भगवान विष्‍णु के प्रमुख व्रतों में से एक है एकादशी (Ekadashi) व्रत. अब जो एकादशी आ रही है वो है आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi). इसे शुक्‍ल एकादशी भी कहा जाता है. Also Read - Ekadashi Calendar 2020: नए साल में आएंगे 25 एकादशी व्रत, देखें पूरे साल का व्रत कैलेंडर...

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Amalaki Ekadashi 2019 Date
आमलकी एकादशी 2019 का व्रत 17 मार्च, रविवार को किया जाएगा. आमलकी आंवले को कहते है. जिस तरह अक्षय नवमी को आंवले की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार इस दिन भी आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है.

Amalaki Ekadashi Vrat Katha
वैदिश नाम का एक नगर था. उस नगर में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र रहते थे. वहां रहने वाले सभी नगरवासी विष्‍णु भक्‍त थे और वहां कोई भी नास्‍त‍िक नहीं था. उसके राजा का नाम था चैतरथ. राजा चैतरथ विद्वान थे और वह बहुत धार्मिक थे. सबसे खास बात थी कि उस नगर में कोई भी व्‍यक्‍त‍ि दरिद्र नहीं था. नगर में रहने वाला हर शख्‍स एकादशी का व्रत करता था.

एक बार फाल्‍गुन महीने में आमलकी एकादशी आई. सभी नगरवासी और राजा ने यह व्रत किया और मंदिर जाकर आंवले की पूजा की और वहीं पर रात्र‍ि जागरण किया. तभी रात के समय वहां एक बहेलिया आया. बहेलिया घोर पापी था. लेकिन उसे भूख और प्‍यास लगी थी. इसलिए मंदिर के कोने में बैठकर जागरण को देखने लगा और विष्‍णु भगवान व एकादशी महात्‍म्‍य की कथा सुनने लगा. पूरी रात बीत गई. नगरवासियों के साथ बहेलिया भी पूरी रात जागा रहा. सुबह होने पर सभी नगरवासी अपने घर चले गए. बहेलिया भी घर जाकर भोजन किया. कुछ समय के बाद ही बहेलिया की मौत हो गई.

लेकिन उसने आमलकी एकादशी व्रत कथा सुनी थी और जागरण भी किया था, इसलिए वह राजा विदूरथ के घर जन्‍म लिया. राजा ने उसका नाम वसुरथ रखा. बड़ा होकर वह नगर का राजा बना. एक दिन वह शिकार पर निकला, लेकिन बीच में ही मार्ग भूल गया. रास्‍ता भूल जाने के कारण वह एक पेड़ के नीचे सो गया.

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थोड़ी देर बाद वहीं म्लेच्छ आ गए और राजा को अकेला देखकर उसे मारने की योजना बनाने लगे. उन्‍होंने कहा कि इसी राजा के कारण उन्‍हें देश निकाला दिया गया. इसलिए इसे हमें मार देना चाहिए. इस बात से अनजान राजा सोता रहा. म्‍लेच्‍छों ने राजा पर हथियार फेंकना शुरू कर दिया. लेकिन उनके शस्‍त्र राजा पर फूल बनकर गिरने लगे.

कुछ देर के बाद सभी म्‍लेच्‍छे जमीन पर मृत पड़े थे. राजा की जब नींद खुली तो उन्‍होंने देखा कि कुछ लोग जमीन पर मृत पड़े हैं. राजा समझ गया कि वह सभी उसे मारने के लिए आए थे, लेकिन किसी ने उन्‍हें ही मौत की नींद सुला दी. यह देखकर राजा ने कहा कि जंगल में ऐसा कौन है, जिसने उसकी जान बचाई है. तभी आकाशवाणी हुई कि हे राजन भगवान विष्‍णु ने तुम्‍हारी जान बचाई है. तुमने पिछले जन्‍म में आमलकी एकादशी व्रत कथा सुना था और उसी का फल है कि आज तुम शत्रुओं से घि‍रे होने के बावजूद जीवित हो. राजा अपने नगर लौटा और सुखीपूर्वक राज करने लगा और धर्म के कार्य करने लगा.

महर्षि वशिष्ठ बोले कि हे राजन्! यह आमलकी एकादशी के व्रत का प्रभाव था. जो मनुष्य इस आमलकी एकादशी का व्रत करते हैं, वे प्रत्येक कार्य में सफल होते हैं और अंत में विष्णुलोक को जाते हैं.

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