Aja Ekadashi Vrat 2018: एक साल में 24 एकादशी व्रत आते हैं. जब मलमास लगता है तब इसकी संख्या 26 हो जाती है. भाद्रपद के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है. इसे जया या अन्नदा एकादशी भी कहते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधिपूर्वक पूजन करने वाले जातकों को पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष प्राप्त होता है. इस व्रत के प्रभाव से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. Also Read - यूपी: गोरखनाथ मंदिर में पहुंचे सीएम योगी, आंवले के पेड़ के नीचे किया भोजन

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तिथि और मुहूर्त :

अजा एकादशी व्रत तिथि : 6 सितंबर 2018

पारण का समय – 7 सितंबर को 06:06 से 08:35 बजे तक

एकादशी तिथि कब शुरू हो रही है – 05 सितंबर 2018 को 15:01 बजे

एकादशी तिथि समाप्त – 06 सितंबर को 12:15 बजे

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साल 2018 में अजा एकादशी का पावन व्रत 6 सितंबर गुरुवार को रखा जाएगा. एकादशी तिथि 5 सितंबर को बुधवार के दिन 3 बजकर 1 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन यानी 6 सितंबर को 12:15 बजे पर समाप्त होगी.

व्रत का पारण 7 सितंबर शुक्रवार को सुबह 6 बजकर 6 मिनट से 8 बजकर 35 मिनट तक का होगा.

अजा एकादशी व्रत विधि:

1. जिस प्रकार अन्य एकादशी के व्रत का संकल्प लेने का विधान है ठीक उसी प्रकार अजा एकादशी के व्रत का संकल्प लेना होता है.

2. सबसे पहले दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर और स्नान आदि के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए और सच्चे मन से व्रत का संकल्प लेना चाहिए.

3. भगवान विष्णु जी की प्रतिमा के सामने धूप, दीप, नेवैद्य, फूल और फल अर्पित करने चाहिए.

4. यदि संभव हो तो एक समय फलाहार करना चाहिए.

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5. विष्णु जी की पूजा में तुलसी का प्रयोग जरूर करें. ऐसा कहा जाता है कि तुलसी का प्रयोग करने से भगवान नारायण अति प्रसन्न होते हैं.

जो भी जातक इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु की सच्चे मन से पूजा करता है और व्रत रखता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है.

अजा एकादशी व्रत का महत्व:

शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु को एकादशी बहुत अधिक प्रिय है. इसलिए जो भी भक्त पूरी श्रद्धा से व्रत करते हैं वो भगवान की कृपा से संसार के सभी सुखों को प्राप्त कर लेते हैं.

एकादशी के व्रत में रात्रि जागरण, गौ पूजन और दान का भी विशेष महत्व है. इस दिन किए गए दान से व्यक्ति को पुण्य फलों की प्राप्ति होती है.

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