
Renu Yadav
रेनू यादव, India.Com हिंदी में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में करीब 15 वर्षों के अनुभव के दौरान उन्हें टेक्नोलॉजी, धर्म, लाइफस्टाइल, हेल्थ व अन्य विषयों ... और पढ़ें
Ahoi Ashtami Syau Mala Significance: हिंदू धर्म में प्रत्येक व्रत का विशेष महत्व माना गया है क्योंकि हर व्रत किसी न किसी इच्छा या मनोकामना से रखा जाता है. व्रत व पूजा के लिहाज से कार्तिक माह काफी महत्वपूर्ण होता है. इस माह कई व्रत व त्योहार आते हैं और इनमें से एक अहोई अष्टमी का व्रत. जो कि कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि (Ahoi Ashtami 2023 Date) के दिन रखा जाता है. यह व्रत महिलाएं संतान प्राप्ति और संतान की लंबी उम्र की कामना से रखती हैं. इस दिन अहोई माता का पूजन किया जाता है और महिलाएं स्याहु माला पहनती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं क्या होती है स्याहु माला और अहोई अष्टमी के दिन आखिर क्यों पहनी जाती है?
हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है. पंचांग के अनुसार इस साल यह तिथि 5 नवंबर को देर रात 12 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 6 नवंबर को सुबह 3 बजकर 18 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार अहोई अष्टमी का व्रत 5 नवंबर, रविवार के दिन रखा जाएगा.
अहोई अष्टमी का व्रत महिलाएं संतान की लंबी आयु की कामना से रखती हैं और इस दिन अहोई माता का पूजन किया जाता है. साथ ही स्याहु माला का पूजन कर उसे गले में पहना जाता है. स्याहु माला की बात करें तो यह एक चांदी लाल या सफेद धागे की माला होती है जिसमें स्याहु माला की तस्वीर लगी होती है और चांदी के मोती होते हैं. हर साल माला में दो चांदी के मोती बढ़ाए जाते हैं. कहते हैं कि इस अहोई के दिन इस माला की पूजा करने से स्याहु माता प्रसन्न होती हैं और संतान की लंबी आयु का आशीर्वाद देती हैं.
अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और अहोई माता का पूजन करती हैं. इस दिन पूजा के लिए मंदिर में अहोई माता की तस्वीर की लगाएं और वहां मिट्टी के घड़े में पानी भरकर रखें. अहोई माता की तस्वीर पर स्याहु माला पहनाएं और पूजा करें. ध्यान रखें कि इस पूजा में संतान को साथ बिठाना शुभ माना जाता है. सबसे पहले अहोई माता की तिलक करें और फिर स्याहु माता के लॉकेट पर तिलक करें. फिर वह माला अपने गले में पहन लें. दिनभर निर्जना व्रत रखने के बाद शाम को तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें. इस माला को दिवाली तक पहना जाता है और फिर इसे संभालकर रख जाता है. वहीं पूजा में रखे गए मिट्टी के घड़े का पानी दिवाली के दिन संतान को नहलाने के लिए उपयोग किया जाता है. कहते हैं कि यह स्याहु माता का आशीर्वाद होता है और इससे संतान को लंबी उम्र व अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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