नई दिल्ली: अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami 2020) के दिन माताएं अपने पुत्रों की भलाई के लिए उपवास करती हैं. शाम के दौरान आकाश में तारों को देखने के बाद व्रत तोड़ा जाता है. कुछ महिलाएं चन्द्रमा के दर्शन करने के बाद व्रत को तोड़ती है लेकिन इसका अनुसरण करना कठिन होता है क्योंकि अहोई अष्टमी के दिन रात में चन्द्रोदय देर से होता है. इस साल अहोई अष्टमी का व्रत कल यानी 8 नवंबर 2020को मनाया जाएगा. होई अष्टमी का दिन अहोई आठें के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह व्रत अष्टमी तिथि, जो कि माह का आठवाँ दिन होता है, के दौरान किया जाता है. करवा चौथ के समान अहोई अष्टमी का दिन भी कठोर उपवास का दिन होता है और बहुत सी महिलाएँ पूरे दिन जल तक ग्रहण नहीं करती हैं. Also Read - Ahoi Ashtami 2020: यहां पढ़ें अहोई अष्टमी व्रत की पूरी कथा

चांदी की माला का महत्व
अहोई माता की पूजा के लिए कहीं कहीं चांदी के दानें लाएं जाते हैं और हर अहोई अष्टमी पर दो दानें माला में पिरोए डाले जाते हैं. इस तरह हर साल माला में दो चांदी के दाने पिरोए जाते हैं और उस माला को माताएं पूजा के बाद धारण करती हैं. इसके बाद किसी भी अच्छे दिन इस माला की पूजा करके उतारा जाता है. इसके बाद अगली होई पर फिर चांदी के दो मनके माला में पिरोए जाते हैं. इस माला को भी पूजा में शामिल किया जाता है. Also Read - Ahoi Ashtami 2020 Upay: संतान प्राप्ति के लिए अहोई अष्टमी पर करें ये खास उपाय, पूरी होगी हर मनोकामना

अहोई अष्टमी शुभ मुहूर्त (Ahoi Ashtami Subh Muhurat 2020) Also Read - Ahoi Ashtami 2020: अहोई अष्टमी के दिन भूलकर भी ना करें ये काम, वरना संतान को पहुंचेगा नुकसान

अष्टमी तिथि प्रारंभ: 08 नवंबर को सुबह 07 बजकर 29 मिनट
अष्टमी तिथि समाप्त: 09 नवंबर को सुबह 06 बजकर 50 मिनट पर
पूजा का मुहूर्त: 5 बजकर 37 मिनट से शाम 06 बजकर 56 मिनट के बीच.