नई दिल्ली: कालाष्टमी को काला अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है और हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान इसे मनाया जाता है. इस माह अधिकमास में आने के कारण  से अधिका कालाष्टमी कहा जाता है.  इस माह कालाष्टमी आज यानी 9 अक्टूबर 2020 यानी शुक्रवार को मनाई जा रही है.  कालभैरव के भक्त साल की सभी कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा और उनके लिए उपवास करते हैं. सबसे मुख्य कालाष्टमी जिसे कालभैरव जयन्ती के नाम से जाना जाता है, उत्तरी भारतीय पूर्णिमान्त पञ्चाङ्ग के अनुसार मार्गशीर्ष के महीने में पड़ती है जबकि दक्षिणी भारतीय अमान्त पञ्चाङ्ग के अनुसार कार्तिक के महीने पड़ती है. हालाँकि दोनों पञ्चाङ्ग में कालभैरव जयन्ती एक ही दिन देखी जाती है. यह माना जाता है कि उसी दिन भगवान शिव भैरव के रूप में प्रकट हुए थे. कालभैरव जयन्ती को भैरव अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है.

अधिका कालाष्टमी मुहूर्त

आश्विन, कृष्ण अष्टमी
प्रारम्भ – ०५:४९ पी एम, अक्टूबर ०९
समाप्त – ०६:१६ पी एम, अक्टूबर १०

अधिका कालाष्टमी की पूजा विधि

इस दिन भैरव चालीसा का पाठ करना चाहिए. कालाष्टमी के पावन दिन पर कुत्ते को भोजन कराना चाहिए. ऐसा करने से भैरव बाबा प्रसन्न होते हैं और सभी इच्छाओं को पूरा करते हैं भैरव बाबा का वाहन कुत्ता होता हैं इसलिए इस दिन कुत्ते को भोजन कराने से विशेष फल की प्राप्ति भक्तों को होती हैं.

अधिका कालाष्टमी के पीछे की पौराणिक मान्यताएं

मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने पापियों का विनाश करने के लिए अपना रौद्र रूप धारण किया था. शिव के दो रूप बताए जाते हैं बटुक ​भैरव और काल भैरव. जहां बटुक भैरव सौमय हैं वही काल भैरव रौद्र रूप में हैं. मासिक कालाष्टमी को पूजा रात को कि जाती हैं इस दिन काल भैरव की पूजा करने से भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं रात को चंद्रमा को जल चढ़ाने के बाद ही यह व्रत पूरा माना जाता हैं.