रमज़ान में भी तीन दिन ग़म क्यों मनाते हैं दुनिया के 'आधे' मुसलमान, जश्न में साथ तो ग़म में क्यों बंट जाते हैं शिया-सुन्नी

मुसलमानों के शिया-सुन्नी दो समुदायों में बंटने की शुरुआत पैगंबर मुहम्मद के बाद उनका उत्तराधिकारी कौन होगा, इस बात से हुई. आज दुनिया भर के मुसलमानों में तकरीबन 85 प्रतिशत आबादी सुन्नी और 15 प्रतिशत शिया हैं.

Published date india.com Published: April 1, 2024 11:04 AM IST
मजलिस का एक दृश्य
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दुनिया की 25% से अधिक आबादी मुसलमान है, जिसकी तादाद तकरीबन 1.9 बिलियन से अधिक है. ये आंकड़ें 2020 के मुताबिक हैं. दुनिया भर का मुसलमान मौटे पर शिया और सुन्नी दो समुदायों में बंटा है. मुसलमानों की कुल आबादी का तकरीबन 87–90% यानी 1.7 बिलियन आबादी सुन्नी है. बाकी बचे 10–13% लोग यानी तकरीबन 180–230 मिलियन लोग शिया हैं. शिया-सुन्नी दोनों समुदायों के लोग आखिरी पैगंबर मुहम्मद, कुरान, दिन भर की वाजिब नमाज की तादाद, रमजान को मुबारक मानने तक एक हैं. लेकिन फिर ये लोग दो समुदायों में क्यों बंट गए. मुबारक माने जाने वाले रमज़ान के महीने में कौन से मुसलमान, कितने दिन और क्यों गम मनाते हैं.

शिया-सुन्नी में बंट जाने की वजह

मुसलमानों के दो समुदायों में बंटने की शुरुआत पैगंबर मुहम्मद की तरफ से पेश किए गए इस्लामी नेता के रूप में उनका उत्तराधिकारी कौन होगा, इस बात से हुई. पैगंबर मुहम्मद के परिवार में उनकी एक बेटी फातिमा, दामाद अली और फातिमा व अली के दो बेटे हसन और हुसैन थे. पैगंबर मुहम्मद ने अपना उत्तराधिकारी और इस्लामी नेता भी अपने दामाद अली को चुना. जिन मुसलमानों ने पैगंबर मुहम्मद के बाद अली को ही अपना पहला इस्लामी नेता माना वे शिया कहलाए. शियाओं ने इसी इस्लामी नेता को अपना पहला इमाम माना. जिन्होंने पैगंबर मुहम्मद के बाद अली को अपना पहला इस्लामी नेता नहीं माना वे सुन्नी कहलाए. सुन्नियों ने अपने पहले इस्लामी नेता को खलीफा कहा.

सुन्नियों ने किसे माना पहला इस्लामी नेता (खलीफा)

सुन्नी समुदाय ने अपना पहला खलीफा अबू बकर, दूसरा उसमान, तीसरा उमर और चौथा खलीफा अली को माना. फिर आगे चलकर दोनों समुदायों में ऐसे ही दूरियां बनीं. अबू बकर, उसमान, उमर पैगंबर मुहम्मद के ही अनुयायियों में शुमार थे.

ये तस्वीर masjid al nabwi की है. यहां पैगंबर की कब्र हैं, इस जगह शिया सुन्नी दोनों जाते हैं.

ये तस्वीर masjid al nabwi की है. यहां पैगंबर की कब्र हैं, इस जगह शिया-सुन्नी दोनों जाते हैं.

सुन्नियों के 4 खलीफा तो शियाओं के इमाम कितने और कौन

शियाओं ने पहला इमाम अली को माना. दूसरा अली के बड़े बेटे हसन को, तीसरा इमाम अली के छोटे बेटे हुसैन को माना. चौथा इमाम हुसैन के बेटे ज़ैनुल-आबेदीन को माना. पांचवा इमाम ज़ैनुल-आबेदीन के बेटे मुहम्मद बाकिर, छठा इमाम ज़ाफर सादिक़, सातवां इमाम मुसा क़ाज़िम, आठवां इमाम अली रिज़ा, नवां इमाम मुहम्मद तक़ी, 10वां इमाम अली नक़ी, 11वां इमाम हसन असकरी और 12वां इमाम मुहम्मद मेहंदी को माना.

  • तीसरे इमाम हुसैन वही शख्स हैं जिन्हें इराक के शहर करबला में 72 लोगों के साथ कत्ल कर दिया गया था. इन्हीं की कुर्बानी की याद में शिया समुदाय मुहर्रम के महीने में गम मनाता है.
  • शियाओं ने पैगंबर के ही परिवार की पीढ़ियों को अपना इमाम इसलिए माना क्योंकि इनके और चुने गए खलीफाओं के इस्लामिक मूल्य अलग थे.
  • पैगंबर के परिवार के सदस्यों बेटी फातिमा, दामाद अली और नवासे हसन व हुसैन को सुन्नी समुदाय के लोग भी मानते हैं, सम्मान देते हैं लेकिन उनके कत्ल का गम नहीं मनाते.

रमज़ान में भी तीन दिन ग़म कौन और क्यों मनाते हैं

शिया समुदाय के लोग मुहर्रम के अलावा रमजान में भी तीन दिन गम मनाते हैं. ये दिन रमजान की 19, 20, 21 तारीख है. इन दिनों में गम इसलिए मनाया जाता है क्योंकि रमजान की 19 तारीख को पैगंबर मुहम्मद के दामाद और शियाओं के पहले इमाम हज़रत अली के सिर पर, मस्जिद में सुबह की नमाज पढ़ते वक्त तलवार से वार किया गया था. जिसके बाद उन्होंने 19, 20 दो दिन सर्वाइव किया और 21 को दुनिया से रुख़सत हो गए. इन तीनों दिन शिया समुदाय के लोग जिक्र ए अली कर, उन्हें याद करते हैं. इन तारीखों में खुशी का कोई आयोजन नहीं करते.

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