नई दिल्ली: 1 अक्टूबर यानी कल अधिक मास की पूर्णिमा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन लक्ष्मी नारायण की पूजा, दान-पुण्य व पवित्र नदी में स्नान का विधान है. पूर्णिमा के दिन चांद अपनी पूरी आकृति में होता है. इस दिन भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा करना भी काफी शुभ माना जाता है. मलमास की पू्र्णिमा के दिन पवित्र नदी या कुंड में स्नान और दान-पुण्य का महत्व है. कहते हैं इस दिन व्रत रखने वाले को श्री लक्ष्मीनारायण व्रत कथा अवश्य सुननी चाहिए.

अधिक मास पूर्णिमा मुहूर्त ( Adhik Maas Purnima subh muhurat)

आश्विन, शुक्ल पूर्णिमा
प्रारम्भ – 12:25 ए एम, 30 सितंबर
समाप्त – 02:34 ए एम, अक्टूबर 01

अधिक मास पूर्णिमा व्रत विधि ( Adhik Maas Purnima  Vrat puja vidhi)

इस दिन सबसे पहले सुबह जल्दी उठकरस्नान करें. पूजा की जगह की सफाई करें. पूजा के लिए एक चौकी पर आधा लाल और आधा पीला कपड़े का आसन बिछाएं. इसके बाद लाल कपड़े पर मां लक्ष्मी और पीले कपड़े पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. अब कुमकुम, हल्दी, अक्षत, रौली, चंदन, अष्टगंध से पूजन करें. सुगंधित पीले और लाल फूलों से बनी माला पहनाएं. मां लक्ष्मी को कमल का पुष्प अर्पित करें. सुहाग की समस्त सामग्री भेंट करें. मखाने की खीर और शुद्ध घी से बने मिष्ठान्न का नैवेद्य लगाएं. लक्ष्मीनारायण व्रत की कथा सुनें.

लक्ष्मी नारायण व्रत का महत्व ( Laxmi Narayan Vrat Importance)

पूर्णिमा पर लक्ष्मी-नारायण व्रत करने से मान्यता है कि मनुष्य की समस्त सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति होती है. इस व्रत को करने से धन, संपत्ति, सुख, वैभव में वृद्धि होती है. इस व्रत को गृहस्थ ही नहीं, अविवाहितों को भी करना चाहिए. इससे उन्हें सुयोग्य वर या वधु की प्राप्ति होती है. अधिकमास की पूर्णिमा को उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में वृद्धि योग और सर्वार्थसिद्धि योग और गुरुवार के संयोग ने इसे और भी प्रभावशाली बना दिया है.