Women Reservation Bill क्या है जिसे कैबिनेट की मिली मंजूरी! इससे क्या-कहां और किसे होगा फायदा? जानें सभी डिटेल्स

What Is Women Reservation Bill: यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण का रास्ता सुनिश्चित करेगा. आखिरी बार इसे साल 2010 में राज्यसभा में पास कराया गया था हालांकि यह लोकसभा तक नहीं पहुंच सका था.

Published date india.com Updated: September 19, 2023 12:11 AM IST
All you need to know about women's reservation bill
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संसद के विशेष सत्र के बीच यूनियन कैबिनेट की अहम बैठक में सोमवार को सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक (Women Reservation Bill) को मंजूरी दे दी. हालांकि सरकार की तरफ से अब तक इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल कैबिनेट बैठक के बाद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी थी, हालांकि बाद में उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया. प्रहलाद पटेल (Prahlad Patel) ने ट्वीट कर लिखा था, ‘महिला आरक्षण की मांग पूरा करने का नैतिक साहस मोदी सरकार में ही था, जो कैबिनेट की मंजूरी से साबित हो गया. यह बिल लोकसभा (Lok Sabha) और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण (What Is Women Reservation Bill) का रास्ता सुनिश्चित करेगा. महिला आरक्षण विधेयक को संविधान (One Hundred and Eighth Amendment) विधेयक, 2008 भी कहा जाता है. इस विधेयक के कानून बनने के बाद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित हो जाएंगी.

महिला आरक्षण विधेयक में क्या?

महिला आरक्षण विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है. विधेयक के अनुसार, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों की कुल संख्या में से एक तिहाई उन समूहों की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. विधेयक में प्रस्तावित है कि हर आम चुनाव के बाद आरक्षित सीटों को रोटेट किया जाना चाहिए. आरक्षित सीटें राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेशन द्वारा आवंटित की जा सकती हैं. इस संशोधन अधिनियम के लागू होने के 15 साल बाद महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण समाप्त हो जाएगा.

2010 में राज्यसभा से हो गया था पारित

लैंगिक समानता और समावेशी शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होने के बावजूद, यह विधेयक बहुत लंबे समय से विधायी अधर में लटका हुआ है. आखिरी बार यह बिल साल 2010 में राज्यसभा में पारित हो गया था और मार्शलों ने कुछ सांसदों को बाहर कर दिया था, जिन्होंने महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का विरोध किया था. हालांकि यह विधेयक रद्द हो गया था, क्योंकि लोकसभा से पारित नहीं हो सका था.

Women's Reservation Bill Passed By Cabinet Chaired By PM Modi REPORT

PM Narendra Modi distributes PM Vishwakarma Certificates to various artists and craftspersons (Image: ANI)

कई महिला नेताओं ने बल पर दिया जोर

संसद के विशेष सत्र से पहले, विभिन्न राजनीतिक दलों के कई नेताओं ने महिलाओं के लिए आरक्षण पर जोर दिया. सोमवार को NCP नेता सुप्रिया सुले ने बिल पर कांग्रेस का बचाव करते हुए कहा था कि पहली महिला प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कांग्रेस से थीं और यह कानून भी कांग्रेस द्वारा ही लाया गया था. उन्होंने कहा, ‘लेकिन संख्याबल की कमी के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका.’ NCP नेता और BJP सहयोगी प्रफुल्ल पटेल ने भी सरकार से इसी संसद सत्र में महिला आरक्षण बिल पास करने की अपील की थी.

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मौजूदा LS में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कितना?

मौजूदा लोकसभा में 78 महिला सदस्य चुनी गईं, जो कुल संख्या 543 का 15 प्रतिशत से भी कम है. सरकार की तरफ से बीते दिसंबर में संसद के साथ शेयर किए गए आंकड़ों के मुताबिक, राज्यसभा में भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व लगभग 14 प्रतिशत है. आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, ओडिशा, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा और पुडुचेरी सहित कई राज्य विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 10 प्रतिशत से कम है. दिसंबर 2022 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में 10-12 प्रतिशत महिला विधायक थीं. वहीं, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और झारखंड क्रमश: 14.44 प्रतिशत, 13.7 प्रतिशत और 12.35 प्रतिशत के साथ महिला विधायक संबंधी सूची में सबसे आगे हैं.

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