नई दिल्ली:  कल 26 अप्रैल यानि रविवार को अक्षय तृतीया है. पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है. इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है. वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किंतु वैशाख माह की तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है. अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं. मान्‍यता है क‍ि अक्षय तृतीया के द‍िन सौभाग्‍य और शुभ फल का कभी क्षय नहीं होता. यानी कि इस दिन जो भी काम किया जाए उसका फल कई गुना मिलता है और वह कभी घटता भी नहीं है. Also Read - Akshaya Tritiya 2020: अक्षय तृतीया पर आखिर क्यों खरीदा जाता है सोना, यहां जानें वजह

अक्षय तृतीया की तिथि और शुभ मुहूर्त Also Read - Akshaya Tritiya 2020: लॉकडाउन में भी आसानी से खरीद सकेंगे सोना, मिलेंगे खास ऑफर

तिथि: 26 अप्रैल 2020
तृतीया तिथि आरंभ: 25 अप्रैल 2020 को सुबह 11 बजकर 51 मिनट से
तृतीया तिथि समाप्‍त: 26 अप्रैल 2020 को दोपहर 1 बजकर 22 मिनट तक
पूजा मुहूर्त: 26 अप्रैल 2020 को सुबह 5 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक
कुल अवधि: 6 घंटे 34 मिनट
सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त: 25 अप्रैल 2020 को सुबह 11 बजकर 51 मिनट से 26 अप्रैल 2020 को सुबह 5 बजकर 45 मिनट तक
कुल अवधि: 17 घंटे 53 मिनट Also Read - Akshaya Tritiya 2020 Date: 26 अप्रैल को मनाया जाएगा अक्षय तृतीया का पर्व, जानें महत्व, योग और मुहूर्त से जुड़ी सभी बातें

पूजन विधि-

अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा की जाती है. इस दिन विष्णु जी को चावल चढ़ाना काफी शुभ माना जाता है. विष्‍णु और लक्ष्‍मी का पूजन कर उन्‍हें तुलसी के पत्तों के साथ भोजन अर्पित किया जाता है. अक्षय तृतीया सर्वसिद्ध मुहूर्तों में से एक मुहूर्त है. इस दिन भक्तजन भगवान विष्णु की आराधना में लीन होते हैं. स्त्रियां अपने और परिवार की समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं. ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करके श्री विष्णुजी और मां लक्ष्मी की प्रतिमा पर अक्षत चढ़ाना चाहिए. शांत चित्त से उनकी श्वेत कमल के पुष्प या श्वेत गुलाब, धुप-अगरबत्ती एवं चन्दन इत्यादि से पूजा अर्चना करनी चाहिए. नैवेद्य के रूप में जौ, गेंहू, या सत्तू, ककड़ी, चने की दाल आदि का चढ़ावा करें. इसी दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें. साथ ही फल-फूल, बर्तन, वस्त्र, गौ, भूमि, जल से भरे घड़े, कुल्हड़, पंखे, खड़ाऊं, चावल, नमक, घी, खरबूजा, चीनी, साग, आदि दान करना पुण्यकारी माना जाता है.