हर साल शिवभक्‍तों को अमरनाथ यात्रा (Amarnath yatra) का बेसब्री से इंतजार रहता है. वे लोग इस इंतजार में रहते हैं कि यात्रा आरंभ हो और वे बाबा बर्फानी के दर्शन करें.

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Amarnath yatra 2019 Date
इस बार अमरनाथ यात्रा 46 दिन तक चलेगी. ये फैसला अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) की बैठक में लिया गया है. एसएएसबी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, यात्रा की तारीख और अवधि का फैसला श्री श्री रविशंकर कमेटी की सलाह के आधार पर लिया गया है.

बयान में कहा गया है कि बोर्ड ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यात्रा की अवधि एक जुलाई (मासिक शिवरात्रि) से 15 अगस्त (श्रावण पूर्णिमा/रक्षा बंधन) तक यानी 46 दिन नियत किया है.

बोर्ड ने पायलट आधार पर तीर्थयात्रियों के पंजीकरण की मौजूदा व्यवस्था के अलावा प्रतिदिन सीमति संख्या में ऑनलाइन पंजीकरण के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है.

अमरनाथ का इतिहास
अमरनाथ हिन्दुओं का एक प्रमुख तीर्थस्थल है. यह कश्मीर राज्य के श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में 135 किलोमीटर दूर समुद्रतल से 13600 फुट की ऊंचाई पर स्थित है. इस गुफा की लंबाई (भीतर की ओर गहराई) 19 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है. गुफा 11 मीटर ऊंची है. अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है.

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अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है, क्योंकि यहीं पर भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था. यहां की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का बनना है. प्राकृतिक हिम से बने होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं. आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखों लोग यहां आते हैं.

गुफा की परिधि लगभग डेढ़ सौ फुट है और इसमें ऊपर से बर्फ के पानी की बूँदें जगह-जगह टपकती रहती हैं. यहीं पर एक ऐसी जगह है, जिसमें टपकने वाली हिम बूंदों से लगभग दस फुट लंबा शिवलिंग बनता है.

चन्द्रमा के घटने-बढ़ने के साथ-साथ इस बर्फ का आकार भी घटता-बढ़ता रहता है. श्रावण पूर्णिमा को यह अपने पूरे आकार में आ जाता है और अमावस्या तक धीरे-धीरे छोटा होता जाता है. आश्चर्य की बात यही है कि यह शिवलिंग ठोस बर्फ का बना होता है, जबकि गुफा में आमतौर पर कच्ची बर्फ ही होती है जो हाथ में लेते ही भुरभुरा जाए. मूल अमरनाथ शिवलिंग से कई फुट दूर गणेश, भैरव और पार्वती के अलग-अलग हिमखंड हैं.

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