Ahoi Ashtami 2018: दीपावली से आठ दिन पहले और करवा चौथ के दो दिन बाद अहोई अष्टमी व्रत का पर्व मनाया जाता है. इस दिन माताएं अपने पुत्र की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को तारों का दर्शन करने व अर्घ्य देने के बाद अपना व्रत खोलती हैं.

इस बार यह व्रत 31 अक्टूबर को किया जाएगा. अहोई अष्टमी का त्योहार हर साल कर्तिक मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से संतानों को जीवन में कोई कष्ट नहीं होता.

Ahoi Ashtami 2018: जानिये कब है अहोई अष्टमी, क्या है महत्व और शुभ मुहूर्त

अहोई अष्टमी व्रत: क्या करें और क्या नहीं

1. पूजा और व्रत के दिन लहसुन और प्याज का इस्तेमाल ना करें.

2. अहोई अष्टमी के दिन सूखी मिट्टी या गीली मिट्टी ना छूएं और ना ही कुदाल या खुरपी से काटें.

3. अहोई अष्टमी के दिन हाथ जोड़कर अहोई अष्टमी की व्रत कथा जरूर सुनें. व्रत कथा सुनने के दौरान अपने हाथ में गेहूं के सात अनाज जरूर रखें और व्रत कथा पूरी होने के बाद उसे किसी गाय को खिला दें या मंदिर में दान कर दें.

4. शाम को तारे देखें और अर्घ्य दें और कुछ पानी बचा लें. इस बचे हुए पानी से दिवाली के दूसरे दिन चंद्रमा को अर्घ्य दें.

5.  पूजा के बाद पंडित और घर के सभी लोगों को भोजन कराएं.

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