
Renu Yadav
रेनू यादव, India.Com हिंदी में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में करीब 15 वर्षों के अनुभव के दौरान उन्हें टेक्नोलॉजी, धर्म, लाइफस्टाइल, हेल्थ व अन्य विषयों ... और पढ़ें
Ahoi Ashtami 2025: हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी के व्रत का विशेष महत्व माना गया है और इस दिन माताएं संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं. यह व्रत भी करवा चौथ की तरह काफी कठिन होता है और इसमें भी अन्न-जल का सेवन नहीं किया जाता. कुछ महिलाएं संतान प्राप्ति की कामना से भी अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं और इसे बेहद ही फलदायी माना गया है. इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्टूबर 2025 को रखा जाएगा. इस दिन अहोई माता का पूजन किया जाता है और महिलाएं स्याहु माला पहनती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं क्या होती है स्याहु माला और अहोई अष्टमी के दिन आखिर क्यों पहनी जाती है?
अहोई अष्टमी का व्रत विशेष तौर पर संतान के लिए रखा जाता है. माताएं संतान की लंबी आयु की कामना से यह व्रत रखती हैं और कुछ महिलाएं संतान प्राप्ति की कामना से इस व्रत को करती हैं. इस दिन अहोई माता का पूजन किया जाता है और स्याहु माला पहनी जाती है. स्याहु माला की बात करें तो यह एक लाल या सफेद धागे की माला होती है जिसमें स्याहु माला की चांदी की तस्वीर लगी होती है और इसमें चांदी के मोती होते हैं. हर साल माला में दो चांदी के मोती बढ़ाए जाते हैं. कहते हैं कि इस अहोई के दिन इस माला की पूजा करने से स्याहु माता प्रसन्न होती हैं और संतान की लंबी आयु का आशीर्वाद देती हैं.
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अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता व स्याहु माता का पूजन किया जाता है. इस दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद नए वस्त्र पहनें और मंदिर को स्वच्छ करें. इसके बाद मंदिर में चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर अहोई माता की तस्वीर की लगाएं और वहां मिट्टी के घड़े में पानी भरकर रखें. अहोई माता की तस्वीर पर स्याहु माला पहनाएं और पूजा शुरू करें. इस पूजा में संतान को साथ बिठाना शुभ माना जाता है. सबसे पहले अहोई माता की तिलक करें और फिर स्याहु माता के लॉकेट पर तिलक करें. फिर वह माला अपने गले में पहन लें.
इस दिन निर्जला व्रत रखा जाता है और शाम के समय तारों का अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है. गले में पहनी हुई स्याहु माला को दिवाली तक पहना जाता है और वहीं पूजा में रखे गए मिट्टी के घड़े का पानी दिवाली के दिन संतान को नहलाने के लिए उपयोग किया जाता है. जो महिलाएं संतान प्राप्ति की कामना से इस व्रत को करती हैं वह स्वंय नहाते समय इस पानी का उपयोग करें. कहते हैं कि यह स्याहु माता का आशीर्वाद होता है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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