नई दिल्‍ली: फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी के रूप में जाना जाता है. जो कि आज यानी 17 मार्च को है. आमलकी एकादशी के दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है. ऐसी मान्‍यता है कि एकादशी के दिन भगवान विष्‍णु आंवले के पेड़ पर रहते हैं. इसलिए इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है.

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आमलकी एकादशी 2019 व्रत तिथि व मुहूर्त
आमलकी एकादशी – 17 मार्च 2019
पारण का समय (व्रत तोड़ने का समय) = सुबह 06:32 से 08:55 बजे तक (18 मार्च 2019)
द्वादशी समापन समय = सायं 05:43 बजे (18 मार्च 2019)

एकादशी तिथि प्रारम्भ = 23:33 बजे (16 मार्च 2019)
एकादशी तिथि समाप्त = 20:51 बजे (17 मार्च 2019)

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आमलकी एकादशी का महत्‍व
आमलकी आंवले को कहते है. जिस तरह अक्षय नवमी को आंवले की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार इस दिन भी आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है. आमलकी एकादशी में आंवले के पेड़ नीचे भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए. इस एकादशी के बारे में कई पुराणों में जिक्र आता है. बताते हैं कि अमालकी एकादशी के दिन आंवले की पूजा का महत्व इसलिए है क्‍योंकि इस दिन सृष्टि का आरंभ मानते हैं और उसमें सबसे पहले आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति की बात कही जाती है. इसलिए इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है.

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व्रत का पारण
एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं. एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है. एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अति आवश्यक है. यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है. द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना पाप करने के समान होता है.

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