अमरनाथ यात्रा के लिए 5,486 श्रद्धालुओं का एक और जत्था गुरुवार को जम्मू से रवाना हुआ. इस साल एक जुलाई से यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 1.3 लाख से अधिक श्रद्धालु समुद्र तल से 3,888 मीटर ऊपर स्थित बाबा बफार्नी के दर्शन कर चुके हैं. Also Read - अमरनाथ यात्रा इस साल भी रद्द, कोरोना संकट को देखते हुए अमरनाथ बोर्ड का बड़ा फैसला

जम्‍मू पुलिस ने बताया कि 5,486 यत्रियों का एक और जत्था भगवती नगर यात्री निवास से घाटी के लिए दो सुरक्षा काफिले में रवाना हुआ. Also Read - अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले मारा गया मोस्ट वांटेड पाक आतंकी वलीद, सेना ने कहा- यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध

जम्‍मू पुलिस ने बताया, “इनमें से 2,129 यात्री बालटाल आधार शिविर जा रहे हैं जबकि 3,357 पहलगाम आधार शिविर जा रहे हैं.” Also Read - 23 जून से शुरू होगी बाबा अमरनाथ यात्रा, श्राइन बोर्ड ने वापस लिया यात्रा रद्द करने का फैसला

तीर्थयात्री पवित्र गुफा तक जाने के लिए या तो अपेक्षाकृत छोटे 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से जाते हैं या 45 किलोमीटर लंबे पहलगाम मार्ग से जाते हैं.

दोनों आधार शिविरों पर हालांकि तीर्थ यात्रियों के लिए हैलीकॉप्टर की सेवाएं हैं.

स्थानीय मुस्लिमों ने भी हिंदू तीर्थयात्रियों की सुविधा और आसानी से यात्रा सुनिश्चित कराने के लिए बढ़-चढ़कर सहायता की है.

प्रदेश के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि अमरनाथ यात्रा को शांतिपूर्ण तरीके से पूरी करना सिर्फ स्थानीय मुस्लिमों की सक्रियता के कारण ही संभव हुआ है.

पवित्र गुफा की खोज साल 1850 में एक मुस्लिम चरवाहा बूटा मलिक ने की थी.

किवदंतियों के अनुसार, एक सूफी संत ने चरवाहे को कोयले से भरा एक बैग दिया था, बाद में कोयला सोने में बदल गया था.

लगभग 150 सालों से चरवाहे के वंशजों को पवित्र गुफा पर आने वाले चड़ावे का कुछ भाग दिया जाता है. इस साल 45 दिवसीय अमरनाथ यात्रा का समापन 15 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के साथ होगा.