जैसा की आप जानते हैं कि इस वक्त अधिक मास चल रहा है और हिंदू धर्म में इसका बेहद खास महत्व है और आज अधिकमास चतुर्थी है. (Adhikmaas chaturthi) इस बार की विनायक चतुर्थी रविवार, 20 सितंबर को पड़ रही है. आज के दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है. मान्यताएं है कि इस दिन अगर आप बप्पा की पूजा करते हैं तो ऐसे में गणेश जी की कृपा आप पर सदैव बनी रहेगी. शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं. Also Read - Ganpati Puja: घर पर कर रहे हैं गणपित की पूजा तो बप्पा को चढ़ाएं ये खास चढ़ावे

भगवान श्री गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, विघ्नहर्ता यानी आपके सभी दु:खों को हरने वाले देवता है. अधिक मास में आने वाली चतुर्थी का और ज्यादा महत्व होता है. भगवान गणेश की कृपा से कुछ विशेष उपायों द्वारा आपकी कई सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं. ऐसे में चलिए जानते हैं आज का दिन क्या है खास और कैसे करें बप्पा की पूजा.

कैसे करें गणेश पूजन
सुबह उठकर नहा लें और उसके बाद ललाल रंग के वस्त्र पहनें औऱ इसके बाद सूर्य भगवान को तांबे के लोटे से अअर्घ्य दें. गणपति बप्पा को एक जटा वाली नारियल और मोदक प्रसाद के रुप में चढ़ाएं. इसके साथ ही उन्हें गुलाब के फूल औऱ दूर्वा अर्पण करें इसका साथ ही आप ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का 27 बार जाप करें तथा धूप दीप अर्पण करें. दोपहर के वक्त अपने घर में अपनी सामथ्र्य के अनुसार पीतल,तांबा,मिट्टी या फिर सोने या चांदी से निर्मित गणेश प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद बप्पा की आरती करें और मोदक का प्रसाद लोगों और बच्चों में बांट दें.

धन प्राप्ति के लिए पूजा
इस दिन आप अगर गणपित की पूजा करते हैं तो ऐसे में आपको रुके हुए धन की प्राप्ति हो सकती है. इसकी पूजा के लिए आप गणपति के सामने दूर्वा को बांधकर माला बनाएं और अर्पित करें और शुद्ध घी और गुड़ का भोग लगाएं इसके बाद “वक्रतुण्डाय हुं” मन्त्र का 54 बार जाप करें. धन लाभ की प्रार्थना करें थोड़ी देर बाद घी और गुड़ गाय को खिला दें.

संकटो नाश के लिए करें पूजा
आप पीले रंग का वस्त्र पहनें और इसके बाद चौमुखी की दीप जलाएं और उसेक बाद आपकी जितनी उम्र है उतने ही लड्डू रखें फिर एक एक करके सारे लड्डू चढ़ाएं और हर लड्डू के साथ “गं” मन्त्र जपते रहें.

विनायक चतुर्थी के मुहूर्त
रवि योग- सुबह 6 बजकर 08 मिनट से रात्रि 10 बजकर 52 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 39 मिनट तक.
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 16 मिनट से दोपहर 03 बजकर 05 मिनट तक.
अमृत काल मुहूर्त- दोपहर 2 बजकर 58 मिनट से शाम 04 बजकर 24 मिनट तक.