Achala Saptami 2020: रथ सप्तमी पर सूर्य देव का धरती पर अवतरण हुआ था. इसी कारण इस सप्‍तमी का विशेष महत्‍व है. भगवान सूर्य की पूजा के लिए ये दिन सर्वोत्‍तम माना जाता है.

माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी के दिन रथ सप्तमी मनाई जाती है. रथ सप्‍तमी इस साल 1 फरवरी, शनिवार को है. इस दिन भगवान सूर्य के उपासक व्रत रखते हैं.

रथ सप्‍तमी व्रत कथा

भगवान कृष्ण के पुत्र शाम्ब को अपने शारीरिक बल और सौष्ठव पर बहुत घमंड था. शाम्ब ने एक बार ऋषि दुर्वासा का अपमान कर दिया. इस अपमान से क्रोधित हुए ऋषि ने शाम्ब को कुष्ठ होने का श्राप दे दिया.

जब भगवान कृष्ण को इस श्राप के बारे में पता चला तो उन्होंने अपने पुत्र शाम्ब को सूर्य की आराधना करने को कहा. पिता की बात मान शाम्ब ने सूर्य की आराधना की. सूर्य देव शाम्ब की आराधना से प्रसन्न हुए और उन्होंने कुष्ठ रोग खत्म होने का आशीर्वाद दिया.

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क्‍या करें इस दिन

रथ सप्तमी को दान-पुण्य के लिए अत्‍यंत शुभ माना गया है. इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान करना चाहिए. स्नान करने के बाद सूर्योदय के समय सूर्यदेव को अर्घ्यदान देना चाहिए. फिर उनकी पूजा करें. शुद्ध घी का दीपक जलाएं. कपूर, धूप, फूल आदि से सूर्यदेव की पूजा करें.

कैसे करें अर्घ्यदान

भगवान सूर्य के सामने मुंह करके नमस्कार मुद्रा में खड़े हो जाएं. मुड़े हुए हाथ से छोटे कलश की सहयता से धीरे-धीरे जल अर्पित करें. लोटे या मिट्टी के बड़े पात्र से जल देना सर्वश्रेष्ठ है. अर्घ्य नदी में रहकर दे सकते हैं और घर पर भी. याद रखें उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देना सर्वोत्तम होता है. नवोदित रहने तक सूर्य को अर्घ्य दिया जा सकता है.

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