट दोनों के उपकरणों से भी एरर आ सकता है. GAGAN आधुनिक एल्गोरिद्म की मदद से इन गलतियों को भी कम करता है.

GAGAN पारंपरिक रेडियो सिस्टम से कैसे अलग है?

  • आज भी दुनिया के कई एयरपोर्ट ILS (Instrument Landing System) जैसे रेडियो आधारित सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं. GAGAN कई मामलों में उनसे आगे है. ILS हर एयरपोर्ट पर अलग-अलग लगाया जाता है, जबकि GAGAN एक ही सिस्टम से पूरे भारतीय फ्लाइट इंफॉर्मेशन रीजन(FIR) को कवर करता है. इसकी कवरेज अफ्रीका से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक फैली हुई है.
  • ILS लगाने के लिए हर रनवे पर भारी-भरकम उपकरण लगाने पड़ते हैं. इसमें खर्चा काफी आता है. GAGAN में इसकी जरूरत नहीं पड़ती.
  • जहां ILS नहीं लगा है, वहां भी GAGAN की मदद से एयरक्राफ्ट सुरक्षित तरीके से वर्टिकल गाइडेंस के साथ उतर सकते हैं.
  • ILS मुख्य रूप से लैंडिंग के लिए होता है, लेकिन GAGAN टेकऑफ, एन रूट नेविगेशन, टर्मिनल नेविगेशन, प्रीसीसन अप्रोच और मिस्ड अप्रोच सभी फेज में मदद करता है.

GAGAN और NavIC में क्या अंतर है?

GAGAN और NavIC में सबसे बड़ा अंतर यह है कि GAGAN खुद कोई नेविगेशन सिस्टम नहीं है, बल्कि GPS की सटीकता बढ़ाने वाला सिस्टम है. NavIC भारत का अपना स्वतंत्र सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम है, जो सीधे लोकेशन और टाइमिंग की जानकारी देता है.

दूसरे देश कौन-सा सिस्टम इस्तेमाल करते हैं?

भारत अकेला देश नहीं है, जिसने ऐसा सिस्टम विकसित किया है. दुनिया के कई हिस्सों में इसी तरह के Satellite Based Augmentation System मौजूद हैं. अमेरिका में WAAS (Wide Area Augmentation System) का इस्तेमाल होता है. यूरोप में EGNOS (European Geostationary Navigation Overlay Service) चलता है. जापान ने MSAS (MTSAT Satellite-based Augmentation System) डेवलप किया है.

भविष्य में क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सैटेलाइट बेस्ड नेविगेशन पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ेगा.भारत का GAGAN पहले ही अंतरराष्ट्रीय SBAS नेटवर्क के साथ इंटरऑपरेबल है. यानी भविष्य में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को भी इसका बड़ा लाभ मिलेगा. इसके साथ ही NavIC, GAGAN और नई सैटेलाइट तकनीकों का संयोजन भारत को विमानन नेविगेशन के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों की कतार में खड़ा कर सकता है.

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