3500 Year Old Shivling: वाराणसी के पास गांव से हजारों वर्ष पुराना शिवलिंग मिला है. इसके बाद से खुदाई स्‍थल के आसपास लोगों की भारी भीड़ जमा है. Also Read - नीता अंबानी क्‍या BHU में विजिटिंग प्रोफेसर होंगी? रिलायन्स इंडस्ट्रीज के प्रवक्‍ता ने दिया ये बड़ा बयान

इस जगह की खुदाई का किस्‍सा भी काफी रोचक है. दरअसल, वाराणसी हेरिटेज प्रोजेक्ट्स के अंतर्गत पंचकोस परिक्रमा के लिए आसपास के क्षेत्रों में सर्वे का काम शुरू किया गया था. सर्वे के दौरान बभानियाव गांव में एक जगह पर कई सौ साल पुराने अवशेष मिले हैं. Also Read - CUCAT 2021-22: DU,JNU,BHU सहित सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए एक होगा एंट्रेंस टेस्ट! जानिए क्या है इसको लेकर सरकार की योजना

बभानियाव गांव

वाराणसी के पास बभानियाव गांव में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय यानी BHU के प्राचीन इतिहास विभाग की एक टीम पुरातात्विक खुदाई में जुटी थी. तभी यहां से ये अवशेष मिले. Also Read - BHU UET Result 2020 Declared: बीएचयू ने जारी किया UET 2020 का रिजल्ट, इस Direct Link से करें चेक 

BHU के प्रोफेसर ने खुदाई के दौरान प्राचीन ‘शिल्पग्राम’ होने की संभावना जताई. यह गांव 3500 वर्ष पुराना बताया जा रहा है. BHU के प्रोफेसरों ने यह दावा बभनियाव गांव में सर्वे के बाद मिले ताम्र पाषाण काल के मिट्टी के बर्तनों और कुषाण काल की ब्राह्मी स्क्रिप्ट के मिलने के बाद किया है.

दरअसल, वाराणसी हेरिटेज प्रोजेक्ट्स के अंतर्गत पंचकोस परिक्रमा के लिए आस-पास के क्षेत्रों में सर्वे का काम शुरू किया गया. सर्वे के दौरान बभानियाव गांव में कई सौ साल पुराने अवशेष मिले. बीएचयू के पुरातत्व विभाग ने खुदाई शुरू की तो 3500 वर्ष पुराना गुप्त कालीन शिवलिंग मिला. BHU के प्राचीन इतिहास के प्रोफेसर मानते हैं यह स्थान गुप्त काल के दौरान लोगों का उपासना स्थल रहा होगा.

खुदाई में मिट्टी के बर्तन और कई तरह की मूर्तियां मिलीं. इन मूर्तियों पर ब्राह्मी स्क्रिप्ट भी पाई गई. मिट्टी के ब्लैक एंड रेड वेयर बर्तन भी मिले हैं. इन बर्तनों का बाहरी हिस्सा काला और अंदरूनी हिस्सा लाल है. बीएचयू के इतिहासकारों का कहना है कि ऐसे बर्तन ताम्र पाषाण काल में यानी आज से 1500 ईसापूर्व (3500 वर्ष पहले) बनते थे. आपको बता दें कि बीएचयू के प्राचीन इतिहास और पुरातत्व विभाग की टीम बीते 26 फरवरी से बभनियाव गांव में खुदाई और सर्वेक्षण का काम कर रही है.