Ahoi Ashtami 2018: अहोई अष्टमी का त्योहार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष के 8वें दिन मनाया जाता है. यह पर्व उत्तर भारत में बड़े स्तर पर मनाया जाता है. करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद यह त्योहार आता है और दिवाली से 8 दिन पहले.

अहोई अष्टमी का महत्व:

अहोई अष्टमी के दिन माताएं अपने बच्चों की आयु और स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती हैं. इस व्रत को दीपावली की शुरुआत भी माना जाता है. करवा चौथ की तरह ही महिलाएं इस व्रत में भी सुबह उठकर स्नान करती हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण कर एक मिट्टी के मटके में पानी भरती हैं और माता अहोई की पूजा करती हैं. महिलाएं पूरे दिन कुछ खाती या पीती नहीं हैं. शाम को अहोई माता की पूजा करती हैं और उन्हें भोग लगाती हैं. भाग में पूरी, हलवा, चना आदि होता है. इस व्रत को तारे देखने के बाद खोला जाता है.

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अहोई अष्टमी और करवा चौथ व्रत के बीच एक खास अंतर यही है कि करवा चौथ का व्रत चांद देखकर खोला जाता है और अहोई अष्टमी का व्रत तारे देखकर. माता अहोई को भोग लगाने से पहले 7 पुत्रों की मां की कहानी भी जरूर पढ़ी जाती है. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से बच्चों के ऊपर आने वाली हर मुसीबत टल जाती है और बच्चों को दीर्घायु का वरदान मिलता है.

तिथि और शुभ मुहूर्त:

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी यानी 31 अक्टूबर को अहोई अष्टमी मनाई जाएगी.
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 31 अक्‍टूबर 2018 को सुबह 11 बजकर 09 मिनट से.
अष्टमी तिथि समाप्त: 01 नवंबर 2018 को सुबह 09 बजकर 10 मिनट तक.
पूजा का शुभ समय: 31 अक्‍टूबर 2018 को शाम 05 बजकर 45 मिनट से शाम 07 बजकर 02 मिनट तक.
कुल अवधि: 1 घंटे 16 मिनट.
तारों को देखने का समय: 31 अक्‍टूबर को शाम 06 बजकर 12 मिनट.
चंद्रोदय का समय: 1 नवंबर 2018 को रात 12 बजकर 06 मिनट.

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